प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में टैलेंट सर्च कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा के बाद खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस अहम घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अंबिकापुर के राष्ट्रीय कोच राजेश प्रताप सिंह ने दिल से खुशी जाहिर की है। उनका मानना है कि इस राष्ट्रव्यापी पहल से देश के दूरदराज के इलाकों और बस्तियों से छिपी हुई खेल प्रतिभाएं खुलकर सामने आएंगी, जो आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी और तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।
सरगुजा में पहले से चल रहा है टैलेंट हंट
कोच राजेश प्रताप सिंह ने एक बातचीत के दौरान साझा किया कि सरगुजा जिले में वर्ष 2016 से ही बच्चों के बीच लगातार टैलेंट सर्च और विशेष प्रशिक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इस जमीनी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की सटीक पहचान करना है जो आमतौर पर खेल की मुख्यधारा से कोसों दूर रहते हैं। ग्रामीण अंचलों और झुग्गी-झोपड़ियों से कच्ची प्रतिभाओं को चुनकर उन्हें विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा जाता है और उनकी नैसर्गिक क्षमता को तराशने का काम किया जाता है।
प्रतिभा निखारने की अनूठी प्रक्रिया
राजेश प्रताप सिंह के मुताबिक, टैलेंट सर्च अभियान के दौरान बच्चों को कई तरह की खेल गतिविधियों में शामिल किया जाता है। खेलकूद के दौरान ही बच्चों की शारीरिक क्षमता, फुर्ती और प्रतिभा को बारीकी से परखा जाता है। जो बच्चे मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हें सीधे मुख्यधारा के अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने का मौका दिया जाता है। इस वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रक्रिया से कई छिपे हुए सितारे सामने आते हैं, जिन्हें भविष्य के बड़े मुकाबलों के लिए उच्च स्तर का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाता है।
स्लम और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा बड़ा अवसर
कोच का कहना है कि यदि यह राष्ट्रव्यापी टैलेंट सर्च कार्यक्रम सही और पारदर्शी मापदंडों के साथ तथा पर्याप्त प्रशासनिक सहयोग के तहत जमीन पर लागू किया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा फायदा देश के गांवों और स्लम बस्तियों में रहने वाले बच्चों को मिलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे देश में ऐसे अनगिनत प्रतिभाशाली बच्चे मौजूद हैं, जिन्हें केवल उचित संसाधनों और सही अवसरों की भारी कमी के कारण अपनी कला दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है। देश के हर जिले और हर राज्य में इस तरह के वृहद कार्यक्रमों के संचालन से बच्चों के भीतर खेल के प्रति भारी प्रोत्साहन पैदा होगा।
कम संसाधनों वाले खेलों को मिले प्राथमिकता
खेलों के चयन और प्राथमिकताओं को लेकर राजेश प्रताप सिंह ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया है। उनका मानना है कि ग्रामीण और जमीनी स्तर पर मुख्य रूप से ऐसे खेलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिनमें शुरुआती दौर में अत्यधिक महंगे संसाधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इससे कम लागत में अधिक से अधिक बच्चों को खेलों से जोड़ने में मदद मिलेगी और प्रतिभा कभी साधनों के अभाव में दम नहीं तोड़ेगी।



















