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बस्तर में आयस्तर मशरूम की खेती से किसानों को कम लागत में बड़ा फायदाछत्तीसगढ़
14 सित॰ 2026, 3:20 pm (1 घंटे पहले)· 0

बस्तर में आयस्तर मशरूम की खेती से किसानों को कम लागत में बड़ा फायदा

बस्तर के अनुकूल मौसम में किसान आयस्तर मशरूम उगाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। कम भूसे और छोटे कमरे से शुरू होने वाली इस खेती के लिए सस्ते बीज शहीद गुंडाधुर कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध हैं।

बस्तर का सुहावना मौसम आयस्तर मशरूम की खेती के लिए काफी अनुकूल साबित हो रहा है। स्थानीय बाजारों, होटलों और रेस्टोरेंटों में मशरूम की लगातार बढ़ती मांग के कारण किसान इसे अपनी आय बढ़ाने के एक बेहतरीन साधन के रूप में अपना रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवसाय कम लागत और सीमित जोखिम में बेहतर मुनाफा देने वाला विकल्प है।

मशरूम उगाने की आसान और चरणबद्ध विधि

आयस्तर मशरूम की खेती के लिए किसी जटिल उपकरण की जरूरत नहीं होती। इसमें मुख्य रूप से गेहूं या धान के भूसे का उपयोग किया जाता है। खेती की शुरुआत करने के लिए भूसे को रातभर पानी में अच्छी तरह भिगोया जाता है। अगले दिन पानी निकालकर भूसे को तब तक सुखाया जाता है जब तक कि उसमें लगभग 70 प्रतिशत नमी न रह जाए। फफूंद के सही विकास के लिए भूसे में नमी का यह स्तर बहुत जरूरी माना जाता है।

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सही नमी हासिल होने के बाद भूसे में बीज भरकर उसे पॉलीथिन के बैग में कसकर पैक कर दिया जाता है। इसके बाद बैग्स को किसी ठंडी और छायादार जगह पर रख दिया जाता है। लगभग 25 से 30 दिनों में फफूंद पूरे बैग में फैल जाती है और मशरूम तुड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।

तापमान प्रबंधन और बीमारियों से बचाव

आयस्तर मशरूम की अच्छी उपज के लिए सही तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए सबसे उपयुक्त तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस माना जाता है, हालांकि 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। खेती के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखने पर ट्राइकोडर्मा नामक हानिकारक फफूंद का प्रकोप हो सकता है। यह बीमारी तब फैलती है जब भूसे को सही तरीके से तैयार या उपचारित नहीं किया जाता।

कृषि वैज्ञानिक प्रहलाद नेताम का कहना है कि नए किसानों को बड़े पैमाने पर शुरुआत करने की जरूरत नहीं है। किसान महज दो से तीन किलो भूसे का इस्तेमाल करके भी इस खेती का अनुभव हासिल कर सकते हैं।

सस्ते बीज की उपलब्धता और बिक्री के साधन

किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज आसानी से मिल सकें, इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था मौजूद है। किसान शहीद गुंडाधुर कृषि विश्वविद्यालय से मशरूम का बीज प्राप्त कर सकते हैं, जहां एक पाव बीज लगभग 30 रुपये की किफ़ायती दर पर उपलब्ध है।

इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती। किसान अपने घर के किसी खाली कमरे, शेड या छोटे से ढके हुए स्थान में भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं। तैयार मशरूम को स्थानीय सब्जी मंडियों, आसपास के होटलों और रेस्टोरेंटों में सीधे बेचकर किसान हर महीने अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

आयस्तर मशरूम उगाने के लिए कितना तापमान चाहिए?
इसके लिए सबसे उपयुक्त तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस है, हालांकि 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान भी उपयुक्त रहता है।
बस्तर में किसान मशरूम का बीज कहां से खरीद सकते हैं?
किसान शहीद गुंडाधुर कृषि विश्वविद्यालय से लगभग 30 रुपये में एक पाव (250 ग्राम) बीज प्राप्त कर सकते हैं।
मशरूम की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
पॉलीथिन बैग में बीज भरने के बाद लगभग 25 से 30 दिनों में फफूंद फैल जाती है और मशरूम तैयार हो जाता है।
मशरूम बैग में किस बीमारी का खतरा रहता है?
यदि भूसे का सही उपचार न किया जाए तो ट्राइकोडर्मा नामक फफूंद का प्रकोप हो सकता है।
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