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बिलासपुर में कस्टोडियल डेथ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मजदूर महिला की लड़ाई पर दिए 25 लाख रुपये और सीबीआई जांच के निर्देशछत्तीसगढ़
26 अक्तू॰ 2026, 9:49 am (31 मिनट पहले)· 1

बिलासपुर में कस्टोडियल डेथ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मजदूर महिला की लड़ाई पर दिए 25 लाख रुपये और सीबीआई जांच के निर्देश

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस हिरासत में पति की मौत के बाद खेतों में मजदूरी करने वाली लेहरा बाई ने सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी जंग लड़ी, जहां अदालत ने 25 लाख रुपये अंतरिम राहत और सीबीआई जांच का आदेश दिया।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रहने वाली एक दिहाड़ी मजदूर महिला ने अपने पति की पुलिस हिरासत में हुई मौत के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़कर देश की सर्वोच्च अदालत से इंसाफ हासिल किया है। बिलासपुर जिले के मोह्रा गांव की रहने वाली पैंतीस वर्षीय लेहरा बाई कभी औपचारिक शिक्षा के लिए स्कूल नहीं जा सकीं। वह अपने परिवार का पेट पालने और दो नाबालिग बेटियों की परवरिश के लिए खेतों में मजदूरी करती हैं, जहां उन्हें रोजाना करीब 300 रुपये मजदूरी मिलती है और वह भी हर दिन काम उपलब्ध नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने व्यवस्था के सामने घुटने टेकने के बजाय अपने पति की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की ठान ली और इस मामले को देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट तक ले गईं।

शराब जब्ती का आरोप और पुलिस हिरासत की घटना

यह पूरा मामला जनवरी 2024 में शुरू हुआ था। मोह्रा गांव में 18 जनवरी 2024 को सिपत थाने की पुलिस ने लेहरा बाई के 34 वर्षीय पति श्रवण सूर्यवंशी तामरे को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की ओर से उन पर छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अवैध महुआ शराब रखने का मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस के दावों के अनुसार, उनके पास से 6 लीटर महुआ शराब बरामद की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1200 रुपये बताई गई थी। लेहरा बाई के अनुसार पुलिस दल उनके पति को जबरन अपने वाहन में बैठाकर ले गया था। उस वक्त परिवार को लगा था कि सामान्य मामलों की तरह पूछताछ या औपचारिक कार्रवाई के बाद वह एक या दो दिन के भीतर घर लौट आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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अस्पताल में भर्ती और पोस्टमार्टम के खुलासे

गिरफ्तारी के तीन दिन बाद, यानी 21 जनवरी की देर रात को परिजनों को सूचना दी गई कि श्रवण की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है। सूचना मिलते ही परिजन तुरंत अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें श्रवण से मिलने नहीं दिया। कुछ ही समय बाद परिजनों को श्रवण की मौत की दुखद खबर दी गई। चिकित्सालय के औपचारिक दस्तावेजों में मौत का समय 22 जनवरी की सुबह 6 बजे दर्ज किया गया। बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया। रिपोर्ट में साफ उल्लेख था कि सिर में लगी गंभीर चोट और उससे पैदा हुई शारीरिक जटिलताओं की वजह से कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट हुआ। इसके अलावा शव परीक्षण में शरीर पर कई अन्य चोटों के निशान भी दर्ज किए गए थे।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी जंग

श्रवण की मौत के बाद अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे ने लेहरा बाई की बेबसी को देखते हुए बिना कोई फीस लिए उनका मुकदमा लड़ने का फैसला किया। अगस्त 2024 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई। दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही स्वीकार करते हुए लेहरा बाई को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। हालांकि, लेहरा बाई ने इस मामूली राशि को न्याय मानने से इनकार कर दिया और इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट द्वारा तय किए गए मुआवजे को बेहद अपर्याप्त करार दिया। पीठ ने इस बात पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि हिरासत में एक नागरिक की जान चले जाने के बावजूद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़िता को तुरंत 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा अदा करे।

शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर अदालत की फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), महानिदेशक जेल और प्रमुख सचिव (गृह) के आचरण पर बेहद तल्ख टिप्पणियां कीं। शीर्ष अधिकारियों द्वारा न्यायिक जांच रिपोर्ट की जानकारी न होने की दलील को अदालत ने पूरी तरह अस्वीकार्य माना। अदालत ने तत्कालीन डीजीपी के बयान को झूठा और निंदनीय बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसके साथ ही पीठ ने मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई करने का आदेश दिया। 13 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है, और इस मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी 2027 के लिए निर्धारित की गई है।

परिवार के अधूरे सपने और आगे की राह

लेहरा बाई पर अब अपनी दो बेटियों, तेरह वर्षीय संध्या और ग्यारह वर्षीय साक्षी, के लालन-पालन का पूरा जिम्मा है। लेहरा बताती हैं कि उनके पति बेटियों की पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थे और उनका सपना था कि दोनों बेटियां आगे चलकर डॉक्टर या कलेक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन करें। पति के चले जाने के बाद से घर में गंभीर आर्थिक संकट बना हुआ है। इस बीच श्रवण के पिता अमृतलाल ने भी अदालत द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे में हिस्सेदारी की मांग उठाई है। हालांकि, लेहरा बाई का कहना है कि उनकी प्राथमिक लड़ाई पैसों के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए थी, और अब दोषियों को कानून के तहत क्या सजा मिलती है, यह देखना प्रशासन और न्यायपालिका का काम है।

सवाल-जवाब

श्रवण सूर्यवंशी तामरे को पुलिस ने किस मामले में गिरफ्तार किया था?
उन्हें 18 जनवरी 2024 को सिपत थाना पुलिस ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत 6 लीटर महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
श्रवण की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का क्या कारण सामने आया?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर लगी गंभीर चोट और उससे जुड़ी जटिलताओं के चलते कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया, साथ ही शरीर पर अन्य चोटों का भी जिक्र था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या अहम फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया और मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंपते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई करने को कहा।
सीबीआई को जांच के लिए कितना समय दिया गया है और अगली सुनवाई कब होगी?
13 अक्टूबर की सुनवाई में सीबीआई को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मिला है, और मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी 2027 को तय की गई है।
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