दिल्ली विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध तमाम कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के पेशेवर आचरण तथा सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर नई सख्ती शुरू हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी विभागों और कॉलेजों को पत्र भेजकर तय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
शिक्षा मंत्रालय का सर्कुलर और सतर्कता आयोग की सिफारिशें
कर्मचारियों के ऑनलाइन व्यवहार और पेशेवर अनुशासन को लेकर जारी यह निर्देश केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के एक महत्वपूर्ण सर्कुलर पर आधारित है। मंत्रालय ने यह सर्कुलर 29 जून को जारी किया था, जिसे दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 5 अगस्त को अपने सभी कॉलेजों और स्नातकोत्तर विभागों को प्रेषित किया। इस सर्कुलर में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सलाह का हवाला दिया गया है। आयोग ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया उपयोग, दफ्तरी गोपनीयता, संस्थान की प्रतिष्ठा और हितों के टकराव से बचने के लिए पारदर्शी नियम लागू करें।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच
केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए इस पत्र में केवल डिजिटल गतिविधियों पर नियंत्रण ही शामिल नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और नियुक्तियों में होने वाली धांधलियों को रोकने पर भी विशेष बल दिया गया है। यूनिवर्सिटीज और उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा गया है कि किसी भी स्थायी या अस्थायी नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों के शैक्षणिक योग्यताओं, डिग्रियों और कार्य अनुभव प्रमाण पत्रों का गहराई से सत्यापन किया जाए। इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और अभ्यर्थियों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए एक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने का आदेश दिया गया है।
विरोध के बाद ठंडे बस्ते में गई नीति अब आचरण नियमों से जुड़ी
यूनिवर्सिटी में सोशल मीडिया नियमों को लेकर पहले भी बड़ा विवाद हो चुका है। दिसंबर 2023 में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कर्मचारियों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। हालांकि, दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन और कर्मचारी यूनियनों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। उनका कहना था कि कर्मचारियों के निजी सोशल मीडिया खातों की निगरानी करना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अकादमिक आजादी पर सीधा प्रहार है। बढ़ते विरोध को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसी साल मई में इस योजना को यह कहते हुए रोक दिया था कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट्स की मॉनिटरिंग करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। लेकिन अब शिक्षा मंत्रालय के निर्देश के बाद इसे अलग नीति बनाने के बजाय आचार नियमों के दायरे में रखकर लागू किया जा रहा है।
दिल्ली की अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज का क्या है रुख?
ऑनलाइन आचरण और प्रशासनिक नियमों के कार्यान्वयन को लेकर दिल्ली के अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग देखने को मिली हैं
- जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU): जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने स्पष्ट किया कि उनकी यूनिवर्सिटी ने कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर हाल में ऐसा कोई नया सर्कुलर या नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है।
- गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (IP University): आईपी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बताया कि वे कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग के लिए जल्द ही एक नई नीति तैयार करने की योजना बना रहे हैं, जबकि भर्ती के दौरान प्रमाणपत्रों के सत्यापन की व्यवस्था का पहले से पालन किया जा रहा है।
- डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी: आंबेडकर यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वे दिल्ली सरकार के कंडक्ट रूल्स और समय-समय पर जारी होने वाले सरकारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करते हैं।



















