बिलासपुर शहर के बीचों-बीच या विकसित रिहायशी कॉलोनियों में जमीन खरीदकर घर बनाना आम परिवारों के बजट से बाहर होता जा रहा है। मुख्य शहर में प्रॉपर्टी के ऊंचे दामों को देखते हुए अब लोग शहर से सटे विकासशील इलाकों का रुख कर रहे हैं। शहर की सीमा से लगी नई कॉलोनियों और आउटर क्षेत्रों में मध्यम वर्ग की जरूरतों और बजट के मुताबिक जमीन के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने के कारण नया मकान बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए ये इलाके मुफीद साबित हो रहे हैं।
प्रॉपर्टी के मौजूदा रेट और बजट का हिसाब
बिलासपुर में प्रॉपर्टी बाजार के मौजूदा रुझानों पर नजर डालें तो विभिन्न इलाकों में जमीन की कीमतें सुविधाओं और कनेक्टिविटी के आधार पर तय हो रही हैं। बिलासपुर के स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर अखिलेश तिवारी का कहना है कि शहर से लगे आउटर इलाकों में जमीन की दरें मुख्य रूप से 800 रुपये से लेकर 1800 रुपये प्रति वर्ग फीट तक देखी जा रही हैं। औसत और लोकप्रिय लोकेशन पर प्लॉट के दाम 800 से 1500 रुपये प्रति वर्ग फीट के आसपास हैं, जबकि बेहतर कनेक्टिविटी और विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर वाले टुकड़ों के लिए रेट 1600 से 1800 रुपये प्रति वर्ग फीट या उससे ज्यादा भी पहुंच जाते हैं।
जो लोग शुरुआती निवेश या भविष्य में अपना घर बनाने के मकसद से जमीन खोज रहे हैं, उनके लिए 13 लाख से 15 लाख रुपये के बजट में भी प्लॉट मिलने की संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि, किसी भी प्लॉट का अंतिम सौदा उसकी सही लोकेशन, प्लॉट के सामने सड़क की चौड़ाई, आसपास हुए विकास और उपलब्ध बिजली व पानी की सुविधाओं पर निर्भर करता है।
सस्ते प्लॉट के लिए कौन से इलाके हैं प्रमुख?
शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों से थोड़ी दूरी पर स्थित कई ऐसे इलाके हैं, जहां तेजी से नई बसाहट देखने को मिल रही है। अखिलेश तिवारी के मुताबिक बहतराई, बिजौर, बिरकोना, खमतराई, चिलहाटी और मोपका जैसे इलाकों में अलग-अलग साइज और बजट के हिसाब से जमीन के विकल्प मौजूद हैं। बहतराई के आसपास, बिरकोना रोड और चिलहाटी-मोपका बेल्ट में 800 से 1500 रुपये प्रति वर्ग फीट के ब्रैकेट में प्लॉट तलाशे जा सकते हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहां पिछले कुछ सालों में सड़कों का नेटवर्क सुधरा है और नए मकान लगातार बन रहे हैं।
1000 वर्गफीट प्लॉट पर घर बनाने का कुल खर्च
जमीन खरीदने के अलावा मकान निर्माण का कुल बजट समझना भी बेहद जरूरी है। अखिलेश तिवारी बताते हैं कि यदि कोई मध्यमवर्गीय परिवार 1000 वर्गफीट का प्लॉट खरीदता है, तो जमीन और निर्माण मिलाकर लगभग 30 लाख से 35 लाख रुपये के कुल बजट में एक अच्छा मकान तैयार किया जा सकता है। इसमें निर्माण की लागत इस बात पर निर्भर करेगी कि घर का नक्शा कैसा है, किस गुणवत्ता की निर्माण सामग्री इस्तेमाल की जा रही है और फिनिशिंग में किस तरह की सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।
TNC, RERA और कानूनी कागजातों की जांच बेहद जरूरी
सस्ती जमीन के विज्ञापन देखकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में भारी पड़ सकता है। किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले उसके कागजी पहलुओं की मुकम्मल पड़ताल जरूरी है। यदि कोई प्लॉट स्वीकृत टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) या रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) से मंजूर परियोजना का हिस्सा है, तो वहां विकास शुल्क और अन्य आंतरिक सुविधाओं की वजह से लागत में अंतर हो सकता है।
इसी तरह रीसेल यानी पहले से बिक चुके प्लॉट्स की खरीद-बिक्री में भी दरों का अंतर देखने को मिलता है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे मौके पर जाकर जमीन की वास्तविक स्थिति देखें। जमीन का मालिकाना हक, खसरा-खतौनी, लेआउट की मंजूरी, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और पटवारी रिकॉर्ड की जांच किसी विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से कराने के बाद ही कोई बयाना या वित्तीय लेनदेन करें।
विकासशील क्षेत्रों में क्यों बढ़ती हैं कीमतें?
शहर के आउटर इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ ही जमीन के दामों में उछाल आता है। जिन क्षेत्रों में पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज लाइन और नए सरकारी प्रोजेक्ट्स की पहुंच होती है, वहां संपत्तियों का मूल्यांकन तेजी से बढ़ता है। हालांकि, अखिलेश तिवारी का मानना है कि भविष्य में जमीन के दाम किस गति से बढ़ेंगे, इसकी कोई तय गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन व्यवस्थित विकास वाले इलाकों में प्रॉपर्टी वैल्यू हमेशा बेहतर रिटर्न देती है।



















