बेंगलुरु में आम नागरिकों की जेब पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ने वाला है। हाल ही में नंदिनी दूध के दामों में 8 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज किए जाने के बाद, अब राज्य सरकार की बसों में सफर करना भी महंगा होने की तैयारी चल रही है। कर्नाटक के चारों सरकारी परिवहन निगम इस समय गंभीर आर्थिक घाटे और डीजल की बढ़ती कीमतों के भारी संकट का सामना कर रहे हैं। इन सभी परिस्थितियों के बीच राज्य के परिवहन मंत्री बैराथी सुरेश ने इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि सरकार आगामी 4 नवंबर को बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर आधिकारिक घोषणा कर सकती है।
मुख्यमंत्री के साथ चर्चा और आगामी बैठकों का दौर
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री ने हाल ही में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक के दौरान विस्तृत चर्चा की थी और इस विषय से जुड़ा अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी पूरी तरह से परिवहन विभाग के कंधों पर छोड़ दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार परिवहन मंत्री बैराथी सुरेश आगामी 3 नवंबर को परिवहन विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ चारों परिवहन निगमों के प्रबंध निदेशकों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसके ठीक अगले दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नए किराए का ऐलान किए जाने की पूरी संभावना है। यदि यह प्रस्तावित निर्णय लागू कर दिया जाता है, तो मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान यह दूसरा ऐसा अवसर होगा जब किराए में संशोधन किया जा रहा है।
दूध के दाम बढ़ने के बाद किराए में संशोधन की सुगबुगाहट
राज्य मंत्रिमंडल ने 1 नवंबर से नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। संयोग से उसी दिन हुई कैबिनेट बैठक के दौरान सरकारी परिवहन निगमों के किराए में बदलाव को लेकर भी बेहद गंभीर मंत्रणा की गई थी। इस संबंध में जानकारी देते हुए कर्नाटक के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पष्ट किया था कि पिछले साल जनवरी के महीने में ईंधन के रूप में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए थे, और उसी समय से विभिन्न परिवहन निगम लगातार किराया बढ़ाने की मांग करते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया था कि हालांकि उस समय तक आधिकारिक रूप से किराया बढ़ाया नहीं गया था, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय बहुत ही कम समय में लिया जाने वाला है।
चारों परिवहन निगमों के सामने वित्तीय घाटे का गहरा संकट
परिवहन मंत्री बैराथी सुरेश के बयानों के मुताबिक केएसआरटीसी, बीएमटीसी, केकेआरटीसी और एनडब्ल्यूकेआरटीसी यानी चारों निगम इस समय भारी वित्तीय दबाव के दौर से गुजर रहे हैं। डीजल की कीमतों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के कारण इन सभी निगमों के लिए बसों का सुचारू संचालन करना बेहद खर्चीला साबित हो रहा है। स्थिति यहाँ तक पहुँच चुकी है कि इसके चलते अपने कर्मचारियों का समय पर वेतन चुकाना और रोजाना के अन्य जरूरी ख खर्चे संभालना भी मुश्किल साबित हो रहा है। इस गंभीर समस्या से पार पाने के लिए अतुल कुमार तिवारी की अध्यक्षता में एक विशेष किराया नियामक समिति का गठन किया गया था, और इस समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट पहले ही सरकार को सौंप दी है।
शक्ति योजना का प्रभाव और निगमों की माली हालत
कर्नाटक में पिछले साल जून 2023 से शक्ति योजना सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है, जिसके अंतर्गत राज्य की पात्र महिलाओं को सामान्य सरकारी बसों के भीतर पूरी तरह से मुफ्त यात्रा करने की सुविधा प्रदान की जाती है। इस लोक कल्याणकारी योजना के शुरू होने के बाद से बसों में यात्रियों की कुल संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। इसके कारण निगमों की परिचालन जिम्मेदारियाँ और बसों की देखरेख तथा रख-रखाव पर आने वाला खर्च भी काफी हद तक बढ़ गया है। भले ही राज्य सरकार महिलाओं के सफर पर होने वाले इस पूरे खर्च की प्रतिपूर्ति संबंधित निगमों को करती है, लेकिन इसके बावजूद डीजल के लगातार आसमान छूते खर्चों के कारण निगमों का वित्तीय घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी निरंतर बने हुए वित्तीय संकट से निपटने के लिए अब सरकार के पास किराया बढ़ाने के अलावा और कोई ठोस रास्ता नहीं बचा है।



















