छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी भर्ती घोटाले के मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पूरे प्रकरण में अब सभी की निगाहें अदालत के आने वाले अंतिम आदेश पर टिकी हुई हैं। सोनवानी पर सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरतने के आरोप हैं, जिनकी जांच केंद्रीय स्तर की जांच एजेंसियां कर रही हैं।
हाईकोर्ट में पूरी हुईं दोनों पक्षों की दलीलें
बिलासपुर हाईकोर्ट में टामन सिंह सोनवानी की जमानत अर्जी पर दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सभी पक्षों को सुना। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अदालत ने फिलहाल जमानत मंजूर करने या खारिज करने को लेकर कोई तात्कालिक फैसला नहीं सुनाया है और वह सभी कानूनी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर रही है।
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के गंभीर आरोप
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में सरकारी पदों पर चयन प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया के दौरान नियमों को ताक पर रखकर कुछ खास अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया था और पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। इन तमाम आरोपों की सत्यता और कानूनी वैधानिकता की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत लगातार जारी है।
अब अदालत के अंतिम आदेश का इंतजार
टामन सिंह सोनवानी की तरफ से दाखिल की गई जमानत याचिका पर सुनवाई का चरण पूरा होने के बाद अब हर किसी की नजरें कोर्ट के रुख पर हैं। अदालत का यह निर्णय मामले से जुड़े तमाम तथ्यों, पेश किए गए दस्तावेजों और मौजूदा कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगा। न्यायिक आदेश सामने आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि टामन सिंह सोनवानी को इस मामले में राहत मिलती है या उनकी जमानत याचिका को अदालत द्वारा खारिज किया जाता है।


















