नौकरी की तलाश में रहने वाले हर व्यक्ति की यही इच्छा होती है कि उसे एक बेहतरीन पद मिले और वह रिक्रूटर के सामने खुद को सबसे योग्य उम्मीदवार के रूप में पेश कर सके। इस चाहत में अक्सर कई उम्मीदवार अनजाने में या जानबूझकर इंटरव्यू के दौरान कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं जो पूरी तरह सच नहीं होतीं। किसी को लगता है कि उसकी पिछली सैलरी का बढ़ा हुआ आंकड़ा पकड़ा नहीं जाएगा, तो कोई अपनी किसी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बताकर पेश कर देता है। हमें अक्सर ऐसा भ्रम रहता है कि हमारा यह छोटा सा झूठ किसी को कभी पता नहीं चलेगा, लेकिन पेशेवर माहौल में बैठे अनुभवी मानव संसाधन प्रबंधकों के पास इन दावों को परखने का एक अलग ही हुनर होता है।
कैंडिडेट्स के हाव-भाव और बातचीत की गहराई को परखते हैं रिक्रूटर्स
इंटरव्यू रूम की मेज के पार बैठने वाला एचआर केवल आपकी शैक्षणिक डिग्री या तकनीकी कौशल की जांच नहीं करता है। वह आपके शारीरिक हाव-भाव, आपके आत्मविश्वास के स्तर और आपके बहम में छिपी हुई सच्चाई को भी बहुत आसानी से भांप लेता है। अगर आपको यह लगता है कि आप कोई भी मनगढ़ंत कहानी सुनाकर आसानी से इस प्रक्रिया से बाहर निकल जाएंगे, तो आप एक बड़ी गलतफहमी का शिकार हैं। पृष्ठभूमि की जांच और बेहद स्मार्ट तरीके से पूछे गए क्रॉस-प्रश्नों के माध्यम से झूठ की परतें बहुत जल्दी उधड़कर सामने आ जाती हैं। आइए उन दस सबसे आम झूठों के बारे में विस्तार से जानते हैं जो अक्सर साक्षात्कारों में धड़ल्ले से बोले जाते हैं और एचआर उन्हें तुरंत बेनकाब कर देते हैं।
पिछली सैलरी को बढ़ा-चढ़ाकर बताना
बाजार में अपनी कीमत या वैल्यू को ज्यादा दिखाने के चक्कर में कई लोग अपनी पिछली कमाई की रकम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। उनका ऐसा मानना होता है कि इससे उन्हें किसी नई जगह पर कहीं बेहतर वित्तीय पैकेज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
लेकिन एचआर इस बात को बहुत आसानी से पकड़ लेते हैं क्योंकि वे बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16 या फिर पिछली संस्था की पे-स्लिप की मांग करते हैं। इसके अलावा उद्योग जगत के तय मानकों और पीएफ ट्रांसफर के रिकॉर्ड से सच तुरंत सबके सामने आ जाता है और उम्मीदवार असहज स्थिति में फंस जाते हैं.
कंपनी के प्रति अचानक उमड़ा हुआ बेहिसाब प्यार
नौकरी की अत्यधिक आवश्यकता होने के बावजूद कई लोग ऐसा जताने की कोशिश करते हैं कि वे जीवनभर सिर्फ इसी खास संगठन के लिए बने थे। उनका दावा होता है कि उनके चुनते ही कंपनी का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगेगा।
इस प्रकार की मक्खनबाजी को पकड़ने के लिए रिक्रूटर तुरंत संगठन से जुड़े कुछ बुनियादी सवाल पूछ लेते हैं, जैसे कि हाल ही में लॉन्च हुई कोई सेवा या आगामी प्रोजेक्ट के बारे में आप क्या जानते हैं। जब जवाब गोलमोल और अस्पष्ट होते हैं, तो यह झूठा प्रेम पूरी तरह बेनकाब हो जाता है.
अत्यधिक दबाव में भी शानदार प्रदर्शन करने का दावा
यह दिखाने के लिए कि आप बेहद मेहनती स्वभाव के हैं, आप अक्सर यह कह देते हैं कि कार्यस्थल का दबाव या स्ट्रेस आपको और अधिक बेहतर और ऊर्जावान बनाता है।
इस दावे की सच्चाई परखने के लिए एचआर आपके अतीत का कोई ऐसा वाकया पूछ लेते हैं जब वाकई आपके सामने समय सीमा का भारी संकट था। यदि आप उस पल हड़बड़ा जाते हैं या कोई ठोस उदाहरण पेश नहीं कर पाते हैं, तो आपका यह झूठ पूरी तरह सबके सामने आ जाता है.
खुद को बेहतरीन टीम प्लेयर बताना
दूसरों की नजरों में खुद को बहुत मिलनसार और सामाजिक साबित करने के लिए कई लोग यह बात बड़ी आसानी से बोल देते हैं, जबकि असल जिंदगी में वे अकेले रहकर काम करना ज्यादा पसंद करते हैं।
इसे परखने के लिए इंटरव्यू में पूरी तरह से परिस्थिति पर आधारित सवाल पूछे जाते हैं, जैसे कि यदि आपके किसी सहकर्मी के साथ गंभीर मतभेद हो जाए तो आप क्या कदम उठाएंगे। आपके द्वारा दिए गए उत्तर से आपके टीम में काम करने की वास्तविक क्षमता का पूरा कच्चा-चिट्ठा बाहर आ जाता है.
कमजोरी के नाम पर केवल परफेक्शन की बात करना
यह साक्षात्कारों में सबसे पुराना और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बहाना है जिसके पीछे लोग अपनी वास्तविक कमियों को छिपाने का प्रयास करते हैं।
अनुभवी रिक्रूटर्स तुरंत इस बात को समझ जाते हैं कि यह एक पूरी तरह से रटा-रटाया जवाब है। वे तुरंत क्रॉस-क्वेश्चन करते हैं कि ठीक है, इस पूर्णतावाद या परफेक्शन के चक्कर में आपका कौन सा प्रोजेक्ट देरी का शिकार हुआ, कृपया एक ठोस उदाहरण दीजिए.
पिछली कंपनी छोड़ने की वजह सिर्फ ग्रोथ बताना
यदि आपका पिछला अनुभव बहुत खराब रहा है या किसी उच्च अधिकारी के साथ आपका बड़ा झगड़ा हुआ है, तो आप इसे कंपनी की नीतियों या तरक्की की कमी बताकर टाल देते हैं।
पृष्ठभूमि की जांच के दौरान जब वे आपकी पिछली संस्था के प्रबंधक से बात करते हैं, तो असली वजह की परतें खुल जाती हैं। इसके अलावा, पुरानी कंपनी के बारे में जरूरत से ज्यादा नकारात्मक बातें बोलना भी एचआर के मन में तुरंत संदेह पैदा कर देता है.
नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक टूल्स की पूरी जानकारी का दावा
रिज्यूमे की शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया में आगे निकलने के लिए कई बार लोग ऐसे साफ्टवेयर या कौशलों को लिख देते हैं जिनकी उन्हें केवल सतही या ऊपरी जानकारी होती है।
चयन पैनल में बैठा हुआ कोई तकनीकी विशेषज्ञ तुरंत उस सॉफ्टवेयर या कोडिंग से जुड़ा कोई व्यावहारिक और गहराई वाला सवाल पूछ लेता है। ऐसा होते ही एक मिनट के भीतर उम्मीदवार की सारी हवा निकल जाती है और उसकी पोल खुल जाती है.
खुद को इस पद के लिए जरूरत से ज्यादा योग्य बताना
सामने बैठे पैनल को अधिक प्रभावित करने के अपनी ओर से कई उम्मीदवार अपनी काबिलियत और क्षमताओं को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने लगते हैं।
जब एचआर आपको कोई बहुत छोटा या जमीनी स्तर का व्यावहारिक कार्य सौंपते हैं और आप उसे ढंग से पूरा नहीं कर पाते हैं, तो आपका सारा अहंकार और बोला गया झूठ पानी-पानी हो जाता है.
लंबे समय तक इसी संस्थान में टिके रहने का वादा
रोजगार की तलाश के दौरान कई बार लोग यह भरोसा दिला देते हैं कि वे कम से कम चार से पांच साल तक कहीं अन्यत्र नहीं जाने वाले हैं, जबकि मन ही मन वे किसी बेहतर अवसर की तलाश में रहते हैं।
आपके करियर के ग्राफ और बार-बार नौकरी बदलने यानी जॉब हॉपिंग के पुराने इतिहास को देखकर एचआर बहुत आसानी से समझ जाते हैं कि आपकी जुबान और आपके रिज्यूमे के बीच कितना बड़ा अंतर है.
दूसरी बड़ी कंपनियों से कई ऑफर्स होने का दावा
अपनी मांग को बाजार में ऊंचा दिखाने या अपनी सैलरी के सौदे को बहुत जल्दी अंतिम रूप देने के लिए यह सबसे बड़ा और सबसे अधिक बोला जाने वाला झूठ माना जाता है।
जब एचआर यह कह देते हैं कि कोई बात नहीं, आप उनका वह ऑफर लेटर हमारे साथ साझा कर दीजिए ताकि हम उसे मैच करने की कोशिश कर सकें, तो झूठे उम्मीदवारों के पसीने छूटने लगते हैं और वे तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं.
झूठ के पैर कभी नहीं होते और इंटरव्यू रूम के अंदर तो यह बात शत-प्रतिशत सही साबित होती है। आपका एक छोटा सा झूठ आपके पूरे करियर के सफर पर भारी पड़ सकता है, इसलिए जरूरत से ज्यादा स्मार्ट बनने का प्रयास करने के बजाय हमेशा पूरी ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखें। यही वह मूल गुण है जो हर एचआर को सबसे ज्यादा पसंद आता है और आपके चयन की संभावना को सबसे अधिक मजबूत करता है।



















