कमोडिटी बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर उपजे हालातों और मौद्रिक नीति को लेकर आने वाले संकेतों के बीच कीमती धातुओं में सुस्ती छाई हुई है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों का असर सीधे तौर पर बुलियन बाजार पर पड़ रहा है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
एमसीएक्स पर सोने और चांदी के मौजूदा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने के भाव कमजोर पड़े हैं और यह 1,54,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। इसमें 325 रुपये या 0.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कारोबार के दौरान बुलियन ने 1,54,783 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर और 1,53,997 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर छुआ। वहीं दूसरी ओर, चांदी में भी शुरुआती बढ़त गायब हो गई और यह अपने इंट्राडे उच्च स्तर 2,41,800 रुपये प्रति 1 किलो से फिसलकर नीचे आ गई। लिखते समय एमसीएक्स पर चांदी 2,39,971 रुपये प्रति 1 किलो पर ट्रेड कर रही थी, जो 150 रुपये या 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ अपने निचले स्तर 2,39,722 रुपये प्रति 1 किलो के आसपास है। च्वाइस की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, वैश्विक कारकों और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी के चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार और क्रूड ऑयल की स्थिति
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना कमजोर होकर 4,430 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि हाजिर चांदी सीमित दायरे में रहते हुए 66.50 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकी हुई है। इसी बीच कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल आया है और यह ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड दोनों में 1-1 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे ये क्रमशः 86.71 डॉलर प्रति बैरल और 91.2 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।
ब्याज दरों और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं
कीमती धातुएं इस समय दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब मंडरा रही हैं। पिछले सप्ताह जैक्सन होल बैठक में यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के सख्त बयानों के बाद बाजार की धारणा कमजोर हुई है। इस रुख से सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका फिर से गहरी हो गई है, जिसकी मुख्य वजह जिद पकड़ चुकी महंगाई है। अमेरिकी सेना द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के एक द्वीप पर हमला करने और इसके जवाब में ईरान द्वारा यूएई तथा जॉर्डन पर हमले के बाद तेल की कीमतें लगातार दूसरे सत्र में ऊपर चढ़ी हैं।
फेडरल रिजर्व का रुख और बाजार का आकलन
बढ़ती ऊर्जा लागत ने महंगाई से जुड़ी चिंताओं को और हवा दे दी है, जिससे निकट भविष्य में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हो गई है, जो आम तौर पर बुलियन के लिए नकारात्मक माना जाता है। इस बीच चेयरमैन केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि जब तक इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते कि महंगाई वापस अपने 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर लौट रही है, तब तक फेड को काम करना बाकी है।
बाजार अब सितंबर में दरें बढ़ने की संभावना 65 प्रतिशत से अधिक मान रहा है, जो इन बयानों से पहले लगभग 36 प्रतिशत थी। इसके बावजूद अगस्त महीने में सोने में करीब 10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के बॉंडों की लिक्विडिटी-सपोर्ट बायबैक योजनाओं को दोगुना करने की घोषणा के बाद तथाकथित डिबेसमेंट ट्रेड को फिर से बल मिला था।
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