सर्वोच्च न्यायालय में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर तीखी चर्चा सामने आई है। अदालत में कार्यवाही के दौरान पक्षों के अधिवक्ताओं ने मुकदमे की सुनवाई कर रहे जज के तबादले के मुद्दे पर अपनी दलीलें रखीं, जिस पर मुख्य न्यायाधीश की तरफ से स्पष्ट टिप्पणी की गई। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए उसे उत्सव के मद्देनजर घर जाने की छूट प्रदान कर दी है।
वकीलों के बीच तबादले के मुद्दे पर गरमाई बहस
अदालत की कार्यवाही के दौरान पीड़ितों के पक्षकार अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मामले के विचारण न्यायाधीश के स्थानांतरण का विषय उठाया। उन्होंने दलील दी कि इस न्यायिक अधिकारी का केवल फेरबदल हुआ है और आगे भी न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, आरोपी आशीष मिश्रा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने इस प्रशासनिक कदम को एक सामान्य प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इस फेरबदल से किसी भी न्यायिक अधिकारी के ऊपर कोई संदेह या नकारात्मक धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।
न्यायालय का पक्ष और प्रशासनिक कदम
इस पूरी तनातनी के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अदालत किसी भी व्यक्ति के संबंध में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं कर रही है। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय की ओर से व्यवस्था सुधारने के खातिर उठाए गए कदम पूर्ण रूप से पर्याप्त हैं। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस मामले के বিচারक से जुड़ी सतर्कता रिपोर्ट पर समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
गवाहों के बयान और मुकदमे की प्रगति
उत्तर प्रदेश राज्य की तरफ से पैरवी कर रही वकील रुचिरा गोयल ने अदालत को जानकारी दी कि मुकदमे के संचालन के लिए एक विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जा चुकी है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए बताया कि इस पूरे प्रकरण में कुल 131 गवाह सूचीबद्ध हैं। इनमें से अब तक 90 गवाहों की गवाही पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष 41 गवाहों के बयान दर्ज होना अभी बाकी है। न्यायालय ने सुनवाई की गति को लेकर टिप्पणी की कि कार्यवाही एक निश्चित समय-सीमा के भीतर संपन्न होनी चाहिए। पीठ ने निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया में न तो अत्यधिक जल्दबाजी बरती जानी चाहिए और न ही इसमें किसी प्रकार की अनपेक्षित देरी होनी चाहिए। अभियोजन तंत्र को दोनों स्थितियों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
दिवाली पर घर जाने की मिली अनुमति
सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि उनके मुवक्किल को पर्व मनाने के लिए अपने परिवार के बीच रहने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दलील दी कि इस तरह की राहतें पूर्व में भी त्यौहारों के अवसर पर प्रदान की जाती रही हैं। इन तर्कों को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया कि आरोपी आगामी 16 नवंबर तक अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी में रह सकता है। हालांकि, उसे पूर्व में तय की गई सभी शर्तों का कड़ाई से पालन करना होगा और निर्धारित तिथि पर वापस लौटना होगा।
घटना की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति
यह पूरा न्यायिक घटनाक्रम 3 अक्टूबर 2021 को घटित उस हिंसा से जुड़ा है, जिसमें विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के ऊपर वाहन चढ़ा दिए गए थे। इस दुर्घटना और उसके बाद भड़की हिंसा में चार किसानों और एक पत्रकार समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। पूर्व में शीर्ष अदालत ने उन्हें रिहाई देते हुए उस क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें बाद में संशोधन कर उन्हें सप्ताहांत पर घर जाने की छूट दी गई थी। अदालत इस पूरे मामले में विचारण की निगरानी लगातार कर रही है।


















