उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय फलक पर एशियाई शिक्षण संस्थानों के बीच बढ़ती होड़ के बीच भारत की मौजूदगी का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है. ताज़ा क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में देश के कुल 325 उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपनी जगह बनाई है. हालांकि इस व्यापक भागीदारी के बीच जब देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और प्रमुख तकनीकी संस्थानों के व्यक्तिगत प्रदर्शन की पड़ताल की जाती है, तो मिले-जुले नतीजे देखने को मिलते हैं. एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है, वहीं ऐतिहासिक दिल्ली यूनिवर्सिटी इस बार एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों के संभ्रांत क्लब से बाहर फिसल गई है. देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शुमार आईआईटी दिल्ली राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतरीन पायदान पर बरकरार है, भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी समग्र रैंकिंग में कुछ अंकों की गिरावट आई हो.
दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्थान फिसला, जेएनयू और जामिया की स्थिति मजबूत
भारत के सबसे विख्यात और पुराने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए इस साल की तालिका एक झटका लेकर आई है. पिछले संस्करण में दिल्ली यूनिवर्सिटी को 95वां स्थान हासिल था, मगर इस मर्तबा 11 पायदान फिसलकर यह संस्थान 106वें स्थान पर आ गया है. नतीजतन विश्वविद्यालय एशिया की टॉप 100 फेहरिस्त से बाहर हो गया है. महाद्वीप के विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों के मध्य बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सीधा दबाव प्रमुख भारतीय परिसरों पर साफ झलकता है. हालांकि शैक्षणिक विश्लेषकों और खुद रैंकिंग संस्था क्यूएस के अनुसार केवल स्थान में गिरावट का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि शिक्षा या शोध की बुनियादी गुणवत्ता कम हुई है, क्योंकि कई बार कुल अंकों या स्कोर में वृद्धि के बावजूद अन्य प्रतिस्पर्धी संस्थानों के अप्रत्याशित प्रदर्शन की वजह से रैंक नीचे आ जाती है.
इसके विपरीत, राष्ट्रीय राजधानी के दो अन्य शीर्ष केंद्रीय परिसरों ने बेहतर प्रदर्शन का प्रदर्शन किया है. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने पिछले वर्ष के 130वें स्थान से दो अंकों की बढ़त हासिल करते हुए इस वर्ष 128वां स्थान सुरक्षित किया है. वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने और भी सशक्त छलांग लगाई है. जामिया पिछले साल 197वें स्थान पर था और इस बार 14 स्थानों की बड़ी बढ़त के साथ सीधे 183वें पायदान पर पहुंच गया है. दिल्ली के इन तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों का यह तुलनात्मक उतार-चढ़ाव दिखाता है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के पैमाने पर अलग-अलग परिसरों का गतिज संतुलन किस प्रकार बदल रहा है.
काशी में बीएचयू और आईआईटी बीएचयू का अलग-अलग प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के प्राचीन सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी में स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और उसी परिसर से जुड़े तकनीकी संस्थान आईआईटी बीएचयू के प्रदर्शन के आंकड़े भी अलग-अलग दर्ज किए गए हैं. मुख्य बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की रैंक में इस साल 10 पायदान की गिरावट आई है, जिसके चलते यह संस्थान पिछले वर्ष के 224वें स्थान से लुढ़क कर 234वें स्थान पर पहुंच गया है. इसके उलट तकनीकी शाखा के रूप में स्थापित आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी ने अपनी स्थिति में ठोस मजबूती दिखाई है. पिछले संस्करण में 237वें स्थान पर रहने वाले इस तकनीकी संस्थान ने 18 स्थानों की लंबी छलांग लगाई है और अब 219वीं रैंक पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
आईआईटी दिल्ली का राष्ट्रीय दबदबा कायम, पर प्रमुख तकनीकी संस्थान नीचे खिसके
देश भर के उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान बनाए रखा है. हालांकि वैश्विक स्तर पर इसके क्रम में मामूली कमी आई है. पिछले साल जहां आईआईटी दिल्ली को एशिया में 59वां स्थान मिला था, वहीं इस वर्ष यह 7 पायदान फिसलकर 66वें स्थान पर आ गया है. देश के अन्य अग्रणी इंजीनियरिंग और विज्ञान संस्थानों में भी कमोबेश ऐसी ही प्रवृत्ति देखने को मिली है. भारतीय विज्ञान संस्थान आईआईएससी बेंगलुरु पिछले साल 64वें नंबर पर था, जो इस बार फिसलकर 79वें स्थान पर पहुंच गया है.
इसी प्रकार आईआईटी बॉम्बे की स्थिति 71वें से खिसक कर 83वें स्थान पर आ गई है. आईआईटी मद्रास 70वें से गिरकर 85वें स्थान पर पहुंचा है. पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित आईआईटी खड़गपुर की रैंक 77 से घटकर 90 हो गई है, जबकि आईआईटी कानपुर 77वें पायदान से लुढ़क कर 97वें स्थान पर दर्ज हुआ है. हालांकि इन शीर्ष छह भारतीय संस्थानों की व्यक्तिगत रैंक में पिछले साल के मुकाबले गिरावट आई है, फिर भी आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण श्रेणी में भारतीय प्रतिनिधित्व को थामे हुए हैं.
गुवाहाटी और रुड़की में गिरावट, हैदराबाद और धनबाद ने दर्ज किया सुधार
देश के अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों के मूल्यांकन में भी मिश्रित परिणाम सामने आए हैं. पूर्वोत्तर के प्रमुख तकनीकी संस्थान आईआईटी गुवाहाटी को इस बार 120वां स्थान मिला है, जो पिछले वर्ष के 115वें स्थान से पांच पायदान नीचे है. वहीं उत्तराखंड स्थित आईआईटी रुड़की को 124वां स्थान मिला है, जबकि पिछले वर्ष यह 114वें पायदान पर था, जिससे इसमें 10 स्थानों की गिरावट दर्ज की गई है.
इसके ठीक उलट कुछ अन्य परिसरों ने बहुत प्रभावशाली सुधार दर्ज किया है. आईआईटी हैदराबाद की रैंकिंग में 19 पायदान का उछाल आया है और यह 270 से सुधरकर 251वें स्थान पर पहुंच गया है. झारखंड के कोयलांचल में स्थित आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने विशेष रूप से उल्लेखनीय प्रगति की है. इस संस्थान ने पिछले वर्ष के मुकाबले 51 पायदान की भारी छलांग लगाई है और अब 373वें स्थान पर स्थापित हो गया है.
एशिया के शीर्ष 200 संस्थानों में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 21 हुई
समग्र दृष्टिकोण से देखा जाए तो एशिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों के अत्यंत प्रतिस्पर्धी समूह में भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ा है. पिछले वर्ष जहां इस विशिष्ट समूह में देश के 20 संस्थान शामिल थे, वहीं इस बार एक संस्थान की वृद्धि के साथ यह संख्या 21 हो गई है. इस सूची में सार्वजनिक तकनीकी संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय और निजी उच्च शिक्षण संस्थान तीनों शामिल हैं. देश के शीर्ष छह पायदानों पर आईआईटी दिल्ली 66वें, आईआईएससी बेंगलुरु 79वें, आईआईटी बॉम्बे 83वें, आईआईटी मद्रास 85वें, आईआईटी खड़गपुर 90वें और आईआईटी कानपुर 97वें स्थान पर विराजमान हैं.
इनके अतिरिक्त चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को 104वां, दिल्ली यूनिवर्सिटी को 106वां, आईआईटी गुवाहाटी को 120वां और आईआईटी रुड़की को 124वां स्थान मिला है. जेएनयू 128वें, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी 154वें, वीआईटी वेल्लोर 156वें और बिट्स पिलानी 161वें स्थान पर स्थित हैं. इनके साथ ही ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी 165वें स्थान पर दर्ज की गई है. इस प्रकार व्यापक स्तर पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय परिसरों की संख्यात्मक वृद्धि स्पष्ट रूप से रेखांकित हो रही है.



















