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दिव्यांग आरक्षण विवाद में फंसी छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती, बिलासपुर अदालत ने लिखित परीक्षा रोकीछत्तीसगढ़
9 अक्तू॰ 2026, 10:07 pm (2 घंटे पहले)· 1

दिव्यांग आरक्षण विवाद में फंसी छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती, बिलासपुर अदालत ने लिखित परीक्षा रोकी

दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के कोटे में विसंगतियों को लेकर दायर याचिका पर बिलासपुर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए राज्य की शिक्षक भर्ती परीक्षा के आयोजन को फिलहाल स्थगित कर दिया है।

प्रदेश में सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों पर नियुक्ति की उम्मीद संजोए बैठे हजारों उम्मीदवारों को अदालती आदेश के बाद थोड़ा इंतजार करना होगा। बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित होने वाली लिखित परीक्षाओं पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र की अगुवाई वाली खंडपीठ ने यह फैसला भर्ती नियमों में दृष्टिहीन अभ्यर्थियों के आरक्षण प्रावधानों को लेकर दाखिल याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुनाया।

आरक्षण रोस्टर पर उठे कानूनी सवाल

विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब प्रशासन ने दोनों श्रेणियों के पदों के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी की। विज्ञापन जारी होते ही विभिन्न श्रेणियों के निर्धारण पर आपत्तियां दर्ज कराई जाने लगीं। पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि तय नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उन्हें उचित प्रतिनिधित्व प्रदान नहीं किया गया है।

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याचिकाकर्ताओं के पक्ष को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रूंगटा ने दलील दी कि वर्तमान विज्ञापन में निर्धारित किया गया रोस्टर दिव्यांग वर्ग के विधिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करता है। उन्होंने बेंच को अवगत कराया कि यह व्यवस्था मौजूदा विधायी प्रावधानों के अनुरूप तैयार नहीं की गई है, जिससे संबंधित वर्ग के अवसर सीमित हो रहे हैं। इन तर्कों की गंभीरता को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्धारित लिखित परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्देश दिया और शासन को नोटिस जारी कर विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा।

परीक्षा कार्यक्रम और पदों का विवरण

इस पूरी चयन प्रक्रिया के तहत कुल 2,292 रिक्तियों को भरा जाना तय किया गया था। प्रशासनिक ढांचे के अनुसार इन पदों को दो अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया था, जिसमें ई-संवर्ग के अंतर्गत 795 स्थान तथा टी-संवर्ग के तहत 1497 स्थान निर्धारित थे। पूर्व में निर्धारित समय-सारणी के मुताबिक सहायक शिक्षकों के चयन हेतु लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को होनी थी, जबकि शिक्षकों के पदों के लिए 25 अक्टूबर की तिथि नियत की गई थी। न्यायिक हस्तक्षेप के कारण अब यह संपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो गया है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

अदालती रुख सामने आने के पश्चात नीतिगत स्तर पर हलचल बढ़ गई है। मामले के संदर्भ में छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार अदालत के समक्ष अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका द्वारा उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण कर नियमानुसार विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया जाएगा।

सवाल-जवाब

बिलासपुर उच्च न्यायालय ने किस भर्ती परीक्षा पर रोक लगाई है?
अदालत ने राज्य में होने वाली शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों की भर्ती परीक्षा के आयोजन पर रोक लगाई है।
इस भर्ती के तहत कुल कितने पदों पर चयन होना था?
इस प्रक्रिया के माध्यम से कुल 2,292 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जानी थी।
ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के तहत कितने-कितने पद विज्ञापित किए गए थे?
ई-संवर्ग के अंतर्गत 795 पद और टी-संवर्ग के तहत 1497 पद निर्धारित किए गए थे।
लिखित परीक्षा की मूल तिथियां क्या निर्धारित थीं?
सहायक शिक्षक पद के लिए परीक्षा 11 अक्टूबर को और शिक्षक पद के लिए 25 अक्टूबर को आयोजित होनी थी।
भर्ती प्रक्रिया को अदालत में चुनौती क्यों दी गई?
पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों ने भर्ती विज्ञापन में नियमों के अनुकूल आरक्षण रोस्टर न दिए जाने का आरोप लगाकर चुनौती दी।
मामले पर उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है और राज्य सरकार अदालत के समक्ष अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·4 मिनट पहले

इन परीक्षाओं के रुकने से उन छात्रों का दर्द मैं अच्छे से समझ सकता हूँ जो महीनों से रात-दिन एक करके तैयारी कर रहे थे। पिछले साल जब मेरे एक दोस्त की परीक्षा अचानक टली थी, तो उसका मानसिक तनाव मैंने पास से देखा था। उम्मीद है सरकार जल्दी जवाब देगी ताकि बच्चों का साल खराब न हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 मिनट पहले

भर्ती नियमों में ऐसी गलती कैसे छूट गई, जबकि नोटिफिकेशन से पहले पूरी जांच होनी चाहिए थी। अब हजारों युवाओं का भविष्य अटक गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 मिनट पहले

अजय जी, बिल्कुल सही कहा आपने। सरकार को नोटिफिकेशन निकालने से पहले इन गलतियों पर ध्यान देना चाहिए था, अब खामियाजा युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

लखनऊ में ऐसी ही एक भर्ती परीक्षा कवर करते वक्त मेरी मुलाकात एक दृष्टिबाधित युवा से हुई थी, जो महीनों से लाइब्रेरी में रात-दिन एक कर रहा था। कोर्ट के इस फैसले से यकीनन उन युवाओं की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है जो तारीखों का इंतज़ार कर रहे थे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। अदालती रोक से असली नुकसान उन युवाओं का होता है जो दिन-रात एक करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।

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