छत्तीसगढ़ की सियासत में मंगलवार को एक अनूठा और गरमागरम वाकया सामने आया, जब रायपुर प्रेस क्लब के मंच पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आ गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर छिड़ी इस सीधी बहस के लिए उपमुख्यमंत्री की तरफ से दी गई सार्वजनिक चुनौती को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री खुद प्रेस क्लब पहुंचे थे। करीब 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस सियासी भिड़ंत में दोनों नेताओं के बीच तीखे आंकड़ों, दावों और प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिसने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया।
प्रेस क्लब के बाहर भारी हंगामा और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
इस हाई-प्रोफाइल डिबेट को लेकर रायपुर प्रेस क्लब के बाहर सुबह से ही गहमागहमी और तनाव का माहौल बना हुआ था। आयोजन स्थल के बाहर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता और भारी संख्या में कार्यकर्ता जुट गए थे। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेस क्लब परिसर के अंदर जाने से रोका, जिसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई। इसके अलावा, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
उपमुख्यमंत्री ने रखे अपने कार्यकाल के आंकड़े
डिबेट की शुरुआत करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सरकारी आंकड़ों का पिटारा खोला और दावा किया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान देश में सबसे अधिक पीएम आवास बनाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में कुल 17.75 लाख मकानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। विजय शर्मा ने आगे कहा कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल के भीतर इस योजना पर 16000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके विपरीत, उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके पांच साल के शासनकाल में मात्र 3900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिल पाई थी और महज 3 लाख आवास ही पूरे हो सके थे। उनके मुताबिक, सिर्फ प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा होने की वजह से पिछली सरकार ने गरीबों के मकानों के इस लक्ष्य और आधिकारिक पोर्टल को स्वीकार करने से परहेज किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री का पलटवार और आंकड़ों की जादूगरी का आरोप
दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार के तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज आंकड़ों की जादूगरी करार दिया। बघेल ने तर्क दिया कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में केंद्र सरकार ने राज्यों का वैध फंड रोक रखा था और उस दौरान केंद्रीय पोर्टल भी बंद कर दिए गए थे। इन तमाम अड़चनों के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 6 लाख से अधिक मकानों की आधिकारिक मंजूरी दी थी और लाखों की संख्या में आवासों का निर्माण पूरा करवाया था। उन्होंने मौजूदा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा 46 लाख से अधिक आवास स्वीकृत करने का जो दावा कर रही है, उतने तो पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में मकान ही मौजूद नहीं हैं।
वित्तीय साझेदारी और हार की बात स्वीकार
योजना के वित्तपोषण पर बात करते हुए भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि अतीत में इंदिरा आवास योजना के तहत केंद्र सरकार शत-प्रतिशत राशि मुहैया कराती थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र का और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का होता है, जिससे राज्यों के वित्तीय बजट पर भारी दबाव पड़ता है। चर्चा के दौरान एक बड़ा मोड़ तब आया जब भूपेश बघेल ने स्वीकार किया कि हमने पीएम आवास नहीं बनाए और इसी वजह से जनता ने हमें चुनावों में हार की सजा दी। बहस के दौरान दोनों ही दिग्गजों ने एक-दूसरे के आंकड़ों को गलत बताया। विजय शर्मा ने इस तरह की खुली चर्चा को जनता के सामने पारदर्शिता लाने की एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा बताया, वहीं भूपेश बघेल ने दोहराया कि यदि कांग्रेस के शासनकाल में कोई कमी रह गई थी, तो जनता ने विधानसभा चुनाव में मतों के जरिए उन्हें उसका स्पष्ट जवाब दे दिया है।


















