बस्तर जिले में बीते तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर से लेकर देहात तक कई रिहायशी बस्तियों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। सड़कों और गलियों में सैलाब जैसा मंजर दिखने के कारण स्थानीय नागरिकों को अपने डूबते मकान छोड़कर सुरक्षित ठिकानों का रुख करना पड़ रहा है। हालात बिगड़ते देख स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए मोर्चा संभाल लिया है।
इंद्रावती नदी का पानी बस्तियों में घुसा, 9 राहत शिविर सक्रिय
लगातार वर्षा के चलते इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है और नदी का पानी कई रिहायशी इलाकों के मकानों में प्रवेश कर चुका है। पानी का स्तर कमर तक पहुंच जाने से निचले इलाकों में भारी तबाही देखने को मिल रही है। प्रशासन ने आपातकालीन प्रबंध करते हुए बस्तर जिले के अलग-अलग हिस्सों में कुल नौ राहत शिविर स्थापित किए हैं। बाढ़ के पानी में घिरे प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालकर इन केंद्रों में पहुंचाया जा रहा है। अब तक 353 से ज्यादा ग्रामीण इन आश्रय स्थलों पर अपनी आमद दर्ज करा चुके हैं, जबकि जलभराव वाले क्षेत्रों से लोगों का रेस्क्यू जारी होने की वजह से यह संख्या और बढ़ने के आसार हैं।
जगदलपुर के भगत सिंह स्कूल में 101 लोगों को मिला आश्रय
जगदलपुर शहर के चिमनीभट्टी इलाके में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं, जहां हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। चिमनीभट्टी से निकाले गए बाढ़ पीड़ितों के ठहरने की व्यवस्था भगत सिंह स्कूल में स्थापित राहत केंद्र में की गई है। इस अकेले केंद्र में फिलहाल 101 ग्रामीण शरण लिए हुए हैं, जहां उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए बचाव दल लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
सामान निकालने की भी नहीं मिली मोहलत, मकानों में आई दरारें
बाढ़ के अचानक दस्तक देने से ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चिमनीभट्टी निवासी लक्ष्मी बघेल ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके मकान के भीतर एकाएक पानी भर गया, जिसके चलते उन्हें अपने मासूम बच्चों को साथ लेकर फौरन बाहर की तरफ भागना पड़ा। उन्हें घर का कोई भी सामान सुरक्षित बाहर निकालने का वक्त नहीं मिल सका और पूरी गृहस्थी जलमग्न हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि रात से उन्होंने भोजन तक नहीं किया था।
इसी इलाके के एक अन्य निवासी कमन कश्यप ने बताया कि इंद्रावती नदी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में उनके मकान के भीतर कमर तक पानी जमा हो गया। वे किसी तरह अपनी जान बचाते हुए रात लगभग 12 बजे राहत शिविर में दाखिल हुए। उन्होंने बताया कि पानी के तेज दबाव और ठहराव की वजह से उनके घर को भारी क्षति पहुंची है और दीवारों में गहरी दरारें भी पड़ गई हैं।
अगले दिन भी भारी बारिश का अलर्ट
बाढ़ और जलभराव से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। मौसम विभाग ने बस्तर जिले में अगले दिन भी जोरदार बारिश का अंदेशा जताया है। इंद्रावती नदी के बढ़ते दबाव और नए इलाकों में पानी के प्रसार को देखते हुए प्रशासनिक अमले को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।





















