शिलांग में मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की ओर से सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट यानी एसएसएलसी की परीक्षा दिसंबर के महीने में आयोजित करने की योजना पर काम चल रहा है। इस नए बदलाव ने राज्यभर के शिक्षकों और अभिभावकों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि उनका मानना है कि इस तरह के त्वरित परीक्षा कार्यक्रम से स्कूलों के पास पूरा पाठ्यक्रम खत्म करने और बच्चों को परीक्षा के लिए तार्किक रूप से तैयार करने का बेहद कम समय बचेगा।
बोर्ड के तर्क और फायदे
मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का यह तर्क है कि परीक्षा को आगे बढ़ाने से छात्रों को डिप्लोमा, वोकेशनल और तकनीकी कोर्स में काफी जल्दी दाखिला मिलने का मौका मिल जाएगा। इसके अलावा, जो छात्र किसी कारणवश पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, वे री-टेस्ट या सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में बहुत जल्द बैठ सकेंगे। इससे बच्चों का पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब होने से बच सकता है और वे बिना किसी अनावश्यक विलंब के अपनी आगे की शिक्षा की दिशा तय कर सकते हैं।
शिक्षकों और अभिभावकों की चिंताएं
हालांकि बोर्ड इन फायदों की दलील दे रहा है, लेकिन शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि यह सब स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता की कीमत पर होगा। यदि शैक्षणिक सत्र को जबरन तेज किया जाता है, तो कक्षाओं में गहराई से पढ़ाई का समय अपने आप घट जाएगा। शिक्षकों का अनुमान है कि दिसंबर में परीक्षा होने की स्थिति में स्कूलों को अक्टूबर तक ही पूरा सिलेबस पूरा करना होगा ताकि बच्चों को रिवीजन का पर्याप्त अवसर मिल सके।
रिवीजन और सिलेबस पूरा करने का दबाव
इस कम समय के भीतर शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं लगाने, छात्रों की व्यक्तिगत शंकाओं का समाधान करने और कठिन विषयों पर ज्यादा ध्यान देने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। एक शिक्षक ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के संकुचित शेड्यूल से शिक्षण संस्थानों का पूरा ध्यान सिर्फ पाठ्यक्रम के पन्ने पलटने पर रह जाएगा, न कि इस बात पर कि छात्र विषयों को कितनी गहराई से समझ पा रहे हैं।
बोर्ड की स्पष्टता का अभाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बोर्ड की ओर से विस्तृत जानकारी न मिलने से असमंजस की स्थिति और अधिक गहरी हो गई है। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन इस बड़े बदलाव के पीछे के ठोस कारणों को सबके सामने रखे और परीक्षा, परिणाम घोषणा, री-इवैल्यूएशन और सप्लीमेंट्री परीक्षाओं से जुड़ा एक स्पष्ट एवं विस्तृत शेड्यूल तुरंत जारी करे।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया और आगे की चुनौतियां
दूसरी ओर, अभिभावक उन बच्चों को लेकर विशेष रूप से आशंकित हैं जिन्हें पढ़ाई में थोड़ी अधिक मदद की आवश्यकता होती है या जो किसी खास विषय में कमजोर हैं। उन्हें डर है कि जल्दबाजी में निकाला गया यह नया एकेडमिक कैलेंडर उन बच्चों की नैया डुबो सकता है जो पहले से ही तनाव में हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि बोर्ड इस बात की पुख्ता गारंटी दे कि घटी हुई समय-सीमा के बावजूद पूरा सिलेबस कवर होगा और बच्चों के परीक्षा परिणामों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिलहाल स्कूलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोर्ड के इस नए टाइमलाइन और बच्चों को पढ़ाने-समझाने की वास्तविक जरूरत के बीच संतुलन बिठाने की है।



















