किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच पर जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपना संबोधन दिया, तो उनके बयानों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और सुरक्षा हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विश्व राजनीति में चीन के शीर्ष नेतृत्व का प्रत्येक संबोधन केवल एक औपचारिक बयान नहीं होता, बल्कि उसमें चीन की आंतरिक शासन प्रणाली, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं की गहरी झलक दिखाई देती है। बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान जिनपिंग ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में आह्वान किया कि संगठन के सभी सदस्य देशों को सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद के खिलाफ बिना किसी समझौते के सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। चीन के राजनीतिक शब्दकोश में इन तीनों विषयों को 'तीन बुराइयां' कहा जाता है, और इनका सीधा तथा गहरा संबंध चीन के अशांत शिनजियांग प्रांत तथा वहां की उइगर मुस्लिम आबादी से रहा है। ऐसे समय में जब संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार निकाय शिनजियांग में चीन की नीतियों पर लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं, जिनपिंग का यह वक्तव्य वैश्विक स्तर पर एक नई बहस का कारण बन गया है।
बिश्केक में एससीओ की 26वीं बैठक और क्षेत्रीय सुरक्षा की व्यापक रूपरेखा
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 26वीं बैठक का आयोजन किया गया था। इस उच्च स्तरीय क्षेत्रीय मंच पर बोलते हुए शी जिनपिंग ने संगठन के भविष्य के लिए एक व्यापक सुरक्षा रोडमैप की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि एससीओ का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के लिए एक साझा, सुरक्षित और स्थिर वातावरण का निर्माण करना होना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सुरक्षा की परिभाषा केवल पारंपरिक सैन्य खतरों तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से भी एकजुट होकर निपटने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। जिनपिंग के अनुसार, सीमा पार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी और तेजी से बढ़ते नेटवर्क आधारित टेलीकॉम फ्रॉड जैसे आपराधिक कृत्य क्षेत्रीय शांति, जन-जीवन और आर्थिक प्रगति में बड़ी बाधा बन रहे हैं। इन खतरों से निपटने के लिए एससीओ के सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान और पुलिस सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने का विचार रखा गया।
डिजिटल, जैव और अंतरिक्ष सुरक्षा में नए तकनीकी सहयोग की पहल
आधुनिक युग की नई चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शी जिनपिंग ने एससीओ के दायरे को पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सूचना सुरक्षा, डेटा संप्रभुता, जैव सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) और अंतरिक्ष सुरक्षा जैसे नए क्षेत्र क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुके हैं। चीन ने इन आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोगात्मक ढांचे को मजबूत करने का आह्वान किया। जिनपिंग के भाषण में स्पष्ट रूप से संकेत दिया गया कि साइबर स्पेस में बढ़ते खतरों और डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण पाए बिना कोई भी देश अपनी आंतरिक सुरक्षा को पूरी तरह अक्षुण्ण नहीं रख सकता। इसलिए, सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर निगरानी के क्षेत्र में एससीओ का साझा तंत्र विकसित करना चीन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बाहरी दखल का विरोध और राजनीतिक व्यवस्था की स्थिरता का बचाव
बिश्केक सम्मेलन में शी जिनपिंग के वक्तव्य का एक प्रमुख हिस्सा क्षेत्रीय संप्रभुता और विदेशी हस्तक्षेप के विरोध पर केंद्रित था। उन्होंने एससीओ मंच से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बाहरी ताकतों को किसी भी स्थिति में सदस्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। चीनी राष्ट्रपति का तर्क था कि किसी भी राष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता और शासन प्रणाली की सुरक्षा ही वहां के आर्थिक विकास और सामाजिक शांति का आधार होती है। बीजिंग की सुरक्षा सोच के अनुसार, सुरक्षा का तात्पर्य केवल सीमाओं पर सैनिकों की तैनाती नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक संरचना को किसी भी आंतरिक या बाहरी झटके से बचाना, अलगाववादी आंदोलनों का समूल नाश करना और राष्ट्रीय संप्रभुता को चुनौती देने वाले किसी भी विचार को नियंत्रित करना है।
शिनजियांग की रणनीतिक स्थिति और उइगर समुदाय का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
शी जिनपिंग के इस सुरक्षा केंद्रित भाषण को शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के ऐतिहासिक और रणनीतिक परिदृश्य के बिना नहीं समझा जा सकता। शिनजियांग चीन के सुदूर पश्चिमी हिस्से में स्थित एक बेहद विशाल और संसाधन-समृद्ध प्रांत है। इसकी भौगोलिक सीमाएं मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों के साथ मिलती हैं, जिससे यह क्षेत्र चीन की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति और 'बेल्ट एंड रोड' पहल का एक अति-महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बन जाता है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से उइगर समुदाय निवास करता है, जो तुर्किक मूल का एक बहुसंख्यक मुस्लिम जातीय समूह है। शिनजियांग में बीते कई दशकों के दौरान जातीय तनाव, हिंसक घटनाएं और अलगाववादी आंदोलनों का एक लंबा इतिहास रहा है। चीन सरकार का दावा है कि इस क्षेत्र में सक्रिय अलगाववादी और कट्टरपंथी समूह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते रहे हैं। बीजिंग अपनी सख्त प्रशासनिक और सुरक्षा नीतियों का बचाव करते हुए तर्क देता है कि इन्हीं कठोर कदमों के कारण शिनजियांग में हिंसा पर अंकुश लगा है और आर्थिक समृद्धि को गति मिली है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की 2022 की जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष
चीन की इन आंतरिक सुरक्षा नीतियों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने शिनजियांग की स्थिति पर एक व्यापक और विस्तृत जांच के बाद 2022 में अपनी आधिकारिक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में उइगरों और अन्य मुख्यतः मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनमानी हिरासत, यातना, अमानवीय व्यवहार, धार्मिक प्रथाओं पर पाबंदियों, सांस्कृतिक पहचान के दमन और व्यक्तिगत निजता के हनन जैसे अत्यंत गंभीर आरोपों का बारीकी से अध्ययन किया गया था। संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने अपने निष्कर्ष में बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा था कि शिनजियांग में व्यापक और भेदभावपूर्ण तरीके से लोगों को हिरासत में लेने की सरकारी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय अपराधों की श्रेणी में आ सकती है। रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया था कि यह दमनकारी ढांचा मानवता के खिलाफ अपराध (क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी) के स्तर तक पहुंच सकता है।
मानवाधिकार संगठनों के दावे और चीन का रक्षात्मक रुख
संयुक्त राष्ट्र की जांच के अलावा, दुनिया भर के स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन भी शिनजियांग की स्थिति पर अपनी निगरानी बनाए हुए हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच ने 2026 की अपनी रिपोर्ट में शिनजियांग का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए चिंता जताई है कि वहां उइगर समुदाय के जबरन सांस्कृतिक आत्मसातीकरण और व्यापक दमन की प्रक्रिया थमी नहीं है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि चीन सरकार द्वारा लागू की गई अत्यधिक सख्त सुरक्षा नीतियों और तकनीकी निगरानी के कारण उइगर समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वतंत्रता बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि, चीन सरकार इन सभी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों, आरोपों और मानवाधिकार संगठनों के निष्कर्षों को पूरी तरह से खारिज करती रही है। बीजिंग का निरंतर यह रुख रहा है कि शिनजियांग में चलाए जा रहे केंद्र कोई हिरासत शिविर नहीं हैं, बल्कि वे व्यावसायिक प्रशिक्षण और कट्टरपंथ से मुक्ति के केंद्र हैं। चीन का दावा है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और क्षेत्र से आतंकवाद तथा धार्मिक अतिवाद की सोच को समाप्त करना है।
बिश्केक संबोधन में शिनजियांग सुरक्षा मॉडल की झलक और भविष्य के संकेत
एससीओ की 26वीं बैठक में शी जिनपिंग द्वारा 'आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद' को एक साथ जोड़कर आक्रामक रणनीति बनाने का आह्वान असल में चीन के उसी आंतरिक सुरक्षा मॉडल का विस्तार प्रस्तुत करता है जिसे वह शिनजियांग में वर्षों से अपनाता आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की 2022 की रिपोर्ट भी स्पष्ट करती है कि चीनी अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और अतिवाद नियंत्रण के नाम पर कई कठोर कानून और प्रशासनिक नीतियां बनाई थीं, जिनका सीधा असर उइगरों पर पड़ा। बिश्केक में जिनपिंग का यह संबोधन दर्शाता है कि चीन अपने इस सुरक्षा मॉडल को न केवल घरेलू स्तर पर बनाए रखना चाहता है, बल्कि एससीओ के माध्यम से अपने पड़ोसी देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच भी इसे एक प्रामाणिक सुरक्षा दृष्टिकोण के रूप में स्थापित करने की मंशा रखता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उइगर मुद्दे की गूंज और चीन की सख्त सुरक्षा प्रतिबद्धता यह स्पष्ट करती है कि शिनजियांग का सवाल आने वाले समय में भी वैश्विक कूटनीति का एक अत्यंत संवेदनशील और अनसुलझा पहलू बना रहेगा।


















