छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कंपनी गार्डन परिसर में सुबह की सैर हो या शाम की गपशप, गरमा-गरम चाय की चुस्कियां लोगों के अनुभव को खास बना देती हैं। यहां चाय की एक छोटी दुकान चलाने वाले राजेश गुप्ता, जिन्हें लोग गुड्डू भैया के नाम से जानते हैं, अपनी ताज़ातरीन चाय के लिए पूरे इलाके में पहचान बना चुके हैं। उनकी कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह कभी भी चाय पहले से पकाकर केतली या बर्तन में भरकर नहीं रखते। जैसे ही कोई ग्राहक दुकान पर पहुंचता है, जरूरत के अनुसार उसी समय ताज़ा चाय पकाई जाती है और एकदम गर्म स्थिति में पेश की जाती है।
सीधी रेसिपी और हर कप में ताज़गी का नियम
गुड्डू भैया बताते हैं कि उनकी चाय में किसी भी तरह के बनावटी या जटिल मसालों का इस्तेमाल नहीं होता। वह दूध, चीनी, चायपत्ती और ताज़ा अदरक के सीधे मेल से ही चाय तैयार करते हैं। उनकी दुकान पर साल के बारहों महीने सिर्फ अदरक वाली चाय ही बनती और बिकती है। जब भी कोई चाय मांगता है, तो उसकी आंखों के सामने ही अदरक को कूटकर खौलते पानी और दूध में डाला जाता है। यही साफ-सुथरा और सीधा तरीका ग्राहकों के भरोसे की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।
छात्रों से लेकर दूर-दराज के शहरों से आए सैलानियों का जमावड़ा
कंपनी गार्डन में नियमित रूप से सैर करने आने वाले स्थानीय नागरिकों के अलावा आसपास के शैक्षणिक संस्थानों के युवा भी यहां रोज खिंचे चले आते हैं। बिलासपुर के विभिन्न कॉलेजों और सिम्स (SIMS) चिकित्सा संस्थान से जुड़े छात्र सुबह और शाम के वक्त यहां बड़ी तादाद में जुटते हैं। इसके साथ ही व्यापार या पर्यटन के सिलसिले में जबलपुर, इंदौर और मुंबई जैसे बड़े शहरों से बिलासपुर आने वाले लोग भी जब कंपनी गार्डन पहुंचते हैं, तो यहां की चाय का स्वाद चखना नहीं भूलते। कई आगंतुक दोबारा शहर आने पर खास तौर पर इस दुकान की तलाश करते हुए पहुंचते हैं। लॉकडाउन के बाद से इस दुकान पर आने वाले ग्राहकों का सिलसिला लगातार मजबूत होता चला गया है।
रोजाना 40 लीटर दूध की खपत और कारोबार का समय
यह चाय की दुकान दिन में दो अलग-अलग पारियों में संचालित होती है। सुबह के समय यह तड़के करीब 4:30 बजे खुल जाती है और 11 बजे तक चलती है, जो मॉर्निंग वॉक करने वालों और सुबह के यात्रियों के लिए बेहद मुफीद समय है। इसके बाद दोपहर का विश्राम लेकर दुकान शाम को 4 बजे दोबारा खुलती है और रात 9 बजे तक चलती है। दोनों ही समय दुकान पर चाय के कद्रदानों की खासी भीड़ देखी जाती है। इसी निरंतर मांग के चलते यहां प्रतिदिन लगभग 40 लीटर दूध की खपत आसानी से हो जाती है।
दैनिक बचत और ग्राहकों का अपना अनुभव
सामग्री, दूध और दुकान से जुड़े सभी अनिवार्य खर्चों को अलग करने के बाद गुड्डू भैया को प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 रुपये तक की शुद्ध बचत हाथ लग जाती है। यह उद्यम न केवल उनके परिवार की नियमित आजीविका का ठोस आधार बना हुआ है, बल्कि ग्राहकों के जुड़ाव ने उन्हें एक सम्मानित पहचान भी दी है। वहां चाय पीने पहुंचे ओनकार नामक एक ग्राहक ने बताया कि पहले से बनी रखी बासी चाय न देना ही इस दुकान को सबसे अलग बनाता है। ओनकार के अनुसार, हर बार सामने कूटी गई अदरक से चाय में जो कड़कपन और खुशबू आती है, उसी की वजह से उनके कई साथी भी बार-बार यहां चाय पीने आते हैं। कंपनी गार्डन की यह साधारण सी दुकान अपनी इसी सादगी और स्वाद के बल पर एक लोकप्रिय ठिकाना बन चुकी है।





















