इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दो प्रमुख शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर ताइवान जलडमरूमध्य के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में खुलकर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना के एक समुद्री गश्ती विमान ने ताइवान जलडमरूमध्य से होकर उड़ान भरी, जिसके तुरंत बाद ताइवानी रक्षा अधिकारियों ने अपने द्वीप के आसपास चीनी सैन्य विमानों, नौसैनिक युद्धपोतों और सरकारी जहाजों की भारी मौजूदगी दर्ज की। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।
अमेरिकी नौसेना की गश्त और चीन की चौकसी
शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना के पी-8ए पोसाइडन विमान ने ताइवान जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय वायुक्षेत्र से गुजरते हुए अपनी उड़ान पूरी की। इस पारगमन की पुष्टि करते हुए अमेरिकी 7वीं फ्लीट ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह उड़ान पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, यह गश्त 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' के प्रति वाशिंगटन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अमेरिका ने जोर देकर कहा है कि उसकी सेनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहां भी अनुमति होगी, वहां उड़ान भरने, नौवहन करने और अपना संचालन जारी रखने का अधिकार रखती हैं।
दूसरी ओर, चीनी सैन्य बलों ने इस अमेरिकी गश्ती विमान की आवाजाही पर लगातार नजर रखी और पूरे रास्ते उसे ट्रैक किया। चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, सेना के एक सूत्र ने बताया कि ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रखी गई थी। चीनी पक्ष इस संवेदनशील जलमार्ग में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती मानता रहा है और समय-समय पर इस तरह की गश्तों पर अपनी कड़ी आपत्ति जताता रहा है।
ताइवान जलडमरूमध्य में तीन दिनों की सैन्य गतिविधि
अमेरिकी विमान की उड़ान के साथ ही द्वीप के आसपास चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का जमावड़ा बढ़ गया। ताइवान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार
- गुरुवार: क्षेत्र में चीन के 7 सैन्य विमान, 8 नौसैनिक युद्धपोत और 6 सरकारी जहाज दर्ज किए गए। इनमें से 5 चीनी विमानों ने ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में प्रवेश किया था।
- शुक्रवार: ताइवान के तटीय इलाकों के पास चीनी नौसेना के 7 जहाज और 6 सरकारी पोत सक्रिय पाए गए।
- शनिवार: सैन्य उपस्थिति में और तेजी आई, जब ताइवान ने अपने आसपास 3 चीनी विमानों, 8 नौसैनिक पोतों और 7 सरकारी जहाजों को चिह्नित किया। इस दौरान तीनों चीनी विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा (मीडियन लाइन) को पार करते हुए उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में घुसपैठ की। ताइवानी रक्षा बलों ने स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी और आवश्यक जवाबी कदम उठाए।
कूटनीतिक शिखर सम्मेलन से पहले की संवेदनशीलता
इस सैन्य घटनाक्रम का समय रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेता व्यापार, उन्नत तकनीक और ताइवान के मुद्दे पर बने गतिरोध को सुलझाने और द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता लाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, एक तरफ उच्च स्तरीय वार्ता की तैयारी और दूसरी तरफ जलडमरूमध्य में जारी सैन्य प्रदर्शन दोनों देशों के जटिल और संवेदनशील रिश्तों की हकीकत को उजागर करता है।
ताइवान का ऐतिहासिक रक्षा बजट प्रस्ताव
क्षेत्र में लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए ताइवान सरकार ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। ताइवान ने वर्ष 2027 के लिए अपने रक्षा बजट में 18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। इस बढ़ोतरी के साथ ताइवान का कुल रक्षा खर्च इतिहास में पहली बार 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा।
प्रस्तावित रक्षा बजट लगभग 1.1225 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर (करीब 31.41 अरब डॉलर) निर्धारित किया गया है, जो ताइवान की कुल जीडीपी के 3 प्रतिशत से अधिक है। इस अतिरिक्त बजटीय आवंटन का एक बड़ा हिस्सा ड्रोन तकनीक और उन्नत मिसाइल प्रणालियों को खरीदने तथा विकसित करने पर खर्च किया जाएगा। ताइवानी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन आधुनिक हथियारों के लिए अतिरिक्त फंडिंग के प्रस्तावों को पहले संसद में मंजूरी मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।



















