एशियाई स्तर पर उच्च शिक्षण संस्थानों की ताजा वार्षिक सूची में भारत की भागीदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिसमें देश भर के कुल 325 शिक्षण संस्थानों ने अपनी जगह बनाई है। इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराने के मामले में भारत पूरे एशिया में दूसरे पायदान पर पहुंच चुका है। इसके बावजूद, इस सूची में शामिल लगभग 71 फीसदी भारतीय संस्थानों की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में नीचे खिसक गई है। संस्थानों की बढ़ती संख्या जहां देश के उच्च शिक्षा दायरे के फैलाव को दिखाती है, वहीं महाद्वीप स्तर पर बढ़ते तीव्र शैक्षणिक मुकाबले के कारण अधिकांश संस्थान अपनी पुरानी रैंकिंग बरकरार रखने में सफल नहीं हो पाए हैं।
देश के प्रमुख और शीर्ष संस्थानों की स्थिति पर असर
इस शैक्षणिक मूल्यांकन में देश के अग्रणी और प्रतिष्ठित माने जाने वाले संस्थानों को भी रैंकिंग में नुकसान उठाना पड़ा है। भारत के शीर्ष छह सबसे बड़े संस्थान इस बार तालिका में फिसलते नजर आए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT दिल्ली) देश के भीतर सबसे ऊंची रैंक पर बना हुआ है, किंतु इसकी क्षेत्रीय रैंक 59 से घटकर 66 पर आ गई है। इसी तरह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc बेंगलुरु) 64वें पायदान से खिसककर 79वें स्थान पर पहुंच गया है।
देश के अन्य तकनीकी संस्थानों में भी समान रुख देखने को मिला है। IIT बॉम्बे की स्थिति 71वीं रैंक से गिरकर 83वें स्थान पर आ गई है, जबकि IIT मद्रास 70वें स्थान से फिसलकर 85वें स्थान पर आ गया है। IIT खड़गपुर 77वें स्थान से गिरकर 90वें पायदान पर पहुंचा है और IIT कानपुर 77वीं रैंक से लुढ़ककर 97वें स्थान पर दर्ज हुआ है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली विश्वविद्यालय भी शीर्ष सौ संस्थानों की सूची से बाहर हो गया है और उसकी रैंक 95 से गिरकर 106वें स्थान पर दर्ज की गई है।
रैंकिंग में गिरावट और वास्तविक शैक्षणिक गुणवत्ता का अंतर
मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, रैंक में आने वाली कमी का सीधा अर्थ यह नहीं है कि किसी संस्थान के वास्तविक शैक्षणिक स्तर अथवा शिक्षण गुणवत्ता में कोई ह्रास हुआ है। क्यूएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "71 फीसदी का आंकड़ा भारत की उन 325 यूनिवर्सिटीज के अनुपात को बताता है, जिनकी रैंक इस साल नीचे आई है।" उन्होंने कहा कि इस आंकड़े को समग्र भारतीय प्रदर्शन में 71 फीसदी की गिरावट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बेन सॉटर ने यह भी स्पष्ट किया कि रैंक कम होने के बावजूद कई भारतीय संस्थानों के प्रदर्शन मानकों में वास्तव में वृद्धि दर्ज की गई है। जिन भारतीय संस्थानों की रैंक में गिरावट आई है, उनमें से लगभग दो-तिहाई संस्थानों ने अपने समग्र स्कोर में सुधार दर्ज किया है। IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली तथा IISc बेंगलुरु जैसे शीर्ष संस्थानों ने अपने पुराने कुल स्कोर को लगभग बनाए रखा है। ऐसे में इस रैंकिंग गिरावट का प्रमुख कारण महाद्वीप के अन्य देशों के संस्थानों के बीच बढ़ता तेज प्रतिस्पर्धात्मक दबाव है, न कि घरेलू संस्थानों की पढ़ाई या शोध में कोई प्रत्यक्ष कमजोरी।
किन संस्थानों की रैंकिंग में आई सबसे बड़ी गिरावट
इस सूची में शामिल कुछ भारतीय विश्वविद्यालयों को भारी अंकों और पायदानों का नुकसान झेलना पड़ा है। विभिन्न श्रेणियों में कोट्टायम स्थित महात्मा गांधी विश्वविद्यालय की स्थिति सबसे अधिक कमजोर दर्ज की गई, जो 495वें स्थान से सीधे 202 पायदान फिसलकर 697वें स्थान पर पहुंच गया। हैदराबाद का उस्मानिया विश्वविद्यालय 470वें पायदान से लुढ़ककर 650वें स्थान पर आ गया, जिसमें 180 पायदानों की तेज गिरावट हुई। मदुरै कामराज विश्वविद्यालय की रैंक भी 458वें स्थान से 173 पायदान घटकर 631वें स्थान पर आ गई है।
महाद्वीप के शीर्ष 200 संस्थानों के दायरे में मौजूद भारतीय संस्थानों में IIT कानपुर और यूपीईएस (UPES) की रैंकिंग में सबसे अधिक गिरावट आई। IIT कानपुर 77वें पायदान से 20 स्थान नीचे आकर 97वें स्थान पर रहा, जबकि UPES 163वें पायदान से 20 स्थान गिरकर 183वें स्थान पर आ गया। इसके साथ ही शूलिनी विश्वविद्यालय की स्थिति भी 159वीं रैंक से कमजोर होकर 177वें स्थान पर दर्ज हुई।
बेहतरीन सुधार दर्ज करने वाले प्रमुख संस्थान
व्यापक स्तर पर आई गिरावट के विपरीत, कई भारतीय विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति में ठोस सुधार करते हुए रैंकिंग में ऊंची छलांग लगाई है। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय 109वें स्थान से सुधरकर 104वें स्थान पर आ गया है, जो इस संस्थान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। निजी क्षेत्र के अन्य संस्थानों में लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय (LPU) ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए अपनी रैंक 187 से बढ़ाकर 154 कर ली। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल विश्वविद्यालय भी 200वें स्थान से ऊपर चढ़कर 175वें स्थान पर पहुंच गया।
सरकारी एवं तकनीकी संस्थानों ने भी बेहतर प्रगति दर्ज की है। IIT हैदराबाद 270वें स्थान से सुधरकर 251वें और IIT बीएचयू वाराणसी 237वें पायदान से ऊपर उठकर 219वें स्थान पर आ गया है। IIT आईएसएम धनबाद ने 51 पायदानों की छलांग लगाते हुए 373वीं रैंक हासिल की। डॉ. बीआर आंबेडकर एनआईटी जालंधर ने 180 पायदानों का शानदार उछाल दर्ज कर 486वां स्थान प्राप्त किया, जबकि दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी 116 स्थानों की बढ़त के साथ 584वें स्थान पर पहुंच गई।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेणी में जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अपनी रैंक 197 से सुधारकर 183 कर ली है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय 278वें से 268वें स्थान पर आया है, जबकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय 130वें से सुधरकर 128वें पायदान पर दर्ज हुआ है। निजी क्षेत्र में जीएलए विश्वविद्यालय लगभग 300 पायदान ऊपर चढ़कर 491वें स्थान पर पहुंच गया और जैन विश्वविद्यालय ने 221 पायदानों का भारी सुधार दिखाते हुए 374वीं रैंक अपने नाम की।
एशिया के शीर्ष 200 में भारत के कुल 21 संस्थान
क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 की सूची में भारत के कुल 21 संस्थानों ने शीर्ष 200 में अपनी जगह पक्की की है। इनमें प्रमुख रूप से IIT दिल्ली 66वें स्थान पर, IISc बेंगलुरु 79वें स्थान पर, IIT बॉम्बे 83वें स्थान पर, IIT मद्रास 85वें स्थान पर, IIT खड़गपुर 90वें स्थान पर और IIT कानपुर 97वें स्थान पर शामिल हैं। इसके उपरांत चंडीगढ़ विश्वविद्यालय 104वें तथा दिल्ली विश्वविद्यालय 106वें स्थान पर स्थित हैं।
अन्य तकनीकी और उच्च संस्थानों में IIT गुवाहाटी को 120वीं तथा IIT रुड़की को 124वीं रैंक मिली है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय 128वें स्थान पर कायम है। लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय 154वें, वीआईटी वेल्लोर 156वें, बिट्स पिलानी 161वें तथा ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय 165वें स्थान पर दर्ज हैं। शूलिनी विश्वविद्यालय 177वें स्थान पर, एमिटी विश्वविद्यालय 181वें स्थान पर तथा सिम्बायोसिस इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और UPES तीनों संस्थान 183वें स्थान पर रहे, जबकि मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन भी सूची में शामिल रहा।



















