मानव शरीर में रक्त का थक्का जमाने और चोट लगने पर प्राकृतिक पट्टी की तरह काम करने की जिम्मेदारी प्लेटलेट्स पर होती है। चिकित्सा विज्ञान में इन्हें थ्रोम्बोसाइट्स के नाम से भी जाना जाता है। खून की एक छोटी सी बूंद में भी हजारों की तादाद में यह सूक्ष्म कोशिकाएं मौजूद रहती हैं। शरीर के स्वस्थ संचालन के लिए यह बेहद जरूरी है कि इनकी संख्या संतुलित बनी रहे, क्योंकि इनका बहुत कम होना अथवा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
प्लेटलेट्स का असंतुलन और शरीर पर इसका प्रभाव
जब शरीर में प्लेटलेट्स का स्तर सामान्य से नीचे गिर जाता है, तब किसी भी मामूली चोट की स्थिति में रक्तस्राव तेजी से होने लगता है और त्वचा पर नीले या हरे रंग के चकत्ते उभर आते हैं। इसके विपरीत, यदि रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या अत्यधिक बढ़ जाए तो नसों के भीतर अवांछित थक्के बनने की आशंका पैदा हो जाती है। यह असामान्य थक्के रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर सकते हैं। इसलिए प्लेटलेट्स का संतुलित स्तर चोट लगने पर अत्यधिक खून बहने से रोकता है और आंतरिक नसों में रुकावट बनने वाले खतरनाक थक्के भी नहीं बनने देता।
सामान्य स्तर और इनके बनने की समयसीमा
एक तंदुरुस्त वयस्क के रक्त में प्लेटलेट्स की मानक संख्या 1,50,000 से लेकर 4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर के बीच दर्ज की जाती है। इन सूक्ष्म कोशिकाओं का जीवनकाल केवल 7 से 10 दिनों का होता है, जिसके चलते मानव शरीर लगातार नई कोशिकाओं का निर्माण करता रहता है। शरीर को नई प्लेटलेट्स का उत्पादन करने में अमूमन 72 घंटे यानी लगभग तीन दिन का वक्त लगता है। जीवनशैली और सही आहार की मदद से इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में काफी सहायता मिलती है।
गिनती 50000 तक पहुंचने पर दिखने वाले लक्षण
यदि किसी व्यक्ति के रक्त में यह संख्या घटकर 50000 रह जाती है, तो चिकित्सीय दृष्टि से यह स्तर सामान्य सीमा से काफी कम माना जाता है। इस शारीरिक स्थिति को मेडिकल शब्दावली में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है। इस स्तर पर पहुंचने के बाद मामूली खरोंच या चोट लगने पर भी खून रुकने में परेशानी आती है और अधिक रक्त बह सकता है। शरीर पर नीले या हरे रंग के निशान बहुत जल्दी उभरने लगते हैं तथा व्यक्ति को निरंतर अत्यधिक थकान महसूस होती है।
आहार में किन पोषक तत्वों को शामिल करना जरूरी
प्लेटलेट्स के स्तर को प्राकृतिक रूप से दुरुस्त करने के लिए पपीते और पपीते के पत्तों का रस अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, मेथी और ब्रोकली का सेवन भी सहायक रहता है। फलों के वर्ग में अनार, संतरा, मौसंबी और कीवी खाने से शरीर को पोषण मिलता है। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कोई अकेला चमत्कारिक खाद्य पदार्थ मौजूद नहीं है, बल्कि नियमित भोजन में फोलेट, आयरन, विटामिन बी12, विटामिन सी और विटामिन के से भरपूर संतुलित आहार का नियमित सेवन सुनिश्चित करना सबसे प्रभावी उपाय है।



















