पारंपरिक खानपान की सादगी और मिट्टी की सौंधी खुशबू का आनंद लेना हो, तो बस्तर की रसोई में बनने वाली मौसमी सब्जियों का रसा एक बेहतरीन उदाहरण है। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में रखिया बड़ी के साथ आलू, बैंगन और मूंगा (सहजन) को मिलाकर बेहद सादे मसालों में एक खास देसी रसेदार सब्जी पकाई जाती है। इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आज भी पारंपरिक रूप से आग पर रखे मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है। हल्की आंच और मिट्टी की हांडी के मेल से सब्जियों का स्वाभाविक रस और बड़ी का तीखापन आपस में मिलकर बेहद लाजवाब जायका तैयार करते हैं।
रसोई के लिए जरूरी सामग्री और सही माप
इस पारंपरिक करी को बनाने के लिए किसी भारी-भरकम मसाले या जटिल तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती। इसे तैयार करने के लिए मुख्य सामग्रियों की सूची इस प्रकार है
- मुख्य सब्जियां और बड़ी: दो रखिया बड़ी, दो कटे हुए मध्यम आलू, दो कटे हुए बैंगन और दो कटी हुई मूंगा (सहजन की फलियां)।
- तड़का और मसाले: दो मिर्च, कटी हुई प्याज, कटे हुए टमाटर, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक।
- अन्य सामग्री: भूनने के लिए तेल और तरी बनाने के लिए एक गिलास पानी।
मिट्टी के बर्तन में पकाने की पारंपरिक विधि
इस व्यंजन को पकाने की शुरुआत मिट्टी के बर्तन को चूल्हे या आग पर चढ़ाकर की जाती है। सबसे पहले मिट्टी की हांडी में तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। तेल के गर्म होते ही इसमें सूखी मिर्च और बारीक कटी हुई प्याज डालकर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भूनें। प्याज के भुन जाने पर बर्तन में रखिया बड़ी, कटे हुए आलू, बैंगन और मूंगा की फलियों को एक साथ डालकर पकाया जाता है, ताकि बड़ी और कड़े टुकड़े तेल के साथ अच्छी तरह सिक जाएं।
सब्जियों के थोड़े नरम पड़ते ही इसमें कटे हुए टमाटर शामिल किए जाते हैं। टमाटर के साथ ही हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मिश्रण को कुछ देर तक लगातार भूना जाता है, जिससे मसालों का कच्चापन खत्म हो जाए और टमाटर पूरी तरह गल जाएं। जब सारी सामग्रियां अच्छी तरह भुन जाएं, तब इसमें तरी के लिए एक गिलास पानी डाला जाता है। इसके बाद हांडी को धीमी आंच पर तब तक उबलने दिया जाता है जब तक कि रसा गाढ़ा न हो जाए और सहजन व बड़ी पूरी तरह पक न जाएं। आंच से उतारने के बाद यह गरमागरम देसी रसेदार सब्जी खाने के लिए तैयार हो जाती है, जिसे रोटी या उबले चावल के साथ बेहद चाव से खाया जाता है।



















