सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और राजकीय संसाधनों के उपयोग को लेकर देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के सिद्धांत कितने कड़े थे, इसकी एक झलक राष्ट्रीय एकता दिवस पर सामने आई। उनके एक पारिवारिक संबंधी भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने पूर्व उप प्रधानमंत्री से जुड़ा एक यादगार वाकया साझा किया, जो बताता है कि वे सरकारी साधनों के व्यक्तिगत उपयोग से किस हद तक परहेज करते थे। उनके अनुसार, सरदार पटेल का स्पष्ट दृष्टिकोण था कि करदाताओं की गाढ़ी कमाई और शासकीय संपत्तियों पर केवल प्रशासनिक कामकाज का हक है, निजी जरूरतों का नहीं।
सड़क पर पुराने सहयोगी से सामना और दो दिन का आतिथ्य
इस घटना की पृष्ठभूमि बारडोली सत्याग्रह के दिनों से जुड़ी हुई है। ऐतिहासिक आंदोलन के समय सरदार पटेल के निकट सहयोगी रहे एक कार्यकर्ता किसी काम से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे। उसी दौरान सरदार पटेल अपने आधिकारिक वाहन में सवार होकर दिल्ली के किसी मार्ग से गुजर रहे थे। जैसे ही उनकी निगाह सड़क पर खड़े अपने उस पुराने साथी पर पड़ी, उन्होंने तत्काल चालक को गाड़ी रोकने का निर्देश दिया।
सरदार पटेल ने उस व्यक्ति को वाहन के समीप बुलवाकर दिल्ली आगमन का प्रयोजन जाना। जब साथी ने अवगत कराया कि वह केवल दिल्ली शहर देखने के उद्देश्य से आया है, तो सरदार पटेल उसे अपने साथ आवास ले आए। अगले 2 दिनों तक उन्होंने अपने निजी स्तर पर उस परिचित को शहर के विभिन्न ऐतिहासिक एवं प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया और पूरी आत्मीयता से उसकी मेजबानी की।
विदाई के समय मंगवाई किराए की टैक्सी
दो दिवसीय प्रवास पूरा होने के उपरांत जब उस कार्यकर्ता ने अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करने की इच्छा जताई, तब सरदार पटेल के आचरण ने सबको चकित कर दिया। बाहर सरकारी गाड़ी खड़ी होने के बावजूद उन्होंने अपने परिचित को स्टेशन या अड्डे तक पहुंचाने के लिए एक सामान्य निजी टैक्सी बुलाई।
यह दृश्य देखकर वह सहयोगी हैरान रह गया और उसने सीधे पूछ लिया कि जब दरवाजे पर आधिकारिक वाहन उपलब्ध है, तो फिर अलग से टैक्सी बुलाकर खर्च करने का क्या औचित्य है। इस पर सरदार पटेल ने बेहद सहजता और दृढ़ता के साथ स्पष्ट किया कि वह वाहन सरकार का है और उसका प्रत्येक फेरा केवल शासकीय दायित्वों के निर्वहन के लिए नियत है, किसी भी निजी संबंध अथवा पारिवारिक अतिथि के लिए उसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
सार्वजनिक संपत्ति के प्रति अटल निष्ठा
भूपेंद्र मनुभाई पटेल के अनुसार, सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान व्यक्तिगत कार्यों के लिए राजकोष से एक नया पैसा भी व्यय नहीं होने दिया। आम जनता द्वारा जुटाए गए राजस्व और राज्य की संपत्तियों को वे एक पवित्र धरोहर मानते थे।
इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की दीर्घकालिक दृष्टि और देश सेवा के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में गहरा आदर भाव है। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने पूर्व में उनके पूरे परिवार को बुलाकर अत्यंत आत्मीयता से मुलाकात की थी और हर छोटी व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा था।















