संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) की तैयारी करने वाले देश भर के लाखों अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल बार-बार उठता है कि क्या आईएएस बनने के लिए फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना या लिखना अनिवार्य है। विशेष रूप से हिंदी माध्यम या प्रांतीय भाषाओं से पढ़े-लिखे छात्र अंग्रेजी में पकड़ कमजोर होने के कारण खुद को प्रतिस्पर्धी दौर से बाहर मान लेते हैं। हालांकि, सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। संघ लोक सेवा आयोग उम्मीदवार के प्रशासनिक ज्ञान, विश्लेषणात्मक सोच, स्थिति के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता और दृष्टिकोण का परीक्षण करता है, न कि उसकी अंग्रेजी भाषा की महारत का। संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में अभ्यर्थियों को यह प्रतिष्ठित परीक्षा देने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
यूपीएससी सिविल सेवा में भाषा का असली गणित
इस धारणा में कोई सच्चाई नहीं है कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा केवल अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए ही बनी है। हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का चुनाव करके न केवल परीक्षा पास करते हैं, बल्कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसे प्रतिष्ठित पदों पर शीर्ष रैंक हासिल करते हैं। आयोग का स्पष्ट सिद्धांत है कि प्रशासनिक पद के लिए भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है, योग्यता का मापदंड नहीं। मुख्य परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी निबंध का पेपर, सामान्य अध्ययन (जीएस) के चारों पेपर और अपने ऐच्छिक विषय (ऑप्शनल) के दोनों पेपर हिंदी या अपनी पसंदीदा भाषा में लिख सकते हैं। इसके अलावा, इंटरव्यू चरण में भी अभ्यर्थियों को हिंदी भाषा का बोर्ड चुनने का अवसर मिलता है। यदि इंटरव्यू बोर्ड का कोई सदस्य अंग्रेजी में प्रश्न पूछता है, तो वहां दुभाषिये (ट्रांसलेटर) की पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
अनिवार्य अंग्रेजी पेपर का संपूर्ण ढांचा
मुख्य परीक्षा में भले ही सभी प्रमुख पेपर हिंदी में लिखे जा सकते हों, लेकिन यूपीएससी की चयन प्रक्रिया में एक अनिवार्य अंग्रेजी का पेपर शामिल किया गया है। यह कंपल्सरी इंग्लिश पेपर कुल 300 अंकों का होता है। हालांकि, अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि यह केवल एक क्वॉलिफाइंग पेपर है, जिसका अर्थ है कि इसमें प्राप्त अंक अंतिम मेरिट सूची बनाने में नहीं जोड़े जाते। इस पेपर में सफल होने के लिए अभ्यर्थी को न्यूनतम 25 प्रतिशत अंक यानी 300 में से केवल 75 अंक हासिल करने होते हैं। इस प्रश्नपत्र का स्तर बहुत ही बुनियादी होता है, जो 8वीं से 10वीं कक्षा के व्याकरण और भाषा ज्ञान के समकक्ष माना जाता है। इसमें मुख्य रूप से पैसेज आधारित प्रश्न, संक्षेपण (प्रेसिस राइटिंग), निबंध, अंग्रेजी से हिंदी तथा हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद, और बुनियादी व्याकरण जैसे विलोम व पर्यायवाची शब्द पूछे जाते हैं।
क्वालिफाइंग इंग्लिश पेपर की तैयारी की सटीक रणनीति
300 अंकों के इस अनिवार्य अंग्रेजी पेपर में 75 अंक लाना कोई कठिन काम नहीं है। सही दिशा में थोड़ी सी तैयारी सेइसे आसानी से क्रैक किया जा सकता है। परीक्षा पैटर्न के अनुसार, इसमें 100 अंकों का अपठित गद्यांश (पैसेज) और 60 अंकों का एक छोटा निबंध आता है। यदि अभ्यर्थी केवल पैसेज और निबंध का सही ढंग से अभ्यास कर ले, तो वह आसानी से 75 से 80 अंक प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा 10वीं कक्षा स्तर के बेसिक ग्रामर नियमों, जैसे टेंस, प्रिपोजिशन और वाक्य सुधार का अभ्यास करके स्कोर को और सुरक्षित किया जा सकता है। जो अभ्यर्थी अंग्रेजी में बहुत कमजोर हैं, उन्हें पिछले 5 वर्षों के यूपीएससी क्वॉलिफाइंग इंग्लिश प्रश्नपत्रों को स्वयं हल करने की सलाह दी जाती है। इससे परीक्षा के पैटर्न की समझ बनती है और मन का अनजाना डर हमेशा के लिए दूर हो जाता है।
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों में अक्सर द हिंदू या द इंडियन एक्सप्रेस जैसे अंग्रेजी अखबार न पढ़ पाने की वजह से घबराहट देखने को मिलती है। हालांकि, इसके लिए चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। बाजार में दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण जैसे प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक समाचार पत्र उपलब्ध हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की विस्तृत कवरेज प्रदान करते हैं। इसके साथ ही दृष्टि आईएएस या विजन आईएएस जैसी प्रमुख अकादमियों द्वारा हर महीने हिंदी में प्रकाशित होने वाली करेंट अफेयर्स पत्रिकाओं से पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी आसानी से की जा सकती है। पढ़ाई के दौरान सामने आने वाले कठिन अंग्रेजी शब्दों के सही अर्थ समझने के लिए गूगल ट्रांसलेट या किसी भी फ्री ऑनलाइन डिक्शनरी ऐप का उपयोग किया जा सकता है। एक कुशल आईएएस अधिकारी के रूप में आपकी सोच, व्यावहारिक समझ और नीतियों के सटीक क्रियान्वयन का महत्व है, न कि भारी-भरकम अंग्रेजी शब्दावली का।



















