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सुखबीर बादल पर नंदेड़ में हमले के बाद हरसिमरत कौर ने अमित शाह को लिखा पत्र, एनआईए जांच की मांगराजनीति
16 अग॰ 2026, 5:16 pm (2 घंटे पहले)· 2

सुखबीर बादल पर नंदेड़ में हमले के बाद हरसिमरत कौर ने अमित शाह को लिखा पत्र, एनआईए जांच की मांग

महाराष्ट्र के नांदेड में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद सांसद हरसिमरत कौर ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर एनआईए जांच की मांग की है। उन्होंने इसमें अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका जताई है।

महाराष्ट्र के नांदेड में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद संसद सदस्य हरसिमरत कौर ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पत्र के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए इस घटना के पीछे किसी व्यापक अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय साजिश होने की आशंका व्यक्त की है।

दो बार हत्या की कोशिश और गहरी साजिश की आशंका

हरसिमरत कौर ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में भी सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला किया गया था। एक वरिष्ठ नेता पर लगातार दूसरी बार हत्या का प्रयास होना अत्यंत चिंताजनक विषय है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि यह हमला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार किसी बड़ी अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच किया जाना बेहद जरूरी है।

पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में उठाए गए तीन प्रमुख मुद्दे

अपने X पोस्ट के माध्यम से हरसिमरत कौर बादल ने पत्र की तीन सबसे महत्वपूर्ण बातों को रेखांकित किया है

  • गुरुघरों में हमला: दोनों ही हमले पवित्र गुरुद्वारों के परिसर में उस समय अंजाम दिए गए, जब एक समर्पित सिख धार्मिक सेवा में लीन था।
  • स्पष्ट पैटर्न और पुलिस पर सवाल: दोनों घटनाओं के बीच एक साफ पैटर्न नजर आता है, जिसके कारण पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और उन्हें कई प्रश्नों के जवाब देने होंगे।
  • समुदाय और राज्य की छवि पर चोट: इस प्रकार के बार-बार होने वाले हमलों का मुख्य मकसद पूरी दुनिया में पंजाब की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना और सिख समुदाय को बदनाम करना प्रतीत होता है।

एनआईए जांच की तत्काल आवश्यकता

सांसद हरसिमरत कौर ने जोर देकर कहा कि जिस तरह से इन हमलों की गंभीरता, तरीका और परिस्थितियां सामने आई हैं, उन्हें देखते हुए केवल स्थानीय जांच पर्याप्त नहीं होगी। पूरे मामले का सच सामने लाने और साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने के लिए एनआईए से निष्पक्ष एवं गहन जांच करवाना अति आवश्यक है।

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सवाल-जवाब

हरसिमरत कौर ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र क्यों लिखा?
उन्होंने नांदेड में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की एनआईए जांच कराने की मांग के लिए गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।
सुखबीर सिंह बादल पर इससे पहले कब हमला हुआ था?
पत्र के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल पर इससे पहले वर्ष 2024 में भी जानलेवा हमला हुआ था।
हरसिमरत कौर ने इस हमले के पीछे किस तरह की साजिश का अंदेशा जताया है?
उन्होंने अंदेशा जताया है कि यह हमला किसी गहरी अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हो सकता है।
पत्र में पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस के बारे में क्या कहा गया है?
पत्र में कहा गया है कि दोनों हमलों के बीच एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है, जिससे पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार को कई सवालों के जवाब देने होंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

एक प्रमुख राजनेता पर पवित्र स्थल के भीतर बार-बार हमले होना केवल व्यक्तिगत सुरक्षा चूक नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र की बड़ी विफलता को दर्शाता है। यदि गृह मंत्रालय इस मामले में एनआईए जांच के आदेश देता है, तो इस बात की गहरी तह तक जाने का मौका मिलेगा कि क्या इसके पीछे वास्तव में कोई अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था। आगामी दिनों में केंद्रीय एजेंसियों की यह संभावित एंट्री राज्य पुलिस के उन जवाबों को भी कठघरे में खड़ा करेगी जिन पर परिवार ने पहले ही सवाल उठाए हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·10 मिनट पहले

करन मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि ऐसे मामलों में केंद्रीय जांच की मांग से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज होना तय है। जब धार्मिक स्थलों को इस प्रकार के हमलों के लिए चुना जाता है, तो इसके सामाजिक और रणनीतिक निहितार्थ बहुत दूरगामी होते हैं। यदि केंद्र सरकार एनआईए जांच की इस मांग को स्वीकार करती है, तो यह न केवल पंजाब और महाराष्ट्र के पुलिस तंत्र के बीच समन्वय पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की जवाबदेही तय करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

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