अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर अपनी पैठ मजबूत करते हुए भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के दरवाजे भारतीय कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है। विभिन्न रणनीतिक व्यापारिक करारों के जरिए देश के उत्पादों और सेवाओं को बहुत जल्द 85 लाख करोड़ डॉलर मूल्य के विशाल वैश्विक बाजारों में विशेष तरजीही पहुंच मिलने वाली है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घरेलू विनिर्माताओं से केवल स्थानीय बाजार की सीमाओं में सिमटे रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने का आह्वान किया है। यदि एक दशक पहले की स्थिति से तुलना की जाए, तो उस दौर में भारत के व्यापारिक समझौतों का दायरा सिर्फ 10 लाख करोड़ डॉलर की कुल अर्थव्यवस्था तक ही सीमित था।
बीते साढ़े चार वर्षों में तैयार हुआ रणनीतिक ढांचा
भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में पिछले कुछ सालों के दौरान बड़ा बुनियादी बदलाव आया है। वर्ष 2014 से पूर्व देश जिन मुक्त व्यापार समझौतों पर अमल कर रहा था, उनके दायरे में आने वाले सभी मुल्कों का सम्मिलित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर था। इसके विपरीत, हाल के साढ़े चार वर्षों के दौरान सरकार ने 9 नए व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में 38 विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनकी संयुक्त आर्थिक शक्ति 60 लाख करोड़ डॉलर के बराबर है। इसके अतिरिक्त सात से आठ अन्य करारों पर वार्ताएं सक्रिय चरण में हैं, जो प्रभावी होने के बाद भारत को 15 लाख करोड़ डॉलर की अतिरिक्त बाजार क्षमता तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराएंगे।
दुनिया की 76 फीसदी अर्थव्यवस्था तक भारतीय उत्पादों की पहुंच
जब ये सभी प्रस्तावित समझौते पूरी तरह धरातल पर उतर जाएंगे, तब भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुंच दुनिया की कुल जीडीपी के लगभग 76 प्रतिशत हिस्से तक हो जाएगी। संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था का आकार वर्तमान में 115 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जिसमें से 85 लाख करोड़ डॉलर के बाजार भारत के साथ तरजीही व्यापार व्यवस्था से सीधे जुड़ जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साधने के लिए सरकार इस समय कनाडा, इजराइल, मेक्सिको, चिली, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ विस्तृत व्यापार वार्ताओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
घरेलू दायरे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की चुनौती
व्यापार समझौतों के माध्यम से मिलने वाले इस विशाल अवसर को वास्तविक लाभ में बदलने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी। पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा,
"अब समय आ गया है कि हम ग्लोबल ब्रांड तैयार करें।"वाणिज्य मंत्री के मुताबिक देश की बड़ी आबादी और विशाल घरेलू बाजार कई बार कंपनियों को एक सुरक्षित दायरा प्रदान करते हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में उतरने की आवश्यकता है। इसके लिए उद्योगों को अपनी पैकेजिंग के स्तर को सुधारना होगा, डिजाइनिंग को अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर ढालना होगा और उत्पाद की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाना होगा, ताकि भारतीय ब्रांड वैश्विक फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ सकें।

















