बस्तर अंचल के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली केके रेल लाइन पर भीषण भूस्खलन के चलते ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह चरमरा गया है। 24 सितंबर से इस रेलमार्ग पर यातायात रुका हुआ है, जहां मल्लीगुड़ा और क्षत्रिपुट स्टेशनों के बीच पहाड़ दरकने से भारी तबाही मची है। मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई बाढ़ के कारण लगभग 3 किलोमीटर लंबा रेल ट्रैक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। इस आपदा के बाद सुरक्षा को देखते हुए न केवल यात्री गाड़ियों को रोका गया है, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही पर भी पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
युद्धस्तर पर जारी है ट्रैक मरम्मत और मलबा हटाने का काम
आपदा स्थल पर स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहां रेलवे प्रशासन भारी मशीनरी और विशेषज्ञ कर्मचारियों के साथ दिन-रात राहत और पुनर्निर्माण कार्य में जुटा हुआ है। अंधेरा घिरने के बाद रात में भी शक्तिशाली लाइटों की व्यवस्था करके काम जारी रखा जा रहा है। कई जेसीबी मशीनों और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के जरिए ट्रैक पर पसरा भारी मलबा हटाया जा रहा है और उखड़े हुए ट्रैक को नए सिरे से बिछाने का प्रयास चल रहा है। मौके पर रेलवे के सैकड़ों कर्मचारी और वरिष्ठ अधिकारी लगातार डेरा डाले हुए हैं ताकि जल्द से जल्द मार्ग को दुरुस्त किया जा सके।
यात्रियों की परेशानी और माल ढुलाई पर गहरा असर
केके रेलमार्ग के ठप होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगदलपुर से संचालित होने वाली सभी 5 पैसेंजर ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया है। बस्तर से अन्य राज्यों के लिए रोजाना आवागमन करने वाले लगभग 3 हजार यात्री इस रुकावट से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। अचानक ट्रेनें रद्द होने की वजह से यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए वैकल्पिक सड़क परिवहन और निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यात्री गाड़ियों के अलावा माल ढुलाई पूरी तरह रुकने से क्षेत्रीय व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
वित्तीय घाटा और सेवा बहाली में लगने वाला समय
इस प्राकृतिक आपदा से रेलवे को भारी वित्तीय आघात लगा है। परिचालन ठप होने और माल लदान रुक जाने के कारण रेलवे को रोजाना करीब 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मरम्मत में जुटे तकनीकी दल के अनुसार, 3 किलोमीटर के दायरे में ट्रैक और जमीन को जिस स्तर का नुकसान पहुंचा है, उसे पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए जगदलपुर तक यात्री ट्रेन सेवाएं अगले लगभग 10 दिनों तक और बंद रहने की संभावना जताई गई है। रेलवे का प्राथमिक जोर सुरक्षा मानकों के साथ ट्रैक की मजबूती सुनिश्चित करने पर है, ताकि यातायात बहाली के बाद कोई खतरा न रहे।



















