तीज का पर्व नजदीक आते ही घरों में पारंपरिक और लजीज व्यंजनों की महक फैलने लगती है। इस विशेष अवसर पर महिलाएं ऐसे पकवान बनाना पसंद करती हैं जिनमें स्वाद के साथ-साथ पुरानी संस्कृति की झलक भी दिखाई दे। यदि आप भी इस तीज पर कुछ अनोखा और पारंपरिक बनाने की सोच रही हैं, तो दाल बड़ा की खट्टी सब्जी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। कुरकुरे दाल के वड़े और तीखी-खट्टी ग्रेवी का मेल इसे सामान्य सब्जियों से बिल्कुल अलग बनाता है। ग्रामीण अंचलों की रसोई में बनने वाली यह पुरानी रेसिपी आज भी लोगों को उनके बचपन और घर के असली जायके की याद ताजा करा देती है।
तीज के पर्व पर खास महत्व रखती है दाल बड़ा सब्जी
तीज जैसे सांस्कृतिक त्योहारों पर घरेलू खानपान का एक अलग ही आनंद होता है। दाल बड़ा की खट्टी सब्जी भी इसी श्रेणी का एक प्रमुख व्यंजन है, जिसे बहुत कम सामग्री के साथ बेहद स्वादिष्ट तरीके से बनाया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें दाल से तैयार किए गए कुरकुरे वड़े और मसालेदार-खट्टा शोरबा मिलकर खाने के स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं।
ग्रामीण संस्कृति से जुड़ी है इस रेसिपी की पुरानी विरासत
पुराने समय में गांवों के भीतर किसी भी बड़े उत्सव या खास मेहमान के आगमन पर घर की महिलाएं विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान तैयार करती थीं। दाल बड़ा भी उन्हीं व्यंजनों में शुमार था। आज के आधुनिक खानपान और फास्ट फूड के इस दौर में भी इस तरह के पारंपरिक स्वाद लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं और सभी को खूब भाते हैं।
अरहर या मूंग दाल से बनाए जाते हैं कुरकुरे वड़े
इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए अरहर या मूंग की दाल को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रखा जाता है और फिर उसे दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद पिसी हुई दाल में स्वादानुसार नमक, हींग और बारीक कटा हरा धनिया मिलाकर छोटे-छोटे वड़े तैयार किए जाते हैं। फिर इन्हें कड़ाही में तेल के अंदर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तला जाता है। यही वड़े अंत में खट्टे-चटपटे मसालेदार शोरबे में पकाए जाते हैं।
खट्टी और मसालेदार ग्रेवी बढ़ा देती है जायका
दाल बड़ा की इस विशेष सब्जी की असली ताकत इसकी ग्रेवी होती है। सबसे पहले तेल में जीरा, राई, हींग और करी पत्ते का बघार दिया जाता है, जिसके बाद प्याज, टमाटर, अदरक और लहसुन को अच्छी तरह भूना जाता है। इसके अंदर हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक मिलाकर एक बेहतरीन मसाला तैयार किया जाता है। सब्जी के स्वाद को खट्टापन देने के लिए आवश्यकतानुसार खटाई या इमली का प्रयोग किया जाता है।
परम परोसने का सही तरीका और खाने का आनंद
जब स्वादिष्ट ग्रेवी पूरी तरह तैयार हो जाती है, तब इसमें पहले से तले हुए दाल के वड़ों को मिला दिया जाता है और धीमी आंच पर कुछ देर पकने दिया जाता है ताकि वड़े मसालों के स्वाद को अच्छी तरह अपने अंदर सोख लें। अंत में ऊपर से ताजा हरा धनिया डालकर इसे गरमागरम परोसा जाता है। तीज के इस पावन अवसर पर यह सब्जी रोटी, चावल या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ थाली की रौनक और स्वाद दोनों को बढ़ा देती है।
स्वाद के साथ संस्कृति भी रहती है जीवित
दाल बड़ा की खट्टी सब्जी केवल एक भोजन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण खानपान से जुड़ी एक स्वादिष्ट परंपरा का प्रतीक है। त्योहारों के इस खास मौके पर इस तरह के व्यंजनों को पकाना नई पीढ़ी को उनके पुराने स्वाद और पारंपरिक भोजन शैली से जोड़ने का एक बहुत ही शानदार माध्यम बन सकता है।



















