शीर्ष अदालत ने राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को एक बड़ी राहत प्रदान की है। जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले के मामले में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। यह मामला राजस्थान पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस कानूनी कार्रवाई के दौरान एक अन्य आरोपी को भी अदालत से राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का फैसला
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने महेश जोशी की स्पेशल लीव पेटिशन यानी एसएलपी पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह आदेश पारित किया। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कुछ दिन पहले ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
प्रवर्तन निदेशालय के मामले से जुड़ा पुराना संदर्भ
महेश जोशी को इससे पहले केंद्रीय एजेंसी यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज किए गए धन शोधन के मामले में भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस मामले में लंबी हिरासत के बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें शीर्ष अदालत से नियमित जमानत प्राप्त हुई थी। उस दौरान अदालत ने उनकी लंबी कैद और आयु का संज्ञान लिया था।
एसीबी की गिरफ्तारी और ताजा घटनाक्रम
ईडी के मामले में राहत मिलने के कुछ समय पश्चात, 7 मई 2026 को राजस्थान एसीबी ने उन्हें जयपुर स्थित उनके आवास से फिर से हिरासत में ले लिया था। यह कार्रवाई नौ सौ करोड़ रुपये से अधिक के कथित टेंडर आवंटन और रिश्वतखोरी से जुड़े प्रकरण में की गई थी। इस गिरफ्तारी के बाद से वह लगातार हिरासत में थे। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से पूर्ण मुक्ति नहीं है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।























