भारत में जब भी किसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन होता है, तो पूरा देश एक अलग ही हलचल से भर जाता है। रेलवे स्टेशनों पर छात्रों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, लंबी दूरी की ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं बचती और परीक्षा केंद्रों के आस-पास होटलों के कमरे मिलना मुश्किल हो जाता है। उम्मीदवारों के साथ ही उनके अभिभावक भी कई दिनों तक भारी मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजरते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च के एक नए अध्ययन ने भारतीय परीक्षाओं के इस विशाल दायरे पर वैश्विक मुहर लगाई है। इस विश्लेषण के अनुसार, देश के चार प्रमुख इम्तिहान दुनिया की सबसे विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की सूची में अपनी मजबूत जगह बना चुके हैं।
ग्लोबल पैमाने पर भारतीय इम्तिहानों का दबदबा
दुनिया भर की चौदह सबसे विशाल परीक्षाओं का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि भारत की चार प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाएं वैश्विक स्तर पर शीर्ष क्रम में खड़ी हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी लगभग 25 लाख उम्मीदवारों के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी परीक्षा बनकर उभरी है। वहीं प्रशासनिक सेवाओं के लिए आयोजित होने वाली यूपीएससी सीएसई में करीब 12 लाख अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाते हैं। देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले की प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में लगभग 10 लाख प्रतिभागी शामिल होते हैं, जबकि उच्च शिक्षा और शोध पात्रता से जुड़ी यूजीसी नेट परीक्षा में 8 लाख से अधिक परीक्षार्थी हिस्सा लेते हैं।
चीन के गाओकाओ से भारतीय व्यवस्था का मुकाबला
वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े इम्तिहान का खिताब चीन की कॉलेज प्रवेश परीक्षा 'गाओकाओ' के नाम है, जिसमें लगभग 1.29 करोड़ छात्र भाग लेते हैं। चीन में इस परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था किसी सैन्य अभियान की तरह संचालित की जाती है। वहां परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों को स्टील के मजबूत कमरों में रखा जाता है, जिनकी निगरानी अत्याधुनिक मोशन सेंसर्स और हथियाबंद पुलिस बलों के कड़े पहरे में होती है। चीन को यदि अलग रख दिया जाए, तो भारत के अलावा दुनिया का कोई भी ऐसा देश नहीं है जो इतने विशाल पैमाने पर प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करने का जिम्मा उठाता हो। भारत में इन परीक्षाओं का संचालन किसी बड़े राष्ट्रीय पर्व जैसा होता है, जहां पूरी प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी जाती है।
प्रशासनिक खामियां और व्यवस्थागत चुनौतियां
करोड़ों युवाओं की भागीदारी जहां एक ओर उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के प्रति देश के समर्पण को दिखाती है, वहीं दूसरी ओर यह हमारी व्यवस्था की कमजोरियों को भी सामने लाती है। हर एक सीट के लिए ऐसी जबरदस्त गलाकाट प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, जिसकी मिसाल दुनिया में दुर्लभ है। इसके बावजूद, देश में जब भी नीट या अन्य बड़ी परीक्षाएं आयोजित होती हैं, तो पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था और प्रबंधन की घोर लापरवाही जैसी गंभीर दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं। हाल के वर्षों में इन अनियमिताओं के चलते देश का शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है।
नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क और सुधारों की जरूरत
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे आयोजनों के बीच अब सिर्फ कमियां गिनाने के बजाय एक फुल-प्रूफ सिस्टम तैयार करने की सख्त दरकार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों से सीख लेते हुए भारत में एक सुदृढ़ 'नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क' स्थापित करने की आवश्यकता जताई गई है। इसके तहत डिजिटल मार्किंग, किसी भी आपात स्थिति के लिए रिजर्व परीक्षा केंद्रों की तैयारी और परीक्षार्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक पारदर्शी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। जब देश के करोड़ों युवा अपनी मेहनत के बल पर अपने सुनहरे कल की नींव रखने निकलते हैं, तो परीक्षा प्रणाली की शुचिता और विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासनिक तंत्र की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।



















