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यूके ने मानी भारत की शर्त, कार्बन टैक्स के फॉर्मूले पर बनी सहमति से निर्यातकों को राहतव्यापार
8 सित॰ 2026, 11:32 am (57 मिनट पहले)· 2

यूके ने मानी भारत की शर्त, कार्बन टैक्स के फॉर्मूले पर बनी सहमति से निर्यातकों को राहत

भारत और यूके के व्यापार समझौते में अटका कार्बन टैक्स का पेच सुलझ गया है, यूके ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिससे CBAM के तहत भारतीय निर्यातकों पर टैक्स का बोझ घटेगा।

भारत और यूके के बीच व्यापार समझौता महीनों पहले हो चुका था, लेकिन एक कांटा अब तक अटका हुआ था कि ब्रिटेन में घुसते ही भारतीय सामान पर कार्बन उत्सर्जन के नाम पर कितना टैक्स लगेगा. अब यूके ने यह पेच सुलझा लिया है और तय किया है कि इसके लिए वह भारत की अपनी घरेलू कार्बन ट्रेडिंग व्यवस्था को ही आधार बनाएगा. इससे आने वाले वक्त में ब्रिटेन जाने वाले भारतीय निर्यातकों पर टैक्स का बोझ हल्का पड़ने की उम्मीद बन गई है.

लंदन ने क्यों दी भारत के फॉर्मूले को मंजूरी

यूके के अधिकारियों ने बिजली मंत्रालय के तहत आने वाले ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी को सूचना दी है कि वे भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को अपनी उस मान्यता प्राप्त सूची में जोड़ रहे हैं, जिसका इस्तेमाल कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी CBAM के तहत टैक्स तय करने के लिए किया जाता है. सीधी भाषा में कहें तो अब जब भी भारत में बना कोई सामान ब्रिटेन पहुंचेगा, वहां के सीमा शुल्क अधिकारी टैक्स का हिसाब किसी आम पैमाने से नहीं, बल्कि भारत की अपनी स्कीम के आधार पर लगाएंगे. दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत होने के बाद भी इसी मुद्दे पर बातचीत करते रहे, क्योंकि कार्बन टैक्स को लेकर आशंका थी कि यह चुपचाप निर्यातकों को मिले टैरिफ फायदे को खत्म कर सकता है. इस पूरे मामले से वाकिफ अधिकारियों का कहना है कि भारत की शर्तों का इस तरह मान लिया जाना दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार बातचीत में एक बड़ी कामयाबी है.

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आखिर है क्या यह कार्बन क्रेडिट स्कीम

भारत ने अपनी फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और कार्बन प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम शुरू की थी. इसके पीछे सोच यह है कि कंपनियां आपस में कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट का लेन-देन करें, जिससे ग्रीन हाउस गैसों की एक कीमत तय हो जाए और धीरे-धीरे इकनॉमी से ऐसा उत्सर्जन कम होता चला जाए. मकसद यही है कि रातोंरात पाबंदी लगाने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को धीरे-धीरे कार्बन पर निर्भरता से बाहर निकाला जाए. ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी इस स्कीम को चलाने के लिए जरूरी फंडिंग का इंतजाम भी कर रहा है. अब यूके भारत के साथ कारोबार करते वक्त इसी घरेलू फॉर्मूले का सहारा लेगा.

निर्यातकों को कैसे मिलेगी राहत

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार ने भारत की कार्बन क्रेडिट स्कीम को अपनी प्राइसिंग व्यवस्था से जोड़ दिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि CBAM के दायरे में आने वाला भारतीय सामान मंगाने वाले यूके के आयातक अब टैक्स में छूट की मांग कर सकते हैं, बशर्ते वे यूके के कानून के मुताबिक जरूरी सबूत और वेरिफिकेशन पेश करें. जो भारतीय कंपनियां इस छूट का फायदा लेना चाहती हैं, उन्हें अपने कागजात पूरी तरह तैयार रखने होंगे, क्योंकि बिना ठोस सबूत के ब्रिटिश सीमा शुल्क विभाग यह राहत नहीं देगा. यह नियम लागू होते ही ब्रिटेन पहुंचने वाले भारतीय माल पर टैक्स का बोझ घटेगा, और इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की जेब में जाएगा. यूके के CBAM ढांचे में पहले से यह इंतजाम है कि जिन सामानों पर उत्पादक देश में पहले ही कार्बन टैक्स चुकाया जा चुका है, उन पर ब्रिटेन में दोबारा टैक्स नहीं थोपा जाएगा, यानी डबल टैक्सेशन से बचाव होगा. इसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला है, क्योंकि देश में ज्यादातर मैन्युफैक्चरिंग अब भी कोयले से चलने वाली बिजली पर टिकी है, और कोयला ही कार्बन उत्सर्जन का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है. हालांकि भारत को असल में कितना फायदा मिलेगा, यह तभी साफ होगा जब दोनों देश आपस में कार्बन ट्रेडिंग की कीमत तय कर लेंगे.

दोनों देशों के बीच कितना बड़ा है कारोबार

भारत और यूके के बीच इस साल 15 जुलाई को व्यापार समझौते पर दस्तखत हुए थे, जिसमें मुक्त कारोबार की शर्तें तय हुई थीं और यह कार्बन डील उसी समझौते का हिस्सा मानी जा रही है. वित्तवर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच सामान का कुल कारोबार 25.1 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि साल 2024 में दोनों के बीच सेवाओं का कारोबार 25.4 अरब डॉलर के आंकड़े को छू चुका था. यूके का CBAM सिस्टम अभी लागू नहीं हुआ है, यह 2027 से शुरू होगा और उस वक्त आयरन व स्टील जैसे कार्बन उत्सर्जन वाले भारतीय उत्पादों पर वहां टैक्स लगेगा. लेकिन भारत की कार्बन ट्रेडिंग स्कीम को मान्यता मिल जाने से निर्यातकों को उम्मीद है कि यह टैक्स असर काफी हल्का रहेगा.

आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों सरकारों के बीच कार्बन क्रेडिट की असल कीमत तय होना अभी बाकी है, और यही आंकड़ा तय करेगा कि निर्यातकों को कितनी राहत मिलेगी. जब तक यह कीमत तय नहीं होती, दोनों तरफ के कारोबारी इस पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि मंजूरी मिलने से ज्यादा मायने यही कीमत रखेगी कि 2027 में CBAM लागू होने पर टैक्स का असल बोझ कितना घटता है.

सवाल-जवाब

यूके ने भारत के किस फॉर्मूले को मंजूरी दी है?
यूके ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को अपनी CBAM व्यवस्था के तहत टैक्स तय करने के लिए मान्यता दी है।
इससे भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
CBAM के दायरे में आने वाले भारतीय सामान पर यूके के आयातक अब टैक्स में छूट की मांग कर सकेंगे, जिससे भारतीय सामान पर टैक्स का बोझ घटेगा।
यूके का CBAM कब से लागू होगा?
यूके का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म साल 2027 से लागू होगा।
CBAM के तहत किन भारतीय उत्पादों पर टैक्स लगेगा?
आयरन और स्टील जैसे कार्बन उत्सर्जन से जुड़े उत्पादों पर यूके में टैक्स लगाया जाएगा।
भारत और यूके का कारोबार फिलहाल कितना बड़ा है?
वित्तवर्ष 2025-26 में सामान का कारोबार 25.1 अरब डॉलर रहा, जबकि साल 2024 में सेवाओं का कारोबार 25.4 अरब डॉलर तक पहुंचा।
टैक्स छूट पाने के लिए यूके के आयातकों को क्या करना होगा?
उन्हें यूके के कानून के मुताबिक जरूरी सबूत और वेरिफिकेशन उपलब्ध कराना होगा।
क्या यह छूट सारे भारतीय सामान पर लागू होगी?
यह छूट उन सामानों पर लागू होगी जो यूके के CBAM के दायरे में आते हैं और जिन पर भारत में पहले ही कार्बन टैक्स चुकाया जा चुका है।
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