देश के सुदूर और ग्रामीण अंचलों में मोबाइल रिपेयरिंग का बिजनेस आज के समय में बेहद तेजी से विस्तार ले रहा है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और हर हाथ में स्मार्टफोन पहुंच जाने के कारण यह सेक्टर स्थानीय स्तर पर एक बेहद डिमांडिंग रोजगार का जरिया बनता जा रहा है। खासकर बस्तर क्षेत्र में युवा इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और कम लागत में अपना खुद का रोजगार स्थापित कर रहे हैं। इस काम को शुरू करने के लिए बहुत बड़े बजट या किसी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए राह आसान हो जाती है।
कम निवेश में शुरू करें दुकान
ग्रामीण इलाकों में एक छोटा सा मोबाइल सेंटर स्थापित करने के लिए शुरुआती तौर पर अधिक पैसों की आवश्यकता नहीं होती है। इस बिजनेस को मात्र 60 से 70 हजार रुपये तक के मामूली निवेश के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है। कमाई की बात करें तो एक सामान्य दुकान से महीने भर में कम से कम 20 से 30 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी आसानी से हो जाती है। वहीं यदि दुकान की लोकेशन अच्छी हो और ग्राहकों की संख्या बढ़ जाए, तो यह कमाई बढ़कर 50 से 60 हजार रुपये प्रति महीने तक भी पहुंच सकती है।
प्रशिक्षण और सरकारी सहायता का लाभ
स्थानीय स्तर पर रामदास नाम के एक दुकानदार पिछले 2 साल से सफलतापूर्वक अपना मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर चला रहे हैं। कोरोना काल के दौरान जब वह बेरोजगार हो गए थे, तब उन्हें आरटीसी मोबाइल रिपेयरिंग ट्रेनिंग के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने वहां से 1 महीने की निशुल्क ट्रेनिंग पूरी की। सरकार की तरफ से यह मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण पूरी तरह मुफ्त दिया जाता है, जिसमें उपकरणों की मरम्मत और तकनीकी खराबी यानी फॉल्ट को ठीक करने की बारीकियों को बहुत गहराई से सिखाया जाता है। कोर्स पूरा करने के बाद नियमानुसार सरकार की ओर से बिजनेस को बढ़ाने के लिए लोन की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है, हालांकि रामदास ने बिना लोन लिए ही अपने संसाधनों से काम शुरू किया था।
लागत और मुनाफे का पूरा गणित
शहरों और गांवों के खर्च में काफी अंतर होता है। ग्रामीण स्तर पर एक मोबाइल की दुकान शुरू करने के लिए 50 से 60 हजार रुपये पर्याप्त होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यही सेटअप लगाने के लिए डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कमाई के अन्य स्रोतों की बात करें तो केवल एक डिस्प्ले तैयार करने या बदलने पर लगभग 400 रुपये तक का सीधा मुनाफा मिल जाता है। इसके अलावा दुकान पर ब्लूटूथ डिवाइस, हेडफोन, चार्जिंग केबल और मोबाइल कवर जैसे एसेसरीज की मांग सबसे अधिक बनी रहती है, जो नियमित आय का बड़ा स्रोत साबित होते हैं।


















