सुबह उठते ही पेट का ठीक से साफ न होना, मल त्यागते समय परेशानी महसूस होना या अत्यधिक जोर लगाना सामान्य दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या फिर बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के लगातार तरह-तरह के चूर्ण और पेट साफ करने वाली दवाओं पर निर्भर रहने लगते हैं। इसके बावजूद कई बार समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाता और परेशानी जस की तस बनी रहती है। पाचन तंत्र की इस उलझन पर रोशनी डालते हुए डॉ अभिजीत रंजन, जो फोर्टिस अस्पताल मानेसर में वरिष्ठ सलाहकार, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (हेपेटोलॉजी) हैं, ने जरूरी बचाव और दैनिक बदलावों की जानकारी दी है।
पेट साफ न होने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित रूप से पेट साफ न होने के पीछे हमारी रोजमर्रा की कई आदतें जिम्मेदार होती हैं। जब आहार में फाइबर की मात्रा बेहद कम हो जाती है, तो पाचन तंत्र को भोजन आगे बढ़ाने में कठिनाई होती है। इसके अलावा दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, दिनचर्या का अनियमित होना और शारीरिक रूप से बिल्कुल सक्रिय न रहना आंतों की स्वाभाविक गतिशीलता को धीमा कर देता है, जिससे मल सख्त हो जाता है और कब्ज की शिकायत शुरू हो जाती है।
सुबह की दिनचर्या में शामिल करें ये जरूरी आदतें
सुबह के समय आंतों को सक्रिय करने के लिए कुछ आसान कदम काफी असरदार साबित होते हैं। सोकर उठने के तुरंत बाद पर्याप्त पानी पीने से पाचन तंत्र को गति मिलती है। इसके बाद नाश्ता करने के उपरांत शौच जाने का एक निश्चित समय तय करना चाहिए, क्योंकि भोजन करने के बाद आंतों की स्वाभाविक गतिविधि में बढ़ोतरी होती है, जिससे मल त्याग करना काफी सुगम हो जाता है। इसके साथ ही शौच के समय जरूरत से ज्यादा जोर लगाने की आदत से बचना चाहिए और शरीर जब भी शौच का प्राकृतिक संकेत दे, तो उसे कभी टालना नहीं चाहिए।
खानपान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव
आहार में सही बदलाव करके आंतों के स्वास्थ्य को तेजी से सुधारा जा सकता है। भोजन में फाइबर से भरपूर फल और अनाज शामिल करना सबसे असरदार कदम माना जाता है। अपनी रोजाना की थाली में पपीता, अमरूद, हरी सब्जियां, दालें, ओट्स और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह पोषक तत्व मल को नरम बनाए रखने और आंतों की सुचारू कार्यप्रणाली में सीधे तौर पर मदद करते हैं। खानपान के साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का नियम बनाएं और रोजाना 20 से 30 मिनट तक पैदल चलने की आदत डालें, जिससे पेट की मांसपेशियां सक्रिय बनी रहें।
कब जरूरी हो जाती है विशेषज्ञ की सलाह
यद्यपि जीवनशैली में सुधार से अधिकांश मामलों में आराम मिल जाता है, लेकिन कुछ गंभीर लक्षणों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि घरेलू उपायों और खानपान में सुधार के बाद भी कब्ज लगातार बनी रहती है, तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। इसके अलावा यदि मल के साथ खून आ रहा हो, पेट में असहनीय तेज दर्द महसूस हो, लगातार उल्टी हो रही हो या पेट फूलने के साथ गैस और मल का निकास पूरी तरह बंद हो जाए, तो इसे आपात स्थिति मानते हुए फौरन अस्पताल पहुंचना चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर और शौच की समय-सारणी में अंतर हो सकता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मल विसर्जन की प्रक्रिया सहज हो और उसमें दर्द या अनुचित दबाव न बने।



















