रबी की नई बुवाई का मौसम दस्तक देते ही उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में आलू उत्पादक किसानों ने अपने खेतों की जुताई और तैयारी तेज कर दी है। बड़े पैमाने पर आलू उगाने वाले इस क्षेत्र के काश्तकारों की सुविधा के लिए उद्यान विभाग का आधिकारिक पोर्टल खोल दिया गया है। किसान अब घर बैठे आगामी फसल चक्र के लिए प्रमाणित आलू के बीजों का अग्रिम पंजीकरण करा सकते हैं। इस बार सरकारी स्तर पर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ ही बीजों के चयन से जुड़े नियमों में कुछ बुनियादी बदलाव भी किए गए हैं, ताकि अलग-अलग प्रजातियों का समुचित वितरण सुनिश्चित हो सके।
ऑनलाइन व्यवस्था के तहत आवेदकों को विभाग द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पूरा पालन करते हुए ही फॉर्म भरना होगा। यदि डिजिटल प्रपत्र में दर्ज ब्योरे में किसी भी प्रकार की कमी या विसंगति पाई जाती है, तो विभाग पंजीकरण को निरस्त कर देगा। इसलिए काश्तकारों को सभी विवरण अत्यंत सावधानीपूर्वक दर्ज करने की सलाह दी गई है। डिजिटल प्रक्रिया संपन्न करने के उपरांत किसानों को पंजीकरण रसीद और निर्धारित शुल्क विभाग में जमा करना होगा, जिसके बाद ही शीतगृहों से बीज की निकासी संभव हो सकेगी।
प्रमाणित बीजों की 9 किस्में उपलब्ध, न्यूनतम आधा हेक्टेयर का दायरा
जिला उद्यान अधिकारी सी.पी. अवस्थी के अनुसार रबी सत्र को देखते हुए जिले के लिए कुल 9 उन्नत प्रजातियों के आलू बीजों की खेप मंगाई गई है। इन किस्मों में कुफरी बहार, कुफरी प्राय सोना, कुफरी सूर्या, कुफरी ख्याति, कुफरी मोहन, कुफरी गौरव और कुफरी चिपसोना वन प्रमुख रूप से शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी और मौसम की अनुकूलता को ध्यान में रखकर इन बीजों का आवंटन किया जा रहा है।
इस सत्र में भूमि की जोत के आधार पर बीजों के वितरण की सीमा भी तय की गई है। काश्तकार न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 2 हेक्टेयर तक के रकबे के लिए बीज की मांग दर्ज करा सकते हैं। किस्म के आधार पर प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा 17 क्विंटल से 21 क्विंटल के बीच निर्धारित की गई है। इस पैमाने से छोटे और मध्यम जोत वाले किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त बीज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
बुकिंग के बदले नियम: एकल किस्म के बजाय अनिवार्य हुआ विविधता का फॉर्मूला
इस बार बीज आवंटन नीति में सबसे बड़ा फेरबदल प्रजाति चयन को लेकर किया गया है। पूर्व के वर्षों में काश्तकार अपनी पसंद की केवल एक ही किस्म के बीज का पूरा कोटा बुक कर लिया करते थे, परंतु अब इस परिपाटी को बदल दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत किसी एक मुख्य प्रजाति के साथ-साथ किसानों को दूसरी किस्म का कम से कम 1/5 हिस्सा भी अनिवार्य रूप से जोड़ना होगा।
यदि कोई किसान पोर्टल पर केवल एक ही किस्म का चयन कर फॉर्म सबमिट करने का प्रयास करता है, तो उसका आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। दोनों किस्मों का अनिवार्य अनुपात पूरा होने पर ही कंप्यूटर प्रणाली बुकिंग को अंतिम रूप से स्वीकार करेगी। ऑनलाइन पर्ची मिलने के तत्काल बाद किसानों को जिला उद्यान कार्यालय पहुंचकर रसीद और बीज का निर्धारित शुल्क जमा कराना होगा, ताकि समय रहते शीतगृह से बीज उठाकर बुवाई का काम शुरू किया जा सके।
पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया, अलग-अलग आकार के दाम और डीबीटी अनुदान
आलू के उन्नत बीजों की खरीद के इच्छुक किसान आधिकारिक वेबसाइट potato.uphorticuture.in पर सीधे लॉगिन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान किसानों को अपनी जमीन की खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की स्पष्ट छायाप्रति अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। इन अभिलेखों के सत्यापन के बिना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
उद्यान विभाग ने बीजों के आकार और गुणवत्ता के हिसाब से मूल्य तालिका भी जारी की है। इसमें प्रथम सीड साइज का भाव 3630 रुपये प्रति क्विंटल और दूसरे सीड साइज की दर 3480 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। वहीं आधारित प्रथम ओवरसाइज आलू बीज 3040 रुपये प्रति क्विंटल तथा दूसरा ओवरसाइज 2980 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। राहत की बात यह है कि किसानों को सीधे बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी प्रणाली के माध्यम से प्रति क्विंटल 1000 रुपये का अनुदान भेजा जाएगा, जिससे उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

















