अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में दक्षिण कोरियाई वॉन की दिशा को लेकर एक नया विश्लेषण सामने आया है, जिसके तहत आने वाले वर्षों में इस एशियाई मुद्रा में क्रमिक मजबूती देखने को मिल सकती है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दक्षिण कोरियाई वॉन का स्तर 2026 के अंत तक 1320 और 2027 के अंत तक 1260 तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। मुद्रा विश्लेषक सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, वॉन की मजबूती का यह सफर सीधा या एकतरफा नहीं रहेगा, बल्कि इसमें समय-समय पर तेज उतार-चढ़ाव और दोतरफा जोखिम देखने को मिलेंगे।
सेमीकंडक्टर निर्यात और एआई मांग से मिलेगा मध्यम अवधि में सहारा
मध्यम अवधि में दक्षिण कोरियाई वॉन के पक्ष में कई बुनियादी आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। कोरियाई अर्थव्यवस्था की निर्यात क्षमता काफी मजबूत बनी हुई है, विशेषकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े उत्पादों और चिप्स की वैश्विक मांग लगातार ऊंची बनी हुई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की आक्रामक मजबूती कम होगी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें सामान्य होंगी, वॉन को मध्यम अवधि में ठोस आधार मिलेगा।
निकट अवधि में अस्थिरता और उच्च बीटा जोखिम की चुनौती
भले ही मध्यम अवधि का परिदृश्य सकारात्मक दिख रहा हो, लेकिन अल्पावधि में वॉन के सामने कई पेचीदा चुनौतियां हैं। वॉन को एक हाई-बीटा मुद्रा माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह वैश्विक जोखिम धारणा और अंतरराष्ट्रीय पोर्टफोलियो प्रवाह में होने वाले बदलावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है या अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल उच्च स्तर पर बने रहते हैं, तब वॉन पर दबाव तेजी से बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में संभावित और बढ़ोतरी की आशंकाओं के चलते अल्पकालिक बाजार में अस्थिरता बनी रहने का जोखिम बना हुआ है।
एशियाई और वैश्विक मुद्रा बाजारों में मिला-जुला रुख
दक्षिण कोरियाई वॉन के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD ने सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान आई गिरावट से वापसी की। ईरान को लेकर कूटनीतिक वार्ताओं में नए सिरे से बनी सकारात्मक उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा मिला। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA के नीतिगत फैसले से पहले व्यापारी नए सौदे बनाने से बच रहे हैं, जिससे हाजिर भाव पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही रहे।
जापानी येन और हस्तक्षेप की चेतावनी
दूसरी तरफ जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY में नए सप्ताह की शुरुआत में बढ़त देखने को मिली। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान यानी BoJ के घटनाक्रम के बाद 157.00 से नीचे के निचले स्तर तक लुढ़कने के बाद इस जोड़ी ने वापसी की और एशियाई सत्र में भाव 158.00 के आसपास पहुंच गए। खास बात यह रही कि जापान के वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी दिए जाने के बावजूद डॉलर की गति पर कोई खास असर नहीं पड़ा और येन में दबाव बना रहा।
सोने में सुधार की कोशिश और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
कमोडिटी बाजार में अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की सकारात्मक खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने सर्राफा बाजार को सहारा दिया। शुक्रवार को 3,870 डॉलर प्रति औंस के नए वार्षिक निचले स्तर पर फिसलने और अक्टूबर महीने में 6.87% की भारी गिरावट दर्ज करने के बाद सोने ने कुछ खोई जमीन वापस पाई। हालांकि, बुनियादी आर्थिक परिस्थितियों के चलते इस सुधार की निरंतरता पर संदेह बना हुआ है। वहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था 3.4% की वार्षिक दर से बढ़ी, फिर भी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई और नैस्डैक ने मार्च 2025 के बाद से अक्टूबर में अपना सबसे खराब मासिक प्रदर्शन दर्ज किया। निवेशक अब कंपनियों के केवल पूंजीगत खर्च के बजाय यह परख रहे हैं कि क्या यह खर्च पूंजी लागत से अधिक रिटर्न और नकदी प्रवाह पैदा कर सकता है।

















