राजस्थान के अलवर जिले स्थित रामगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में नगर निकाय चुनाव की मतगणना से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ गया है। अकबरपुर क्षेत्र के धवाला रिसॉर्ट में उस समय काफी हंगामा देखने को मिला, जब अकबरपुर और रामगढ़ थाने की पुलिस टीम वहां जारी कांग्रेस की बाड़ेबंदी में पहुंच गई। पुलिस बल वार्ड संख्या 10 से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा को अपने साथ ले जाने पर अड़ा हुआ था। पुलिस का दावा था कि उन्हें योगेश मिश्रा के अपहरण से जुड़ी एक शिकायत मिली है। हालांकि मौके पर खुद निर्दलीय प्रत्याशी ने पुलिस के दावों का स्पष्ट खंडन किया और कहा कि वे अपनी मर्जी से कांग्रेस के शिविर में मौजूद हैं। इसके बावजूद पुलिस की टीम उन्हें वहां से ले जाने की कोशिश करती रही, जिससे रिसॉर्ट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
रिसॉर्ट के बाहर एक घंटे तक चली खींचतान और ड्रामा
करीब एक घंटे तक धवाला रिसॉर्ट के बाहर भारी अफरातफरी का माहौल बना रहा। जब पुलिस टीम ने निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा को जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जबर्दस्त कहासुनी और खींचतान देखने को मिली। स्थिति ऐसी बन गई कि एक तरफ पुलिसकर्मी प्रत्याशी को अपनी ओर खींच रहे थे, तो दूसरी तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें बचाने के लिए अपनी तरफ खींच रहे थे। काफी देर तक चले इस ड्रामे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध के बाद आखिरकार पुलिस टीम खाली हाथ वापस लौटने पर मजबूर हो गई। प्रत्याशी योगेश मिश्रा ने पुलिस के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि उन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं है और वे अपनी स्वेच्छा से बाड़ेबंदी में रह रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें साथ ले जाने की कोशिशों ने कई सवाल खड़े कर दिए।
राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तानाशाही का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति में इस तरह की दमनकारी परंपरा कभी नहीं रही है। टीकाराम जूली ने दावा किया कि अलवर में महिला प्रत्याशी को ले जाने पहुंची पुलिस की टीम के साथ भी टकराव की नौबत आई थी। इसके अलावा अलवर और करौली सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी प्रशासन द्वारा पार्षदों पर दबाव बनाने और उन्हें उठाने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने सत्ताधारी दल पर निकाय चुनावों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया और कहा कि चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया है। साथ ही उन्होंने ईवीएम के साथ वीवीपैट न लगाए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की तानाशाही और गुंडागर्दी को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक दबाव और बाड़ेबंदी पर पूर्व प्रत्याशी के गंभीर सवाल
रामगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान ने भी पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के इशारे पर स्थानीय प्रशासन निर्दलीय प्रत्याशियों पर अनुचित दबाव बना रहा है। आर्यन जुबेर खान के अनुसार, सत्ताधारी पार्टी निकाय चुनावों में अपना बोर्ड बनाने की होड़ में प्रशासनिक मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्दलीय पार्षद अपनी व्यक्तिगत सहमति और इच्छा से कांग्रेस पार्टी के साथ बाड़ेबंदी में ठहरा हुआ है, तो पुलिस का जबरन रिसॉर्ट में घुसकर उसे ले जाने का प्रयास करना पूरी तरह से गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिसॉर्ट में मौजूद सभी प्रत्याशी बिना किसी भय या दबाव के अपनी इच्छा से ठहरे हुए हैं, इसलिए पुलिस की यह कार्रवाई केवल राजनीतिक दबाव बनाने का एक जरिया मात्र है।
जयपुर के तुंगा से लेकर अलवर तक बाड़ेबंदी विवाद की पृष्ठभूमि
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में बाड़ेबंदी को लेकर पुलिस और नेताओं के बीच टकराव का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले शुक्रवार को जयपुर जिले के तुंगा क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में भी इसी तरह का विवाद देखने को मिला था। वहां जारी कांग्रेस की बाड़ेबंदी में वन विभाग के अधिकारी, पुलिसकर्मी और सत्ताधारी दल से जुड़े लोग अचानक पहुंच गए थे। आरोप है कि उस घटना के दौरान तुंगा रिसॉर्ट से एक निर्दलीय प्रत्याशी को निकालकर पुलिस और प्रशासन के लोग अपने साथ अलवर ले आए थे। तुंगा की घटना के तुरंत बाद अब अकबरपुर के धवाला रिसॉर्ट में पुलिस की इस कार्रवाई से राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है। इन दोनों लगातार घटी घटनाओं से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि निकाय चुनावों के नतीजों से पहले निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच किस कदर रस्साकशी जारी है।
14 सितंबर को आने वाले नतीजों से पहले निर्दलियों की बढ़ी अहमियत
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होने वाली है। मतगणना की तारीख नजदीक आने के साथ ही स्थानीय निकायों में अपना बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव परिणामों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका बेहद निर्णायक साबित होने वाली है। इसी गणित को ध्यान में रखते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपने समर्थक और निर्दलीय प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी का सहारा ले रहे हैं। चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले प्रत्याशियों की घेराबंदी और उन्हें अपने पाले में लाने की यह खींचतान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।



















