झारखंड के कोडरमा जिले में मानसून और बरसात के दिनों में पेड़-पौधों तथा हरियाली के बीच से सांपों का निकलना एक आम बात है। विशेष तौर पर शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी इलाकों के आसपास जहरीले जीवों के दिखने से विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों और आम नागरिकों के मन में भी भय का माहौल पैदा हो जाता है। शहर के महाराणा प्रताप चौक के पास संचालित क्लोरोफिल प्ले स्कूल के प्रमुख अजय अग्रवाल भी लगभग 15 साल पहले इसी गंभीर समस्या से काफी परेशान थे। आज वह अपनी इस चुनौती से निपटने के लिए सर्पगंधा के पौधों की मदद ले रहे हैं और इसके जरिए उन्होंने परिसर को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।
पहले करना पड़ता था रसायनों का इस्तेमाल
करीब डेढ़ दशक पहले स्थिति यह थी कि वर्षा ऋतु शुरू होते ही विद्यालय परिसर के भीतर अक्सर सांपों की आवाजाही बनी रहती थी। स्कूल के चारों तरफ पर्याप्त हरियाली और तमाम पेड़-पौधे होने के कारण वहां आने वाले छोटे बच्चों, शिक्षकों और उनके बच्चों को छोड़ने आने वाले परिजनों की चिंता लगातार बनी रहती थी। इस विकट परिस्थिति से निजात पाने के लिए अजय अग्रवाल ने शुरुआती दौर में परिसर के विभिन्न हिस्सों में कार्बोलिक एसिड जैसे खतरनाक और तेज रसायनों का छिड़काव करवाना शुरू किया था। उस रासायनिक उपचार से कुछ समय के लिए तो सांप नजर आना बंद हो जाते थे, लेकिन उस उपाय का असर थोड़े ही दिनों में खत्म हो जाता था और समस्या फिर से जस की तस बनी रहती थी।
विद्यालय परिसर में तैयार की गई सर्पगंधा की सुरक्षा दीवार
रासायनिक छिड़काव के असफल होने के बाद उन्हें किसी माध्यम से सर्पगंधा के पौधे के चमत्कारी गुणों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। इस बहुमूल्य जानकारी के मिलने के लगभग 15 साल पहले उन्होंने अपने विद्यालय के मुख्य बगीचे में लगभग 18 सर्पगंधा के पौधे लाकर रोपे। वक्त बीतने के साथ-साथ उन पौधों से प्राकृतिक रूप से बीज गिरे और नए पौधे स्वतः उगते चले गए, जिसके परिणामस्वरूप आज पूरे कैंपस में सर्पगंधा के दर्जनों पौधे फैल चुके हैं। विद्यालय की चारदीवारी और बाउंड्री के ठीक किनारे इन पौधों का एक मजबूत घेरा बना दिया गया है जिसे वह अपने संस्थान की सर्पगंधा की लक्ष्मण रेखा बताते हैं। उनका ऐसा मानना है कि स्कूल की सीमा के चारों तरफ इन खास पौधों को लगाने के बाद से परिसर के भीतर सांपों के दिखने की घटनाएं लगभग शून्य हो चुकी हैं।
नारियल के बेकार खोल में पौधे उगाकर बांटने की मुहिम
अजय अग्रवाल का कहना है कि सर्पगंधा के पौधों से एक विशेष प्रकार की गंध निकलती है जो सांपों को उस क्षेत्र से कोसों दूर रखने में बेहद मददगार साबित होती है। अपने इसी निजी और सफल अनुभव के आधार पर वह अब आसपास के आम नागरिकों को भी अपने घरों के आसपास सर्पगंधा उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस नेक काम के लिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा की एक अनूठी छोटी सी मुहिम भी शुरू की है। इसके तहत वह नारियल के बेकार और फेंके गए छिलकों या खोल में सर्पगंधा के नए पौधे तैयार कर रहे हैं और समय-समय पर जरूरतमंद लोगों को बिल्कुल मुफ्त में वितरित करते हैं।
उनका मानना है कि जिन बस्तियों या आवासों के आसपास अधिक हरियाली, झाड़ियां या बड़े बगीचे मौजूद हैं और जहां बरसात के मौसम में अक्सर सांपों का खतरा मंडराता रहता है, वहां के लोग सर्पगंधा के पौधे लगाकर सुरक्षित रह सकते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपने व्यक्तिगत स्कूल परिसर को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि समाज के आम लोगों को भी सांपों के आतंक से बचाने के लिए पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों के प्रति जागरूक करना है।




















