अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में गुरुवार को कीमती धातुओं पर भयंकर मंदी का साया देखने को मिला। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारी जॉन विलियम्स के सख्त नीतिगत बयानों के बाद सफेद धातु की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। यूरोपीय व्यापार सत्र के दौरान चांदी का भाव 1.25% से अधिक फिसलकर 63.60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नई तेजी और सख्त मौद्रिक रुख की आशंकाओं ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को गहरा झटका दिया है।
फेडरल रिजर्व के कड़े संकेतों से बढ़ी बिकवाली
बाजार में इस भारी बिकवाली की मुख्य वजह न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने इस वर्ष के अंत तक उधार लागत में एक और वृद्धि की संभावना को पूरी तरह खुला रखा। विलियम्स ने जोर देकर कहा कि केंद्रीय बैंक के लिए इस समय सबसे गंभीर चुनौती महंगाई पर लगाम लगाना है। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार बाजार में सीमित गिरावट के जोखिम और आर्थिक लचीलेपन पर गहरा भरोसा जताया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी गतिविधियों की वजह से मांग काफी मजबूत बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के लिए दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने या बढ़ाने का आधार तैयार हो रहा है।
नीतिगत रुख को मापने वाले पैमानों पर विलियम्स का यह वक्तव्य काफी सख्त श्रेणी में दर्ज किया गया। उनका यह संदेश स्पष्ट करता है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति की वापसी के प्रति बेहद सतर्क है। इस कड़े रुख के सार्वजनिक होते ही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.14% पर पहुंच गई, जिससे डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती मिली और डॉलर में मूल्यवर्गित संपत्तियों की लागत विदेशी खरीदारों के लिए बढ़ गई।
तकनीकी स्तरों पर बढ़ता मंदी का दबाव
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो चांदी का कारोबार 63.79 डॉलर के आसपास देखने को मिला, जहां यह 65.15 डॉलर पर स्थित अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे टिके रहकर मंदी के रुझान को दर्शा रहा है। जब तक खरीदार इस महत्वपूर्ण तकनीकी बाधा को पार नहीं कर लेते, तब तक किसी भी अल्पकालिक उछाल पर बिकवाली का दबाव हावी रहने के आसार हैं।
तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 46.18 के स्तर पर बना हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार में नकारात्मक गति बनी हुई है, हालांकि धातु अभी पूरी तरह से ओवरसोल्ड स्थिति में नहीं पहुंची है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, ऊपरी स्तरों पर 65.15 डॉलर का 20-दिवसीय EMA पहला बड़ा प्रतिरोध रहेगा, जिसके ऊपर दैनिक बंद मिलने पर ही सुधारात्मक रैली की उम्मीद की जा सकती है। इसके विपरीत, गिरावट की स्थिति में 19 अगस्त को छुआ गया 62.19 डॉलर का निचला स्तर मुख्य समर्थन रेखा का काम करेगा।
लाइव सत्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चांदी का भाव 64.04 डॉलर के आसपास टिका है, जो पिछले बंद 64.38 डॉलर के मुकाबले 0.52% की कमजोरी दिखाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 43.70 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है। वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के मुकाबले 7.75 गुना तक पहुंच चुका है, जो बाजार में बड़े सौदों और भारी उथल-पुथल की पुष्टि करता है। मूविंग एवरेज पर नजर डालें तो 50-दिवसीय EMA 64.99 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 66.92 डॉलर पर है, जहां डेथ क्रॉस की स्थिति दीर्घकालिक मंदी की ओर इशारा कर रही है। बोलिंगर बैंड का निचला दायरा 62.53 डॉलर और ऊपरी सिरा 68.61 डॉलर पर स्थित है।
औद्योगिक मांग और बुनियादी कारकों की भूमिका
चांदी न केवल एक सुरक्षित निवेश माध्यम है, बल्कि यह आधुनिक उद्योगों की रीढ़ भी मानी जाती है। तांबे और सोने की तुलना में उच्चतम विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सौर ऊर्जा उपकरणों में चांदी की खपत सबसे अधिक होती है। पिछले कुछ समय में स्वच्छ ऊर्जा और सौर पैनल निर्माण में आए उछाल ने भौतिक मांग को मजबूती दी है, लेकिन आर्थिक मंदी की आशंकाएं इस चक्र को धीमा भी कर सकती हैं।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत चांदी की मांग और मूल्य निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। चीन और अमेरिका के विशाल विनिर्माण केंद्र औद्योगिक प्रक्रियाओं में चांदी की भारी मात्रा का उपभोग करते हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय बाजार में आभूषणों और धार्मिक-पारंपरिक खरीदारी के रूप में विशाल उपभोक्ता मांग पैदा होती है, जो वैश्विक कीमतों को प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करती है। भू-राजनीतिक तनाव या गहरी मंदी की आशंकाओं में निवेशक इसे वेल्थ प्रोटेक्शन के तौर पर खरीदते हैं, हालांकि सोने की तुलना में यह अधिक अस्थिर मानी जाती है।
गोल्ड-सिल्वर अनुपात और वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुख
कीमती धातुओं के बाजार में चांदी का चाल-चलन काफी हद तक सोने की दिशा से भी तय होता है। निवेशक दोनों धातुओं के बीच मूल्यांकन का आकलन करने के लिए गोल्ड/सिल्वर रेश्यो का सहारा लेते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। ऐतिहासिक रूप से जब यह अनुपात बहुत ऊंचा हो जाता है, तो माना जाता है कि चांदी का मूल्यांकन सोने की तुलना में सस्ता है।
इसी बीच अन्य प्रमुख मुद्राओं और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों ने भी विदेशी मुद्रा और जिंस बाजार में उतार-चढ़ाव को हवा दी है। स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को उम्मीद के अनुरूप शून्य प्रतिशत पर बरकरार रखा और वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर 0.7% रहने का अनुमान जताया। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। ऑस्ट्रेलियाई बाजार में अगस्त बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में दबाव दिखा। वहीं डॉलर-येन जोड़ी में सरकारी हस्तक्षेप की आहटों के बीच डॉलर मजबूत बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से पहले भी वैश्विक जिंस कारोबारी अत्यधिक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।


















