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उम्र बढ़ने के साथ आंखों को रखना है सुरक्षित, तो आज ही अपनाएं ये पांच आसान आदतेंउत्तराखंड
17 सित॰ 2026, 6:05 pm (1 दिन पहले)· 3

उम्र बढ़ने के साथ आंखों को रखना है सुरक्षित, तो आज ही अपनाएं ये पांच आसान आदतें

बढ़ती उम्र में आंखों की रोशनी बनाए रखने और चश्मे से दूरी बनाए रखने के लिए जीवनशैली में कुछ बुनियादी बदलाव करना बेहद जरूरी है।

बागेश्वर: मौजूदा दौर में लैपटॉप, स्मार्टफोन और कंप्यूटर का अत्यधिक इस्तेमाल हमारी आंखों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने से लोगों में आंखों का सूखना, खुजली होना, जलन पैदा होना और थकान जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, जो लोग मैदानी या फील्ड का काम करते हैं, उन्हें धूप, मिट्टी और बाहरी प्रदूषण की वजह से आंखों से जुड़ी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आंखों की सही और नियमित देखभाल करना बेहद अनिवार्य हो गया है। जानकारों का मानना है कि रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ सामान्य एहतियात बरतकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है। हालांकि किसी भी तरह की गंभीर या पुरानी समस्या होने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

धूप में निकलते समय सनग्लासेस का करें इस्तेमाल

तेज धूप के बीच घर से बाहर कदम रखते समय अपनी आंखों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से महफूज रखना आवश्यक है। इसके लिए बढ़िया क्वालिटी के यूवी प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे आंखों को तेज रोशनी, धूल के कणों और हवा के झोंकों से होने वाली तकलीफ से बचाने में काफी मदद मिलती है। खासकर उन लोगों के लिए यह एहतियात बहुत उपयोगी साबित हो सकता है जो अपना ज्यादातर काम खुले आसमान के नीचे फील्ड में करते हैं।

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बार-बार ठंडे पानी से आंखें धोने से बचें

आंखों में थकान या किसी तरह की चुभन महसूस होने पर तमाम लोग बार-बार उन्हें ठंडे पानी से धोने लगते हैं। डॉक्टर बताती हैं कि हर छोटी-मोटी दिक्कत का हल बार-बार पानी डालना नहीं होता है। आंखों की साफ-सफाई का ख्याल रखना तो अपनी जगह अहम है, लेकिन पानी के छींटे मारने के बजाय समस्या की असली जड़ को समझना ज्यादा जरूरी है। अगर आंखों में लगातार खुजली या जलन बनी रहती है, तो खुद से उपाय करने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से पूरी जांच करवानी चाहिए।

बिना चिकित्सकीय सलाह के आई ड्रॉप न डालें

आंखों में लाली छा जाने, खुजली होने या पानी टपकने की स्थिति में अपनी मनमर्जी से किसी भी मेडिकल स्टोर से लाकर आई ड्रॉप या दवा का इस्तेमाल करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। हर इंसान की आंखों की शारीरिक बनावट और दिक्कत की वजह अलग हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की पर्ची के बिना किसी भी तरह की दवा आंख में डालने से सख्ती से बचना चाहिए।

खानपान में अलसी के बीजों को दें जगह

अलसी के बीजों के अंदर ओमेगा-3 फैटी एसिड समेत कई तरह के जरूरी पोषक तत्वचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें सही मात्रा में अपने भोजन का हिस्सा बनाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। आंखों की बेहतरीन सेहत के लिए हमेशा विटामिन और मिनरल्स से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा अखरोट में भी ओमेगा-3 फैटी एसिड, जरूरी विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे मौसमी फल और भरपूर मात्रा में पानी पीना पूरे शरीर के साथ-साथ आंखों के लिए भी काफी लाभकारी होता है।

नियमित जांच और पर्याप्त नींद है जरूरी

अपनी बहुमूल्य आंखों को सुरक्षित रखने के वास्ते पूरी नींद लेना, डिजिटल स्क्रीन से तय समय पर छोटे-छोटे ब्रेक लेना और आंखों को बार-बार रगड़ने से परहेज करना भी बेहद आवश्यक है। इसके अलावा समय-समय पर अपनी आंखों की नियमित जांच करवाना उनकी सुरक्षा के लिए एक अहम कदम है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आंख पर चश्मा चढ़ जाना हमेशा किसी गलती की वजह से नहीं होता, बल्कि कई बार यह केवल हमारी नजर की एक स्वाभाविक जरूरत हो सकती है। इसलिए किसी भी दिक्कत को नजरअंदाज करने के बजाय वक्त रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।

सवाल-जवाब

तेज धूप में निकलते समय आंखों के बचाव के लिए क्या पहनना चाहिए?
तेज धूप और यूवी किरणों से बचाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस का इस्तेमाल करना चाहिए।
क्या बार-बार ठंडे पानी से आंखें धोना सही है?
बार-बार ठंडे पानी से आंखें धोना हर समस्या का समाधान नहीं है और इसके बजाय समस्या के मूल कारण को समझना चाहिए।
आंखों में लालिमा या खुजली होने पर क्या करना चाहिए?
बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के अपनी मर्जी से कोई भी आई ड्रॉप या दवा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए किन चीजों का सेवन करना चाहिए?
आंखों की अच्छी सेहत के लिए अलसी के बीज और अखरोट का संतुलित मात्रा में सेवन फायदेमंद होता है।
चश्मा लगना किस बात का संकेत हो सकता है?
चश्मा लगना हमेशा किसी गलती का परिणाम नहीं होता, बल्कि यह दृष्टि संबंधी एक स्वाभाविक जरूरत हो सकती है।
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टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·17 घंटे पहले

मैदानी और इंडोर दोनों तरह के एथलीटों के लिए पैनी नजर और रिफ्लेक्स एक्शन खेल में जीत और हार का अंतर तय करते हैं। स्क्रीन टाइम और बाहरी प्रदूषण से आंखों की कार्यक्षमता पर पड़ने वाला असर सीधे तौर पर खिलाड़ी के हैंड-आई कोऑर्डिनेशन और फील्ड विजन को कमजोर कर सकता है, जिससे मैदान पर प्रदर्शन प्रभावित होता है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 घंटे पहले

यह रिपोर्ट डिजिटल जीवनशैली और आउटडोर प्रदूषण के दोहरे संकट में आंखों की सेहत को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय प्रस्तुत करती है। स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल और फील्ड वर्क से वर्कफोर्स की उत्पादकता और हेल्थकेयर खर्च पर गहरा असर पड़ रहा है। भविष्य में डिजिटल आई स्ट्रेन से निपटने के लिए कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम्स और ओमेगा-3 युक्त न्यूट्रास्युटिकल मार्केट में तेजी आने की पूरी संभावना है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 घंटे पहले

यह रिपोर्ट डिजिटल जीवनशैली और आउटडोर प्रदूषण के दोहरे संकट में आंखों की सेहत को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय प्रस्तुत करती है। स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल और फील्ड वर्क से वर्कफोर्स की उत्पादकता और हेल्थकेयर खर्च पर गहरा असर पड़ रहा है। भविष्य में डिजिटल आई स्ट्रेन से निपटने के लिए कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम्स और ओमेगा-3 युक्त न्यूट्रास्युटिकल मार्केट में तेजी आने की पूरी संभावना है। इस नीतिगत बदलाव के तहत कार्यस्थलों पर स्क्रीन टाइम के नियमन और स्वास्थ्य बीमा में निवारक नेत्र देखभाल को शामिल करने पर बल दिया जाना चाहिए, जिससे श्रम बाजार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह खबर स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी है, लेकिन अपराध और न्याय व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए मैं यह देखता हूँ कि मिलावट और नकली दवाओं का काला कारोबार किस तरह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदने की प्रवृत्ति न केवल आंखों के लिए नुकसानदेह है, बल्कि यह अनधिकृत और फर्जी दवाओं की अवैध बिक्री को भी बढ़ावा देती है, जिस पर प्रशासनिक शिकंजा कसना बेहद जरूरी है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह स्वास्थ्य रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे डिजिटल जीवनशैली और बाहरी प्रदूषण आंखों को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, अपराध और प्रशासनिक शासन की दृष्टि से यह एक बड़ा पहलू है कि बाज़ार में बिना डॉक्टर की पर्ची के धड़ल्ले से बिकने वाली दवाएं और आई ड्रॉप्स लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हैं। ऐसी फर्जी और अनियंत्रित बिक्री पर जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को मिलकर सख्त छापेमारी करनी चाहिए ताकि आम जनता के जीवन सेफ रह सके।

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