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श्री रेणुका जी अंतरराष्ट्रीय मेले के लिए पंचायत प्रधानों से मांगे दो हजार रुपये, सिरमौर में सुक्खू सरकार के फैसले पर विरोधहिमाचल प्रदेश
3 नव॰ 2026, 1:46 pm (6 मिनट पहले)· 0

श्री रेणुका जी अंतरराष्ट्रीय मेले के लिए पंचायत प्रधानों से मांगे दो हजार रुपये, सिरमौर में सुक्खू सरकार के फैसले पर विरोध

सिरमौर के अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेले के लिए पंचायत प्रधानों से दो-दो हजार रुपये जुटाने के निर्देश पर विवाद छिड़ गया है, जिसे प्रतिनिधियों ने गैर-जरूरी बोझ बताया है।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेले को लेकर एक ताजा विवाद खड़ा हो गया है। मेले की तैयारियों के बीच नाहन से अधिकारियों द्वारा पंचायत प्रधानों से दो-दो हजार रुपये की धनराशि की मांग की जा रही है। इस आर्थिक मांग का पंचायत प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध किया है और इसे पूरी तरह अनुचित कदम करार दिया है। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब पंचायत के प्रधान यशपाल ने नाहन में मीडिया के समक्ष अपनी बात रखते हुए प्रशासन के इस रुख पर कड़े सवाल उठाए हैं।

पंचायतों के फंड पर दबाव और प्रतिनिधियों की आपत्ति

पंचायत प्रधान यशपाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों पर विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए तय संसाधनों के बीच मेले के नाम पर प्रधानों से पैसे मांगना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है। उनका सवाल है कि जब पंचायतें अपने स्थानीय दायित्वों को पूरा करने में जुटी हैं, तो फिर मेले की व्यवस्था के लिए उन पर आर्थिक दबाव क्यों डाला जा रहा है।

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बाहरी कलाकारों पर फिजूलखर्ची रोकने और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने की मांग

यशपाल ने मांग उठाई कि श्री रेणुका जी विकास बोर्ड को बाहरी राज्यों से बुलाए जाने वाले महंगे कलाकारों पर होने वाले भारी खर्च पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। उनके अनुसार मेलों में बाहरी राज्यों के पंजाबी गायकों को बुलाकर फिजूलखर्ची की जाती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के समय इन कलाकारों की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं दी जाती। यदि बाहरी कलाकारों के स्थान पर प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराया जाए, तो इससे न केवल स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि लाखों रुपये की सरकारी बचत भी होगी।

आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकार और पहले के विवाद

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार इन दिनों वित्तीय संकट का सामना कर रही है, जिसके चलते जिला स्तर पर होने वाले पारंपरिक मेलों और आयोजनों के लिए बजट की भारी कमी महसूस हो रही है। यह पहली बार नहीं है जब धन जुटाने के लिए इस तरह के निर्देश जारी हुए हों। इससे पूर्व कांगड़ा कार्निवल के समय पेट्रोल पंपों से राशि जुटाने के आदेश जारी किए गए थे, जबकि बीते वर्ष भी श्री रेणुका जी मेले के संचालन के लिए इसी तरह से धन जुटाने की बात सामने आई थी।

19 से 24 नवंबर 2026 तक होगा मेले का धार्मिक आयोजन

सिरमौर जिले में यह अंतरराष्ट्रीय मेला 19 से 24 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पवित्र उत्सव भगवान परशुराम और उनकी माता देवी रेणुका के मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस स्थान को भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। देवी रेणुका महर्षि जमदग्नि की धर्मपत्नी थीं। पौराणिक प्रसंग के अनुसार, जब राजा सहस्त्रबाहु ने महर्षि जमदग्नि की हत्या कर दी थी, तब व्यथित होकर माता रेणुका ने राम सरोवर में छलांग लगा दी थी, जिसे अब रेणुका झील के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि जब माता रेणुका जल में समाईं, तो सरोवर ने एक स्त्री के शरीर का आकार ले लिया था। ऊंचाई पर स्थित पहाड़ियों से देखने पर आज भी यह झील एक स्त्री की आकृति जैसी दिखाई देती है।

सवाल-जवाब

श्री रेणुका जी मेले को लेकर विवाद क्यों हुआ है?
अधिकारियों द्वारा नाहन में पंचायत प्रधानों से मेले के आयोजन हेतु दो-दो हजार रुपये की मांग किए जाने पर पंचायत प्रतिनिधियों ने विरोध जताया है।
कालाअंब पंचायत के प्रधान ने इस मांग पर क्या आपत्ति जताई?
प्रधान यशपाल ने कहा कि पंचायतों के पास विकास और जनकल्याण के काम होते हैं, ऐसे में उनसे मेले के लिए पैसे मांगना अनुचित है।
मेले में कलाकारों को लेकर क्या मांग रखी गई है?
बाहरी राज्यों के महंगे पंजाबी गायकों पर होने वाले फिजूलखर्च को बंद कर हिमाचल के स्थानीय कलाकारों को मंच देने की मांग की गई है।
क्या पहले भी ऐसे आयोजनों के लिए पैसे जुटाने के आदेश दिए गए थे?
हां, इससे पहले कांगड़ा कार्निवल के दौरान पेट्रोल पंपों से और पिछले साल भी रेणुका जी मेले के लिए धन जुटाने के आदेश सामने आए थे।
श्री रेणुका जी अंतरराष्ट्रीय मेला कब आयोजित किया जाएगा?
यह अंतरराष्ट्रीय मेला 19 से 24 नवंबर 2026 तक हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आयोजित किया जाएगा।
रेणुका झील का धार्मिक और पौराणिक महत्व क्या है?
यह भगवान परशुराम और माता रेणुका के मिलन का प्रतीक है, जहां माता रेणुका के सरोवर में समाने के बाद झील ने स्त्री देह का आकार ले लिया था।
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