हर महीने वेतन आते ही घर-गृहस्थी के छोटे-मोटे खर्चों का सिलसिला शुरू हो जाता है, और महीना खत्म होते-होते बैंक खाते में जमा पूंजी अचानक गायब दिखने लगती है। चाहे रोजमर्रा का दूध-सब्जी का भुगतान हो, ऑफिस जाते वक्त गाड़ी में डलवाया गया पेट्रोल, बच्चों की स्कूल फीस, बिजली-पानी का बिल, मोबाइल रिचार्ज या फिर वीकेंड पर ऑनलाइन मंगाया गया खाना, ये सभी छोटे डिजिटल ट्रांजैक्शन मिलकर पूरे महीने के बजट को बिगाड़ देते हैं। भुगतान के वक्त दस-बीस या पचास रुपये की रकम काफी मामूली लगती है, मगर तीस दिनों का संचयी जोड़ सैलरीड क्लास और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महीने के आखिरी हफ्ते में गंभीर आर्थिक तंगी का कारण बन जाता है। इस उलझन को सुलझाने के लिए किसी जटिल डायरी या अलग हिसाब-किताब के पन्नों की जरूरत नहीं है, क्योंकि फोन में पहले से मौजूद यूपीआई प्लेटफॉर्म के अंदर ही इनबिल्ट ट्रैकिंग टूल उपलब्ध हैं।
मल्टीपल खातों के बैलेंस को एक साथ देखने की सुविधा
शहरी कामकाजी पेशेवरों के पास अमूमन एक से अधिक बैंक खाते होते हैं, जिनमें से एक खाता कंपनी का सैलरी अकाउंट होता है, दूसरा बचत के लिए इस्तेमाल किया जाता है और तीसरा केवल रोजमर्रा के खर्चों के लिए रखा जाता है। अलग-अलग बैंकों के मोबाइल बैंकिंग ऐप में बार-बार लॉग इन करके बैलेंस चेक करना बेहद थकाऊ और उलझन भरा काम साबित होता है। अगर आप पेटीएम जैसे यूपीआई एप्लिकेशन का उपयोग करते हैं, तो इसके अंदर मौजूद बैलेंस एंड हिस्ट्री सेक्शन इन सभी बिखरी हुई जानकारियों को एक ही स्क्रीन पर समेट देता है। इसमें उपलब्ध टोटल बैलेंस व्यू लिंक्ड बैंक अकाउंट्स विकल्प के माध्यम से सभी जुड़े हुए खातों का स्टेटस एक जगह दिख जाता है। प्रत्येक बैंक खाते को उसके निर्धारित यूपीआई पिन से प्रमाणित करने के बाद सिस्टम सभी खातों में जमा रकम को आपस में जोड़कर स्क्रीन के शीर्ष पर कुल उपलब्ध फंड दिखा देता है, जिससे अलग-अलग बैंकिंग प्लेटफॉर्म खोलने और कैलकुलेटर पर बैलेंस जोड़ने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है।
कैटेगरी के हिसाब से समझें अपनी जेब से निकलने वाली रकम
बचत का मजबूत आधार बनाने के लिए यह देखना जरूरी होता है कि खाते में कितनी रकम शेष है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह समझना है कि मेहनत की कमाई किन मदों में सबसे तेजी से बह रही है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए ऐप का स्पेंड समरी पेमेंट्स टूल सभी वित्तीय भुगतानों को अलग-अलग श्रेणियों में स्वचालित रूप से वर्गीकृत कर देता है। इनमें ग्रॉसरी, शॉपिंग, ट्रैवल, बिल्स और यूटिलिटी जैसी आवश्यक श्रेणियां शामिल हैं। महीने के अंत में यूजर आसानी से यह आकलन कर सकते हैं कि कैब की सवारी और बाहर से मंगाए गए भोजन पर कितनी अतिरिक्त राशि खर्च हो गई। वहीं दूसरी तरफ घरेलू राशन, बच्चों की स्कूल फीस और बिजली बिल जैसे अनिवार्य भुगतान अलग सूची में दर्ज रहते हैं, जिससे हर खर्च पर नजर रखना स्वाभाविक हो जाता है और हाथ से बहीखाता लिखने की परंपरागत मशक्कत से मुक्ति मिल जाती है।
गोपनीयता, बायोमेट्रिक सुरक्षा और टैक्स छूट में मददगार
डिजिटल भुगतानों के इस दौर में व्यक्तिगत वित्तीय आंकड़ों की सुरक्षा भी एक बड़ा पहलू है। यदि कोई यूजर अपने निजी खर्चों और लेन-देन के ब्योरे को दूसरों की नजरों से छिपाकर रखना चाहता है, तो इन सभी जानकारियों को एक अलग सुरक्षित सेक्शन में शिफ्ट किया जा सकता है। इस खंड को केवल फिंगरप्रिंट या फेस आईडी जैसे बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए ही खोला जा सकता है। उपभोक्ता जब चाहें तब अपने पूरे महीने या तय अवधि के खर्चों के स्टेटमेंट को पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड करके भविष्य के वित्तीय रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रख सकते हैं। इस डिजिटल स्टेटमेंट का सीधा लाभ इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते समय मिलता है, जहां स्कूल फीस या अन्य छूट योग्य भुगतानों के वैध प्रमाण पेश करके टैक्स छूट का दावा आसानी से किया जा सकता है।


















