हर साल देश भर से लाखों युवा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के तुरंत बाद भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं। सीने पर वर्दी और देश रक्षा का जज्बा युवाओं को सैन्य सेवाओं की ओर आकर्षित करता है, लेकिन इस राह में कई भ्रांतियां भी सामने आती हैं। अक्सर 12वीं कक्षा के बाद छात्रों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या नेशनल डिफेंस एकेडमी एक सीधी सरकारी नौकरी है या केवल एक प्रशिक्षण केंद्र है। इसके साथ ही, हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के मन में यह डर भी बना रहता है कि क्या अंग्रेजी भाषा में महारत न होने के कारण उनका चयन रुक सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझकर छात्र बिना किसी संशय के अपनी तैयारी को सही दिशा दे सकते हैं।
नेशनल डिफेंस एकेडमी का स्वरूप और इसका वास्तविक अर्थ
नेशनल डिफेंस एकेडमी, जिसे संक्षेप में एनडीए कहा जाता है, भारत का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और विशिष्ट सैन्य संस्थान है। यह अकादमी महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर के निकट खड़कवासला में स्थित है। कई लोग इसे महज एक नौकरी या साधारण ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट मान लेते हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। यह एक ऐसी सांझा संस्था है जहां भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों अंगों के कैडेट्स को एक साथ प्रशिक्षित किया जाता है। एनडीए में दाखिला मिलना इस बात का प्रमाण है कि अभ्यर्थी का सेना में राजपत्रित अधिकारी बनने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है, लेकिन वास्तविक नौकरी और दायित्वों की शुरुआत यहां का संपूर्ण प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही होती है।
तीन साल की अकादमिक पढ़ाई और कड़ा शारीरिक प्रशिक्षण
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित एनडीए की लिखित परीक्षा और उसके बाद होने वाले एसएसबी इंटरव्यू में सफलता प्राप्त करने के बाद चयनित कैडेट्स खड़कवासला स्थित अकादमी में प्रवेश करते हैं। यहां कैडेट्स को कुल तीन वर्षों का समय बिताना होता है। इन तीन सालों के दौरान कैडेट्स को केवल शारीरिक अभ्यास ही नहीं कराया जाता, बल्कि उन्हें उच्च स्तर की अकादमिक शिक्षा भी प्रदान की जाती है। एनडीए में पढ़ाई के दौरान कैडेट्स अपनी शाखा के अनुसार कला, विज्ञान या प्रौद्योगिकी (बीए, बीएससी अथवा बीटेक) में स्नातक की पढ़ाई पूरी करते हैं। इस स्नातक डिग्री की मान्यता जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) द्वारा दी जाती है। पढ़ाई के साथ-साथ कैडेट्स को कठोर शारीरिक अभ्यास, सख्त अनुशासन, सामरिक रणनीति और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाले विभिन्न अभ्यासों से गुजरना पड़ता है।
अंतिम वर्ष की सैन्य अकादमी ट्रेनिंग और लेफ्टिनेंट पद की पोस्टिंग
खड़कवासला में तीन वर्ष का कठिन और अनुशासित कार्यकाल पूरा करने के बाद कैडेट्स को उनकी चुनी हुई सैन्य शाखा के अनुसार अग्रिम प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। थल सेना के कैडेट्स को इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) देहरादून भेजा जाता है, नौसेना के कैडेट्स को इंडियन नेवल एकेडमी (आईएनए) एझिमाला भेजा जाता है, और वायु सेना के कैडेट्स को एयर फोर्स एकेडमी (एएफए) डुंडीगल भेजा जाता है। इन संबंधित अकादमियों में कैडेट्स को एक वर्ष का विशेष एवं एडवांस्ड सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रकार कुल चार वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद कैडेट्स को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट या अन्य शाखाओं के समकक्ष अधिकारी पद पर पहली पोस्टिंग दी जाती है। इस प्रकार एनडीए एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो 12वीं के बाद सीधे अधिकारी स्तर की प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी तक पहुंचाता है।
हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए लिखित परीक्षा और भाषा का विकल्प
एनडीए को लेकर छात्रों के बीच सबसे बड़ा भ्रम भाषा को लेकर रहता है। बहुत से उम्मीदवारों को लगता है कि यदि वे अंग्रेजी माध्यम से नहीं पढ़े हैं तो वे इस परीक्षा में सफल नहीं हो सकते। हालांकि, सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। एनडीए का आवेदन पत्र भरने या इसकी लिखित परीक्षा में बैठने के लिए अंग्रेजी माध्यम से 12वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य नहीं है। जिन अभ्यर्थियों ने अपनी 12वीं की पढ़ाई हिंदी माध्यम या किसी भी क्षेत्रीय भाषा से पूरी की है, वे भी इस परीक्षा के लिए पूरी तरह योग्य हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाने वाली लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किया जाता है, जिससे क्षेत्रीय व हिंदी भाषी छात्रों को समान अवसर प्राप्त होता है।
एसएसबी इंटरव्यू में भाषा का प्रभाव और चयन के मुख्य मापदंड
लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात अभ्यर्थियों को सेवा चयन बोर्ड यानी एसएसबी इंटरव्यू के चरण से गुजरना पड़ता है। इंटरव्यू के दौरान अधिकारियों का मुख्य ध्यान अभ्यर्थी के आत्मविश्वास, उसकी सोचने की प्रक्रिया और दबाव की स्थिति में निर्णय लेने की क्षमता पर होता है। यद्यपि इंटरव्यू में अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए अंग्रेजी का बुनियादी ज्ञान होना सहायक माना जाता है, लेकिन वहां फर्राटेदार अंग्रेजी या बिल्कुल सटीक व्याकरण बोलना अनिवार्य नहीं है। यदि ग्रुप डिस्कशन या साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थी अंग्रेजी बोलते समय अटकता है, तो उसे हिंदी में अपनी बात पूरी करने की छूट दी जाती है। बात स्पष्ट करने के बाद अभ्यर्थी पुनः अंग्रेजी में संवाद स्थापित करने का प्रयास कर सकता है। एनडीए में चयन का मुख्य आधार केवल देशप्रेम, नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता और अधिकारी बनने योग्य सोच होती है।



















