कमजोर अमेरिकी डॉलर और बॉंड यील्ड के बीच चांदी की कीमतों में शानदार उछाल, वैश्विक बाजार में दिखा सकारात्मक रुखअल्ट्राटेक की एंट्री से हिले पॉलीकैब के शेयर, ब्रोकरेज ने गिनाई 34% कमाई की उम्मीदडॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने जताई श्रद्धाबिटकॉइन 80,000 डॉलर के नीचे टिका, इंजेक्टिव और एरोड्रम फाइनेंस में दमदार तेजीकमजोर डॉलर से सोने को मिला समर्थन, अमरीकी सीपीआई आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की निगाहेंरिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के हंटर का बयान, मौद्रिक नीति के लिए आवास बाजार सबसे अहम जरियाअनिरुद्धाचार्य की कथा में इंटरकास्ट मैरिज पर सवाल, बोले- आधार कार्ड देखकर करना चाहिए प्रेमबंधन बैंक ने उतारे चार नए क्रेडिट कार्ड, स्पार्क्स, इग्नाइट, फ्लेयर और लुमिना की खासियतें जानिएकानपुर में स्वाइन फ्लू की दस्तक से मचा हड़कंप, एक युवक की मौत के बाद अस्पताल और वेंटिलेटर रिजर्वतेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच घमासान, एमएलसी की गिरफ्तारी के बाद जन आंदोलन की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में जंग फिर भी सिलेंडर की चिंता खत्म, अमेरिका बना भारत का नया LPG भरोसाव्यापार
8 सित॰ 2026, 9:45 am (1 घंटे पहले)· 1

मिडिल ईस्ट में जंग फिर भी सिलेंडर की चिंता खत्म, अमेरिका बना भारत का नया LPG भरोसा

ईरान के कतर पर हमले के बाद भारत में सिलेंडर संकट की आशंका बनी थी, लेकिन सरकार ने सप्लाई चेन बदलकर अमेरिका से आयात बढ़ा दिया है, जो पिछले 6 महीनों में 10 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गया है।

ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ने के बाद भारत के सामने एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा खतरा खड़ा हो गया था। भारत को सबसे ज्यादा एलपीजी देने वाले देश कतर पर ईरान के हमले ने हालात बिगाड़ दिए और कुछ दिनों तक देश में सिलेंडर की किल्लत होने का डर सताने लगा। लेकिन सरकार ने तुरंत अपनी सप्लाई चेन बदल दी और अब मिडिल ईस्ट में चाहे जो हालात बनें, भारत को गैस सिलेंडर की कमी झेलनी नहीं पड़ेगी।

कतर पर हमले से कैसे बना संकट

भारत लंबे समय से अपनी ज्यादातर एलपीजी जरूरत कतर से पूरी करता आया है। ईरान के कतर पर हमले के बाद यह सप्लाई लाइन कमजोर पड़ गई, जिससे रसोई गैस की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ने की आशंका बन गई। इसी बीच मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते सिलेंडर के दाम बढ़ने की खबरें भी अलग-अलग शहरों से आती रहीं।

ये भी पढ़ें

सरकार ने कैसे संभाला मोर्चा

संकट गहराने से पहले ही सरकार ने आयात का रुख बदलना शुरू कर दिया। खबरों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से एलपीजी टैंकर जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की गई, जिससे सप्लाई पर मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता का असर कम हुआ। साथ ही ईरान से भी सीधे आयात को लेकर करीब 8 साल पुरानी अड़चन हटाई गई, ताकि सप्लाई का एक और विकल्प तैयार हो सके। बिजली से सिलेंडर की सप्लाई की भरपाई करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई, और बिहार जैसे राज्यों के कुछ गांवों में वैकल्पिक चूल्हों का इस्तेमाल भी सामने आया।

अमेरिका बना सबसे बड़ा भरोसेमंद सप्लायर

बीते 6 महीने के आयात आंकड़ों से साफ है कि भारत ने सबसे ज्यादा एलपीजी अमेरिका से मंगाया है। अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 50 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि इससे पहले यह हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम हुआ करती थी। इस बदलाव ने भारत को मिडिल ईस्ट की किसी भी अस्थिरता से लगभग बेअसर कर दिया है।

सवाल-जवाब

भारत में एलपीजी संकट की आशंका क्यों बनी थी?
ईरान और अमेरिका के बीच जंग के दौरान ईरान ने भारत के सबसे बड़े एलपीजी सप्लायर कतर पर हमला किया, जिससे सप्लाई लाइन प्रभावित हुई।
अब भारत की सबसे ज्यादा एलपीजी सप्लाई कहां से आ रही है?
पिछले 6 महीनों के आंकड़ों के मुताबिक अब भारत सबसे ज्यादा एलपीजी अमेरिका से आयात कर रहा है।
अमेरिका की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है?
अमेरिका की हिस्सेदारी पहले 10 फीसदी से भी कम थी, जो अब बढ़कर करीब 50 फीसदी हो गई है।
क्या मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर भारत में सिलेंडर की कमी हो सकती है?
सरकार ने सप्लाई के स्रोत बदल दिए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ने पर भी सिलेंडर की कमी की आशंका काफी कम हो गई है।
क्या भारत ईरान से भी एलपीजी मंगा रहा है?
खबरों के मुताबिक भारत ने ईरान से सीधे आयात को लेकर करीब 8 साल पुरानी अड़चन भी हटाई है।
संकट के दौरान सप्लाई कैसे सुनिश्चित की गई?
होर्मुज जलडमरूमध्य से एलपीजी टैंकर जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करके सप्लाई को बनाए रखा गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR