अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जहां यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापारिक विवाद गहराने के संकेत मिल रहे हैं। यूरोप में चीन से आने वाले भारी आयात को नियंत्रित करने के लिए एक अधिक लचीले व्यापार नीति तंत्र पर सहमति बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच चल रही मौजूदा वार्ताओं में कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो अतिरिक्त शुल्क और आयात की अधिकतम सीमा तय की जा सकती है। इस तरह के कदमों से चीन की ओर से भी जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जो वैश्विक व्यापार के साथ-साथ यूरो की विनिमय दर पर नकारात्मक असर डालेगी।
व्यापार संघर्ष गहराने से यूरो पर दोहरा दबाव
व्यापार तनाव का यह संभावित विस्तार यूरो के लिए एक बड़ा नकारात्मक कारक साबित हो सकता है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टैरिफ विवाद बढ़ता है, तो यूरोपीय निर्यातकों के लिए स्थितियां और कठिन हो जाएंगी। इसके साथ ही, चीन पर बढ़ते दबाव के बीच बीजिंग अपनी मुद्रा युआन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना यानी पीबीओसी द्वारा यूएसडी/सीएनवाई के लिए हाल ही में तय की गई दैनिक फिक्सिंग दरों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि व्यापक अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बावजूद चीन युआन को मजबूत बनाए रखने का इच्छुक है।
मुद्रा विनिमय दरों पर नजर डालें तो जनवरी के अपने उच्च स्तर से यूरो/युआन यानी ईयूआर/सीएनवाई विनिमय दर में लगभग 10 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। निकट भविष्य में इस विनिमय दर में और अधिक कमजोरी आने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है। यूरोपीय कंपनियों के लिए यह स्थिति चीनी बाजार में प्रतिस्पर्धा को और अधिक जटिल बना देती है, जिससे यूरो पर लगातार दबाव बना हुआ है।
युआन की मजबूती और एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन
चीनी युआन में लगातार बनी हुई यह मजबूती व्यापक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के दबदबे के असर को सीमित करने में मदद कर रही है। विशेष रूप से अन्य एशियाई मुद्राओं को इससे सुरक्षा कवच मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के निचले स्तर से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई में 3.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इसके उलट, प्रमुख एशियाई मुद्राओं की एक समग्र बास्केट के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की बढ़त केवल 0.7 प्रतिशत तक ही सीमित रही है। इससे साफ है कि युआन की मजबूती ने पूरे एशियाई क्षेत्र की मुद्राओं को डॉलर के तीव्र झटके से काफी हद तक बचाकर रखा है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख हलचलें
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले। एशियाई कारोबारी समय में एयूडी/यूएसडी ने अपनी साप्ताहिक गिरावट से उबरते हुए वापसी की और यह 0.7000 के स्तर की ओर अग्रसर हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रातों-रात आई नरमी के कारण अमेरिकी डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अच्छा सहारा मिला। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों ने भी इस मुद्रा जोड़ी को बल दिया है।
दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर के आसपास अपनी बढ़त को बनाए रखने में सफल रहा। जापान के घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर भारी दबाव डाला। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रभाव को संतुलित किया, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट सीमित रही।
कमोडिटी और श्रम बाजार के आंकड़े
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में स्थिरता देखी गई और यह दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर के स्तर को फिर से छूने में कामयाब रहा। कच्चे तेल की गिरती कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में कमी के साथ अमेरिकी डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ है, जबकि बाजार प्रतिभागी अब अमेरिकी उपभोक्ता धारणा के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो दैनिक आरएसआई अभी भी मंदी के रुख का संकेत दे रहा है।
इसके साथ ही, स्टेटिस्टिक्स कनाडा द्वारा शुक्रवार को सितंबर महीने का लेबर फोर्स सर्वे जारी किया जाना निर्धारित है। अगस्त महीने में रोजगार में आई तीव्र गिरावट के बाद बाजार एक मामूली सुधार की उम्मीद कर रहा है। यह आर्थिक रिपोर्ट इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसमें 22 अगस्त से प्रभावी हुए नए अमेरिकी शुल्कों का पूरा प्रभाव पहली बार पूरी तरह दिखाई देगा।
यूरो/यूएसडी का तकनीकी विश्लेषण और लाइव बाजार आंकड़े
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, ईयूआर/यूएसडी इस समय 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो इसके पिछले बंद भाव 1.12 से लगभग 0.15 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का ट्रेडिंग दायरा 1.12 से 1.20 के बीच रहा है, और इसका कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर बना हुआ है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 25 के स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस बात का संकेत है कि यूरो इस समय अत्यधिक बिकवाली यानी ओवरसोल्ड क्षेत्र में है। एमएसीडी -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल -0.01 है, जो मंदी का रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय ईएमए 1.14, 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर स्थित हैं। इसी तरह 50-दिवसीय एसएमए 1.15 और 200-दिवसीय एसएमए 1.16 पर हैं। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।
20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 1.11 से 1.16 के दायरे में हैं और मध्य रेखा 1.14 पर है, जबकि वर्तमान कीमत बैंड के भीतर बनी हुई है। ट्रेंड की मजबूती मापने वाला एडीएक्स 49 पर है, जो एक मजबूत ट्रेंड की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 18 और सिग्नल लाइन 19 पर है। दैनिक अस्थिरता दर्शाने वाला एटीआर 0.01 है, जिसका उपयोग स्टॉप-लॉस बफर के रूप में किया जा सकता है। 20-दिवसीय आधार पर प्रमुख समर्थन स्तर 1.12 और प्रतिरोध 1.16 पर देखा जा रहा है। निकट अवधि के लिए पिवट स्तर 1.12 पर है, जबकि ऊपरी प्रतिरोध स्तर आर1 1.12 और आर2 1.13 पर स्थित हैं। निचले स्तर पर समर्थन एस1 1.12 और एस2 1.12 के आसपास बना हुआ है।























