त्योहारी सीजन में घर की सजावट, नए गैजेट्स की खरीदारी और उपहार बांटने की परंपरा इस बार आम उपभोक्ताओं के बजट को काफी प्रभावित कर रही है। निर्माण सामग्री और कच्चे माल की बढ़ती लागत, खराब मौसम के कारण फसलों को हुए नुकसान और अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाने से बाजार के विभिन्न क्षेत्रों में कीमतों में तेज वृद्धि देखने को मिल रही है। टेलीविजन और एयर कंडीशनर जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के दामों में 3 से 7 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि पारंपरिक मिठाइयों के भाव 15 फीसदी तक चढ़ गए हैं। इसके अलावा त्योहारी गिफ्ट पैक और घरेलू पकवानों में इस्तेमाल होने वाले बादाम और पिस्ता सहित तमाम सूखे मेवों के दाम भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में पिस्ता के भाव लगभग दोगुने स्तर पर पहुंच चुके हैं। बाजार विश्लेषकों और कारोबारियों का मानना है कि कीमतों में इस इजाफे के चलते कुल बिक्री का कारोबार भले ही आंकड़ों में बढ़ता दिखे, लेकिन वास्तविक रूप से बिकने वाली यूनिट्स की संख्या में गिरावट आ सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों पर बढ़ा लागत का दबाव
त्योहारों के दौरान आमतौर पर टीवी, फ्रिज और एसी जैसे होम अप्लायंसेज की मांग बहुत अधिक रहती है और ग्राहक विशेष छूट तथा ऑफर्स का इंतजार करते हैं। हालांकि, इस बार बाजार का परिदृश्य थोड़ा अलग है क्योंकि हायर, एलजी और ब्लू स्टार जैसी दिग्गज कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। नतीजतन, फेस्टिव ऑफर्स और डिस्काउंट के बावजूद आम खरीदारों को नया उपकरण घर ले जाने के लिए अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी विजय सेल्स का आकलन है कि इस त्योहारी सीजन में मूल्य के आधार पर बिक्री में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बेची जाने वाली इकाइयों यानी यूनिट्स की संख्या में केवल सिंगल डिजिट में ही बढ़त दर्ज होने का अनुमान है। विजय सेल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश गुप्ता के अनुसार, बाजार में ग्राहक अब बड़े खर्चों के लिए मासिक किस्तों यानी ईएमआई के विकल्पों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। उनकी कुल बिक्री में से लगभग 70 फीसदी खरीदारी अब ईएमआई के जरिए हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहारी सीजन बेहतर रहा है और राजस्व के लिहाज से दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की जाएगी, लेकिन बिकने वाले गैजेट्स की वास्तविक संख्या सीमित ही रहेगी।
इसी तरह सेलेकोर गैजेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि अग्रवाल का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में इस पूरे उद्योग को छोटे और बड़े दोनों प्रकार के घरेलू उपकरणों के सेगमेंट में कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आज के उपभोक्ता पहले के मुकाबले काफी ज्यादा जागरूक हो चुके हैं। वे कोई भी नया होम अप्लायंस या गैजेट खरीदने से पहले बाजार में गहन रिसर्च कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि खर्च किए जा रहे प्रत्येक रुपये का उन्हें पूरा और सही मूल्य प्राप्त हो।
दूध, चीनी और मेवों की महंगाई ने बिगाड़ा मिठाइयों का गणित
मिठाइयों की मिठास पर भी चारों तरफ से बढ़ती उत्पादन लागत का गहरा असर पड़ा है। दूध, मावा यानी खोया, चीनी, मेवे और पैकेजिंग बॉक्स की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश की थोक मंडियों में चीनी का भाव 4,800 रुपये प्रति क्विंटल से उछलकर 5,700 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच चुका है। दूसरी तरफ, हाल ही में कर्नाटक कैबिनेट ने नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि को अपनी मंजूरी दी है। इन सभी कारणों से मिठाई निर्माताओं के सामने कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
दिल्ली की एक प्रमुख मिठाई दुकान श्रृंखला के प्रवक्ता ने बताया कि त्योहारों के मौके पर मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों की मांग में कोई कमी नहीं आएगी, लेकिन इस बार ग्राहक महंगे विकल्पों की जगह छोटे डिब्बों की खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व के बाद से ही उपभोक्ता व्यवहार में यह बदलाव साफ देखा जा रहा है। इसी स्थिति के बीच कंपनी ने दिवाली से ठीक पहले अपने सभी उत्पादों के दामों में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी लागू की है।
राजस्थान के जयपुर में प्रीमियम और पारंपरिक मिठाइयों के कारोबार से जुड़ी 'त्योहार स्वीट्स' की संचालक अंजलि जैन का कहना है कि बढ़ती लागत की वजह से उन्हें इस वर्ष मिठाइयों के भाव में 10 से 12 फीसदी की वृद्धि करनी पड़ी है। उनके अनुसार दूध, चीनी और सूखे मेवों जैसे बुनियादी कच्चे माल के साथ-साथ चांदी के वर्क और फैंसी डिब्बों की पैकेजिंग लागत में भी तेज उछाल आया है। अंजलि जैन ने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए कई कारोबारियों ने अब गिफ्टिंग हैम्पर्स में महंगे मेवों के स्थान पर सीड्स मिक्स यानी बीजों के मिश्रण का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
बादाम और पिस्ता के दामों में जबरदस्त उछाल
इस त्योहारी सीजन में सूखे मेवों के बाजार में सबसे अधिक तेजी दर्ज की जा रही है। प्रमुख उत्पादक देशों में फसल की पैदावार प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से यह संकट गहराया है। पिछले साल दिवाली के समय जो बादाम 800 से 900 रुपये प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध था, वह अब खुदरा बाजार में चढ़कर 1,000 से 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। वहीं, पिछले साल 900 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिकने वाला पिस्ता अब भारी उछाल के साथ 1,500 से 2,100 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर पहुंच गया है।
नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल (इंडिया) के अध्यक्ष गुंजन जैन ने जानकारी दी कि पिछली दिवाली की तुलना में बादाम की कीमतों में लगभग 35 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि पिस्ता की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। गुंजन जैन के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में प्रतिकूल मौसम के कारण फसल की पैदावार कम रही है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध की वजह से समुद्री माल ढुलाई के भाड़े में भी भारी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर भारत में आयातित ड्राई फ्रूट्स की कीमतों पर पड़ा है।


















