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भारत चीन सीमा विवाद पर कूटनीतिक हलचल तेज, बीजिंग में वांग यी से मिलेंगे अजीत डोभालचीन
23 अग॰ 2026, 1:39 pm (1 घंटे पहले)· 3

भारत चीन सीमा विवाद पर कूटनीतिक हलचल तेज, बीजिंग में वांग यी से मिलेंगे अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंच रहे हैं, जहां वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता करेंगे।

भारत और चीन के बीच लंबे समय से बने सीमा तनाव को सुलझाने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंच रहे हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों के बीच यह महत्वपूर्ण बातचीत मंगलवार को आयोजित की जाएगी।

3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर शांति बनाने की कोशिश

इस उच्च स्तरीय बातचीत का मुख्य ध्यान दोनों देशों के बीच फैली 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव को कम करना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य गतिरोध को खत्म करने और किसी भी संभावित विवाद का स्थायी कूटनीतिक हल तलाशने के उद्देश्य से दोनों पक्ष टेबल पर आमने-सामने होंगे। संवेदनशील गश्ती बिंदुओं पर स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के हित में है।

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2003 से जारी विशेष प्रतिनिधि वार्ता तंत्र

सीमा विवाद के व्यापक और शांतिपूर्ण समाधान के लिए दोनों देशों ने साल 2003 में विशेष प्रतिनिधि व्यवस्था की शुरुआत की थी। इस कूटनीतिक तंत्र के तहत अजीत डोभाल और वांग यी अपने-अपने देशों के नामित मुख्य वार्ताकार हैं। लंबे अंतराल के बाद हो रही इस बैठक पर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

सवाल-जवाब

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग क्यों जा रहे हैं?
वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमा वार्ता में भाग लेने बीजिंग जा रहे हैं।
भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि वार्ता कब होगी?
यह वार्ता मंगलवार को बीजिंग में आयोजित होगी।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की लंबाई कितनी है?
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) 3,488 किलोमीटर लंबी है।
विशेष प्रतिनिधि व्यवस्था की शुरुआत कब की गई थी?
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए इस विशेष प्रतिनिधि तंत्र की शुरुआत साल 2003 में हुई थी।
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