छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। कोरबा के कोरबी-कटघोड़ा इलाके में एक निजी चिकित्सालय में प्रसव के पश्चात एक छब्बीस वर्षीय महिला के अचानक लापता होने और फिर उसका शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान कांता केंवट के रूप में हुई है, जिसने अस्पताल में बच्चे को जन्म देने के अगले ही दिन यह खौफनाक कदम उठा लिया। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक प्रसूता अस्पताल परिसर से गायब हो जाती है और किसी को भनक तक नहीं लगती। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और इस दुर्घटना की हर एंगल से गहराई से जाँच की जा रही है।
घटना की शुरुआत तब हुई जब छुरीकला इलाके की रहने वाली कांता केंवट को प्रसव पीड़ा उठने के बाद उसके पति अजय केंवट ने दस सितंबर को कटघोड़ा के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया था। यहाँ डॉक्टरों ने ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया जिसके बाद महिला ने एक शिशु को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद ही नवजात की सेहत अचानक बिगड़ गई, जिसके कारण चिकित्सा कर्मियों ने बच्चे को तुरंत नवजात गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। परिवारजनों के अनुसार, शिशु के आईसीयू में दाखिल होने और उसके उपचार में आ रहे भारी-भरकम खर्च को लेकर कांता बहुत ज्यादा परेशान और मानसिक दबाव में थी। सोमवार की शाम करीब सात बजे वह बिना किसी को कुछ बताए अस्पताल से बाहर निकल गई और फिर वापस नहीं लौटी। जब वह काफी देर तक अपने बिस्तर पर नहीं दिखी तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन कोई पता नहीं चला।
परिजनों ने पूरी रात और अगले दिन मंगलवार की सुबह तक लापता महिला को खोजने की बहुत कोशिश की। अंततः मंगलवार की दोपहर को अस्पताल से महज सौ मीटर की दूरी पर स्थित एक ग्रामीण की बाड़ी में झाड़ियों के बीच पेड़ से लटकता हुआ उसका शव बरामद हुआ। शुरुआती जाँच और परिस्थितियों को देखकर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रसव के बाद की आर्थिक तंगी, बच्चे की बीमारी के कारण उपजा मानसिक तनाव और गहराता अवसाद इस आत्मघाती कदम के पीछे की मुख्य वजह रहे होंगे। बहरहाल, स्थानीय पुलिस इस मामले के अन्य सभी पहलुओं की भी बारीकी से जाँच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके पीछे और क्या स्थितियाँ थीं।
इस प्रकार की घटनाओं को लेकर मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक एक्सपर्ट डॉ अंकित गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण बात साझा की है। उन्होंने बताया कि गर्भधारण और प्रसव के बाद महिलाओं के शरीर में बहुत तेजी से हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे उनका मानसिक संतुलन और स्वभाव काफी संवेदनशील हो जाता है। ऐसे संवेदनशील समय में प्रसव के बाद शुरुआती दस दिनों तक परिवार का माहौल बहुत सकारात्मक और सहयोगी होना चाहिए। यदि प्रसव के तुरंत बाद बच्चा बीमार पड़ जाए या उसे आईसीयू में रखना पड़े, तो माँ का मानसिक तनाव कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे कठिन दौर में परिवार के सदस्यों को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए और प्रसूता को ताना देने या किसी भी प्रकार की डांट-डपट से बचना चाहिए ताकि वह इस मुश्किल दौर का सामना कर सके।


















