भारत में तकनीकी समाधानों को सीधे ग्राहकों की प्रणाली पर लागू करने वाले फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स यानी एफडीई का बड़ा हिस्सा देश के कुछ चुनिंदा आईटी केंद्रों तक ही सीमित बना हुआ है। पूरे देश के कुल एफडीई पेशेवरों में से 34 प्रतिशत अकेले बेंगलुरु में काम कर रहे हैं, जिससे यह शहर इस विशिष्ट तकनीकी प्रतिभा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। इसके साथ ही हैदराबाद भी इस क्षेत्र में एक प्रमुख और तेजी से बढ़ते केंद्र के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। द फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर टैलेंट लैंडस्केप इन इंडिया शीर्षक से जारी एक विस्तृत अध्ययन में देश भर में इस प्रतिभा के वितरण और उद्योग की प्रवृत्तियों का ब्योरा सामने रखा गया है।
शीर्ष तीन शहरों की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत पहुंची
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि देश का 61 प्रतिशत एफडीई कार्यबल केवल तीन प्रमुख क्षेत्रों में केंद्रित है। इनमें बेंगलुरु 34 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ हैदराबाद दूसरे स्थान पर बना हुआ है। देश की राजधानी से सटे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत दर्ज की गई है। अन्य तकनीकी शहरों की बात करें तो पुणे में 12 प्रतिशत और मुंबई में 11 प्रतिशत एफडीई पेशेवर कार्यरत हैं। इसके अलावा चेन्नई और देश के अन्य सभी छोटे-बड़े शहरों की हिस्सेदारी 8-8 प्रतिशत आंकी गई है।
हैदराबाद में क्यों बढ़ रही है एफडीई की मांग
इस अध्ययन को प्रस्तुत करने वाले एफडीई एकेडमी के अनुसार हैदराबाद एक उभरते हुए एफडीई केंद्र के तौर पर तेजी से विकसित हो रहा है। शहर में बड़े उद्यमों की तकनीकी परियोजनाओं में हो रहे पूंजी निवेश ने इस वृद्धि को रफ्तार दी है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर आधारित नई तकनीकी भूमिकाओं की बढ़ती संख्या ने भी यहां के टैलेंट इकोसिस्टम को पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक बना दिया है।
कंपनियों की श्रेणी और रोजगार का ढांचा
विभिन्न कंपनियों में इन इंजीनियरों की तैनाती का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बड़ी तकनीकी कंपनियां यानी बिग टेक फर्में सबसे बड़ी नियोक्ता हैं, जिनके पास कुल एफडीई कार्यबल का 38 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत उत्पाद आधारित यानी प्रोडक्ट कंपनियां 24 प्रतिशत पेशेवरों को रोजगार देती हैं। पारंपरिक आईटी सेवा कंपनियों के पास भी इस कार्यबल का 24 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि कंसल्टिंग फर्मों की हिस्सेदारी भी 24 प्रतिशत ही दर्ज की गई है। वहीं पूरी तरह एआई तकनीक पर केंद्रित स्टार्टअप्स में 14 प्रतिशत एफडीई पेशेवर काम कर रहे हैं।
अनुभव का अभाव और वरिष्ठ प्रतिभा की जरूरत
कार्यबल के अनुभव स्तर की पड़ताल करने पर यह तथ्य सामने आया है कि इस क्षेत्र से जुड़े अधिकांश पेशेवर अपने करियर के शुरुआती चरण में हैं। कुल एफडीई प्रतिभाओं में से करीब 70 प्रतिशत के पास 8 साल या उससे कम समय का कार्य अनुभव है। अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि इस तरह का रुझान उद्योग में अधिक अनुभवी और वरिष्ठ नेतृत्व की भारी कमी को दर्शाता है। इसी वजह से तकनीकी इकोसिस्टम के भीतर समय के साथ गहरे तकनीकी और व्यावसायिक अनुभव का निर्माण करना बेहद आवश्यक हो गया है।
नेतृत्व का नजरिया और भविष्य की चुनौतियां
एफडीई एकेडमी के संस्थापक और सीईओ राघव गुप्ता ने इस आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एआई आधारित प्रणालियों को तैनात करने के लिए इंजीनियरिंग की गहरी समझ, कारोबारी प्रक्रिया की सूझबूझ और ग्राहक के माहौल में नतीजों की पूरी जिम्मेदारी लेने की क्षमता का सही तालमेल होना जरूरी है। राघव गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न शहरों में प्रतिभा के इस तरह के भारी जमावड़े का सीधा प्रभाव कंपनियों की नियुक्ति रणनीतियों पर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नियोक्ताओं को सिर्फ दफ्तरों के भौगोलिक स्थान पर ध्यान देने के बजाय समय के साथ कर्मचारियों की कार्यक्षमता और विशेषज्ञता को तराशने पर जोर देना चाहिए।
समग्र रूप से यह अध्ययन दर्शाता है कि भारत में तकनीकी और एआई से जुड़े एफडीई पेशेवरों का फैलाव कुछ ही महानगरों के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। बेंगलुरु की अग्रणी स्थिति और हैदराबाद की तेज तरक्की के बीच अनुभव का यह अंतर आने वाले दिनों में कंपनियों की प्रतिभा निर्माण और उन्हें अपने साथ बनाए रखने की नीतियों को गहराई से प्रभावित करेगा।



















