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यूपीएससी नागरिक सेवा परीक्षा में भाषावार चयन के आंकड़े संसद में पेश, जानिए हिंदी और मैथिली माध्यम का प्रदर्शनकरियर
9 अग॰ 2026, 10:22 am (35 दिन पहले)· 1

यूपीएससी नागरिक सेवा परीक्षा में भाषावार चयन के आंकड़े संसद में पेश, जानिए हिंदी और मैथिली माध्यम का प्रदर्शन

सरकार ने राज्यसभा में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाषावार चयन के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। प्रस्तुत विवरण से हिंदी, मैथिली और अन्य भारतीय भाषा माध्यमों से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के चयन और उनके रुझानों का पता चलता है।

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के मन में अक्सर यह शंका रहती है कि परीक्षा का माध्यम उनकी सफलता के आड़े तो नहीं आ रहा। मातृभाषा में तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की इस असमंजस को दूर करने के लिए सरकार ने राज्यसभा में भाषावार चयन का विस्तृत डेटा साझा किया है। संसद के पटल पर रखे गए इस ब्योरे से स्पष्ट होता है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवाओं में हिंदी, मैथिली और अन्य क्षेत्रीय भाषा माध्यम के उम्मीदवारों का प्रदर्शन और प्रतिनिधित्व किस स्तर पर है।

संसद में भाषावार चयन का लेखा-जोखा

राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सरकार की ओर से प्रशासनिक पदों पर चयनित उम्मीदवारों की भाषा संबंधी जानकारी दी गई। इस पारदर्शी ब्योरे को सार्वजनिक करने का प्राथमिक उद्देश्य अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा के वास्तविक रुझानों को लेकर स्पष्टता लाना है। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाता है कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसी शीर्ष सेवाओं में विभिन्न भाषाओं से आने वाले उम्मीदवारों की कितनी भागीदारी है।

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हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की स्थिति

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अंग्रेजी माध्यम से सम्मिलित होने वाले उम्मीदवारों का दबदबा और संख्या अब भी सर्वाधिक है। हालांकि, इसके बावजूद हिंदी माध्यम से तैयारी में लगे अभ्यर्थियों की उपस्थिति निरंतर दर्ज की जा रही है। भले ही अंग्रेजी की तुलना में हिंदी माध्यम का कुल चयन प्रतिशत कम दिखाई देता हो, लेकिन प्रतिवर्ष प्रतिभावान छात्र हिंदी माध्यम से भी उच्च रैंक प्राप्त करके अपनी योग्यता साबित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर लेखन शैली और सटीक रणनीति के दम पर अभ्यर्थी भाषा की सीमा को पार कर सफलता हासिल कर रहे हैं।

मैथिली और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का प्रदर्शन

संसदीय आंकड़ों में मैथिली तथा अन्य भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं के चयन रुझानों को भी शामिल किया गया है। मुख्य रूप से बिहार और उसके आसपास के क्षेत्रों से आने वाले उम्मीदवार मैथिली भाषा एवं इसके साहित्य को मुख्य विषय बनाकर परीक्षा में शामिल होते हैं। हालांकि, क्षेत्रीय भाषा चुनने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या सीमित रहती है, लेकिन उनके सफलता की दर सकारात्मक संकेत देती है। यह इस बात को रेखांकित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि मातृभाषा पर मजबूत पकड़ हो, तो बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

क्या बदल रहा है परीक्षा का रुझान?

सरकारी आंकड़ों के विस्तृत मूल्यांकन से यह स्पष्ट होता है कि संघ लोक सेवा आयोग चयन प्रक्रिया में किसी विशेष भाषा के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखता। सिविल सेवा परीक्षा का मुख्य मानदंड उम्मीदवार की वैचारिक स्पष्टता, विश्लेषण क्षमता और विषय की समझ पर आधारित होता है। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिंदी और मैथिली माध्यम के परीक्षार्थी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री के साथ नियमित पुनरावृत्ति पर ध्यान केंद्रित करें, तो आने वाले समय में चयन के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

सवाल-जवाब

सरकार ने संसद में यूपीएससी की भाषावार रिपोर्ट कहां पेश की?
सरकार ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाषावार चयन के विस्तृत आंकड़े पेश किए।
क्या अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों का दबदबा यूपीएससी में बना हुआ है?
हां, सरकारी आंकड़ों के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में अंग्रेजी माध्यम से शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या और चयन का प्रतिशत सबसे अधिक है।
मैथिली भाषा चुनकर परीक्षा देने वाले उम्मीदवार मुख्य रूप से किस क्षेत्र से आते हैं?
मैथिली भाषा और साहित्य को चुनकर यूपीएससी परीक्षा में बैठने वाले अधिकांश उम्मीदवार बिहार और उसके आसपास के क्षेत्रों से संबंधित होते हैं।
क्या यूपीएससी में भाषा के आधार पर कोई भेदभाव होता है?
नहीं, आंकड़ों का विश्लेषण दिखाता है कि यूपीएससी किसी भाषा के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखता और चयन मुख्य रूप से विषय की समझ और विचारों की स्पष्टता पर निर्भर करता है।
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए विशेषज्ञों की क्या सलाह है?
विशेषज्ञों की सलाह है कि हिंदी और मैथिली माध्यम के अभ्यर्थी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, सटीक रणनीति और नियमित रिवीजन पर ध्यान केंद्रित करें।
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