फारस की खाड़ी और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने मंगलवार को एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि तेहरान अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव का कड़ा जवाब देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रतिक्रिया के तहत फारस की खाड़ी में एक नया समुद्री निषेध क्षेत्र स्थापित किया जाएगा, जो अमेरिकी नौसेना के नाकाबंदी दायरे के मुहाने तक फैला होगा।
सैन्य रुख में बदलाव और मिसाइल परीक्षण
मोहसिन रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में जानकारी दी कि वाशिंगटन को हाल ही में ईरान की नई मिसाइलों की ताकत का स्पष्ट संदेश मिल चुका है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी सैन्या बलों के प्रति उनके देश के रक्षात्मक और आक्रामक रुख में बुनियादी फेरबदल किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका यह इशारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी युद्धपोतों की तरफ दागी गई कासिम बसीर बैलिस्टिक मिसाइल की तरफ था। हालांकि, अमेरिकी रक्षा तंत्र का दावा है कि उनके युद्धपोतों ने इन मिसाइल हमलों को पूरी तरह नाकाम कर दिया और वे सुरक्षित रहे।
कच्चे तेल बाजार और डब्ल्यूटीआई की चाल
इस क्षेत्रीय तनाव के बीच कमोडिटी बाजारों पर भी गहरी नजर बनी हुई है। मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड आयल मामूली बढ़त के साथ 0.02 प्रतिशत ऊपर 93.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में डब्ल्यूटीआई को बेंचमार्क माना जाता है, जिसका उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और इसे कुशिंग हब के जरिए वितरित किया जाता है। अपनी कम गुरुत्वाकर्षण और सल्फर मात्रा के कारण इसे हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है, जो आसानी से रिफाइन हो जाता है।
बाजार को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तय करने में मांग और आपूर्ति की बुनियादी स्थिति सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होने पर मांग बढ़ती है और मंदी या सुस्ती आने पर इसमें गिरावट दर्ज होती है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और कड़े प्रतिबंध सीधे तौर पर आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं। तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी कीमतों को नियंत्रित करने में अहम साबित होते हैं। चूंकि कच्चे तेल का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की कमजोरी या मजबूती सीधे तेल के भाव को प्रभावित करती है।
इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका
तेल कीमतों की दिशा तय करने में अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों का बड़ा योगदान होता है। एपीआई की रिपोर्ट हर मंगलवार को और ईआईए की रिपोर्ट उसके अगले दिन जारी की जाती है। सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को अधिक सटीक माना जाता है। दूसरी तरफ, ओपेक बारह प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक ऐसा समूह है जो साल में दो बार बैठक कर उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। इस समूह में रूस समेत दस अतिरिक्त देश जुड़ने के बाद इसे ओपेक प्लस के रूप में जाना जाता है, जिनके उत्पादन संबंधी निर्णय पूरी दुनिया के बाजार को हिला देते हैं।
डीजल बाजार और अन्य मुद्राओं का हाल
कच्चे तेल का बाजार भले ही कुछ शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल के मोर्चे पर रिकॉर्ड तेजी देखी जा रही है। अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई के बीच का अंतर यानी अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया और इंट्राडे कारोबार में यह 102.00 डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस बीच एशियाई सत्र में मुद्रा बाजारों में भी हलचल रही जहां आॅस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में उतार-चढ़ाव देखा गया, जबकि चीन के व्यापार संतुलन के आंकड़े भी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बने रहे।



















