पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में बीते कुछ कारोबारी सत्रों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है, लेकिन दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज इंडिया इस गिरावट को निवेशकों के लिए सोने का मौका बता रही है। जेफरीज ने पॉलीकैब के शेयरों पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए आने वाले महीनों में तेज उछाल की उम्मीद जताई है, और इसकी वजह कंपनी के कारोबारी मॉडल की मजबूती और बाजार के आकार में छिपी है।
गिरावट के पीछे अल्ट्राटेक की नई एंट्री
पॉलीकैब के शेयरों में यह कमजोरी आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट के एक बड़े फैसले के बाद शुरू हुई। अल्ट्राटेक सीमेंट, जो अब तक सिर्फ सीमेंट कारोबार के लिए जानी जाती रही है, ने वायर और केबल सेगमेंट में उतरने का ऐलान किया और इसके लिए अल्ट्रावोल्ट नाम से एक नया ब्रांड भी लॉन्च कर दिया। देश के वायर-केबल बाजार में इतने बड़े और नकदी से मजबूत समूह की एंट्री की खबर सामने आते ही निवेशकों में यह आशंका घर कर गई कि इस सेक्टर की मौजूदा कंपनियों, खासकर मार्केट लीडर पॉलीकैब की बाजार हिस्सेदारी और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। यही डर बीते कुछ दिनों में पॉलीकैब के शेयरों में लगातार बिकवाली की सबसे बड़ी वजह बना।
1 लाख करोड़ रुपये के बाजार में सबके लिए गुंजाइश
जेफरीज इंडिया के विश्लेषकों का मानना है कि इतना घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत का वायर-केबल कारोबार वैसे भी बहुत बड़ा और तेजी से फैलता हुआ बाजार है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में इस इंडस्ट्री का कुल आकार करीब 1 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से करीब एक-चौथाई हिस्सा यानी लगभग 25 प्रतिशत अब भी असंगठित यानी छोटी और लोकल कंपनियों के पास है। इसके अलावा यह पूरी इंडस्ट्री हर साल 11 से 12 प्रतिशत की डबल-डिजिट रफ्तार से बढ़ रही है। जेफरीज का तर्क है कि जब किसी बाजार का आकार इतना बड़ा हो और उसकी ग्रोथ इतनी तेज हो, तो उसमें अल्ट्राटेक जैसी नई और बड़ी कंपनी के लिए भी पर्याप्त जगह अपने आप बन जाती है, और इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सेक्टर के पुराने और मजबूत खिलाड़ियों को इससे कोई बड़ा झटका लगेगा।
पॉलीकैब की बादशाहत बरकरार
ब्रोकरेज रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि पॉलीकैब लंबे समय से वायर-केबल मार्केट की निर्विवाद नंबर एक कंपनी बनी हुई है। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 के 18 प्रतिशत से लगातार बढ़ते हुए वित्त वर्ष 2026 में 30 से 31 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसकी सबसे बड़ी ताकत देशभर में फैला हुआ बेहद मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और 15,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स की विशाल रेंज है, जिसे किसी नई कंपनी के लिए रातोंरात खड़ा करना आसान नहीं है। पॉलीकैब के कुल कारोबार का 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ केबल सेगमेंट से आता है, जबकि अल्ट्राटेक ने फिलहाल जिस कारोबार में कदम रखा है वह मुख्य रूप से वायर और एलटी केबल्स तक ही सीमित है। इसका मतलब यह हुआ कि दोनों कंपनियों के बीच सीधे टकराव का दायरा शुरुआत में उतना बड़ा नहीं है, जितना पहली नजर में लग रहा था।
हैवेल्स और फिनोलेक्स से कम खतरा
जेफरीज का यह भी कहना है कि पावर ट्रांसमिशन और इंडस्ट्रियल केबल्स जैसे प्रीमियम सेगमेंट में किसी भी नई कंपनी को अपने प्रोडक्ट टेस्ट कराने और मंजूरी हासिल करने में करीब 2 से 4 साल का लंबा समय लगता है। यह लंबी और जटिल मंजूरी प्रक्रिया पॉलीकैब जैसी पुरानी और स्थापित कंपनियों को एक तरह की सुरक्षा-दीवार मुहैया कराती है। ब्रोकरेज के मुताबिक इसी वजह से पॉलीकैब के सामने खतरा हैवेल्स और फिनोलेक्स जैसी कंपनियों की तुलना में काफी कम आंका जा रहा है, क्योंकि इन दोनों कंपनियों के कुल कारोबार में वायर सेगमेंट की हिस्सेदारी पॉलीकैब के मुकाबले कहीं ज्यादा है, और यही वह सेगमेंट है जहां से अल्ट्राटेक ने अभी-अभी शुरुआत की है।
34 प्रतिशत तक रिटर्न का अनुमान
इन सारी वजहों के आधार पर जेफरीज इंडिया ने साफ कहा है कि पॉलीकैब के शेयरों में आई 10 प्रतिशत से ज्यादा की हालिया गिरावट असल में नई खरीदारी के लिए एक अच्छा मौका है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक पॉलीकैब का शेयर मौजूदा 8261.00 रुपये के स्तर से करीब 34 प्रतिशत उछलकर 11,100 रुपये तक जा सकता है। अगर हालात कंपनी के और ज्यादा पक्ष में रहे, तो यह तेजी 45 प्रतिशत से भी आगे निकल सकती है और शेयर 12,000 रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं सबसे कमजोर स्थिति में, यानी अगर बिकवाली और तेज हुई, तो शेयर करीब 20 प्रतिशत और टूटकर 6,600 रुपये तक फिसल सकता है। NSE पर पॉलीकैब के शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 10,126.00 रुपये रहा है, जबकि इसी अवधि का न्यूनतम स्तर 6,663.00 रुपये दर्ज किया गया है।



















